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Category: राजनीति

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सैन्य की जयजवंती: भारत में मिलिटरिज़्म की बढ़ती ध्वनि और राजनीतिक प्रतिध्वनि

‘ऑल हैइल द मिलिटरी’ नामक नई डॉक्यूमेंट्री श्रृंखला ने इस सप्ताह भारत में बढ़ते मिलिटरिज़्म के ताने-बाने को उजागर किया। विकीर्ण शक्ति संरचनाओं, निजी रक्षा कंपनियों और नैतिकता‑परक असंतुलन को पुख्ता करने वाले तंत्र को दर्शाते हुए यह श्रृंखला सरकार‑विपक्ष के बीच एक नया विमर्श उत्पन्न कर रही है।

केन्द्र सरकार ने इस कार्यक्रम को राष्ट्रीय सुरक्षा की बढ़ती आवश्यकताओं की दिशा में एक सकारात्मक संकेत के रूप में सराहा। राजमंत्री ने कहा, “जब देश को तीव्र सुरक्षा चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है, तब हमारी सैन्य शक्ति का जयघोष स्वाभाविक है।” इस बयान में कई नज़रों ने यह प्रश्न उठाया कि क्या इस तरह की सार्वजनिक स्वीकृति के पीछे सरकार के आगामी चुनावी अभियान की ध्वनि नहीं है।

विपक्षी दल, विशेषकर राष्ट्रवादी कांग्रेस और भारतीय जनतांत्रिक मोर्चा, ने इस श्रृंखला को ‘सैन्य‑केन्द्रित नीति‑उत्सव’ के रूप में खारिज किया। उन्होंने रक्षा बजट में बेशुमार वृद्धि—पिछले वित्तीय वर्ष में 4.5 प्रतिशत से बढ़कर 5.2 प्रतिशत—को ‘जनता के कल्याण से संसाधन विमुख’ कहा, और पारदर्शी नागरिक निगरानी के अभाव पर सवाल उठाए। कई सांसदों ने कहा, “जब हमें किसानों, स्वास्थ्य और शिक्षा के क्षेत्र में गति चाहिए, तब हम सैन्य पर इतने पैसे क्यों बिखेरते हैं?”

विशेषज्ञों का तर्क है कि मिलिटरिज़्म का उदय केवल खर्च की बात नहीं, बल्कि नीति‑निर्माण में नागरिक नियंत्रण का क्षीण होना भी दर्शाता है। इस श्रृंखला में दिखाए गए निजी हथियार निर्माताओं के साथ सरकारी समझौतों को ‘डरावना मिलिटरी‑इंडस्ट्री कॉन्ग्लोमरेट’ कहा गया, जो लोकतांत्रिक उत्तरदायित्व को चुप कर देता है। कुछ राजनयिक रायकारों ने चेतावनी दी कि ऐसी प्रवृत्तियां अंतरराष्ट्रीय प्रतिरूप में भारत को ‘सैन्य‑प्रधान’ छवि में बाँध सकती हैं, जिससे कूटनीतिक लचीलापन घट सकता है।

सार्वजनिक हित की दृष्टि से, बुनियादी सुविधाओं में रुकावट और सामाजिक सुरक्षा नेटवर्क में कटौती के साथ मिलिटरी‑केन्द्रित नीतियों का संतुलन बनाना चुनौतीपूर्ण बना हुआ है। बहु‑पार्टी गठबंधनों के बीच इस मुद्दे पर चर्चा जारी है, पर सवाल अभी भी बना है कि क्या ‘सैन्य की जयजवंती’ को लोकतंत्र के मंच पर स्थायी शिल्पकार माना जाएगा, या यह केवल चुनावी रैली का एक और जाल है।

Published: May 7, 2026