सूडान ने इथियोपिया और यूएई को ड्रोन हमलों का आरोपी बना दिया
सूडान के परराष्ट्र मंत्रालय ने हाल ही में जारी बयान में कहा कि वह चार ड्रोन हमलों के स्रोत को पहचान चुका है, जिनमें से सभी को इथियोपिया से प्रक्षेपित होने और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) से आपूर्ति किए गए ड्रोन के प्रयोग से जोड़ा गया है। यह दावा दुर्दम्य गृहयुद्ध के बीच में आया है, जहाँ दो प्रतिद्वंद्वी सेनाएँ निरंतर एक‑दूसरे पर हवा और भूमि से दाग लगाते आ रही हैं।
इथियोपिया, जो हाल ही में अपने भीतर तीग्रा संघर्ष के कारण अंतरराष्ट्रीय आलोचना का शिकार रहा, पर इस बार नज़रें ड्रोन आपूर्ति को लेकर यूएई की ओर मुड़ गई हैं। दुबई, जो अपनी सैन्य आइटर्नियर के लिए जानी जाती है, इस संबंध में अभी तक कोई टिप्पणी नहीं कर पाई है, पर इस मुद्दे पर उसकी नीति‑निर्माता टीम पर प्रश्न उठ रहा है कि वह अफ्रीकी महाद्वीप में हथियारों की बिक्री को कैसे नियमन करती है।
भारत के लिए यह विकास दोहरी समस्या पेश करता है। एक ओर, भारत‑अफ़्रीका संबंधों को सुदृढ़ करने के लिए नए आर्थिक और ऊर्जा साझेदारी की तलाश में है, जबकि दूसरी ओर, एंटी‑टेररिस्ट और मानवीय सहायता के संदर्भ में घाने असंतुलन की आशंकाएँ सामने आ रही हैं। भारत का विदेश नीति मंच अक्सर ‘रणनीतिक स्वायत्तता’ का हवाला देता है, पर वास्तविकता में यह कैसे लागू होगा, इस पर संसद में विपक्षी दल सवाल उठा रहे हैं। विशेषकर जब भारत के आधे से अधिक रक्षा आयात यूएई से होते हैं, तो इस प्रकार के ड्रोन उपयोग को लेकर उत्तर‑दायित्व और पारदर्शिता की माँगें तेज़ हुई हैं।
देश के प्रधानमंत्री कार्यालय ने अभी तक इस मामले पर कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं की, पर विदेश मंत्रियों के साप्ताहिक ब्रीफिंग में संभावित ‘रिपोर्ट‑कार्ड’ माँगना अनिवार्य हो सकता है। विपक्षी दल, विशेषकर राष्ट्रीय लोकतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) के भीतर के व्यापक विरोधी आवाज़ें, सरकार को अंतरराष्ट्रीय हथियार बाजार में भारतीय सहभागिता की निगरानी करने और ऐसी गतिविधियों को रोकने का आग्रह कर रहे हैं।
सूडान में चल रहे संघर्ष पर इस नई तरह की हवाई हमले की रिपोर्ट, क्षेत्रीय स्थिरता को गहरा नुकसान पहुंचा सकती है। अफ्रीकी संघ (एएफए) ने पहले ही इस मुद्दे पर एक संयुक्त बयान जारी किया था, जिसमें ‘जिम्मेदारियों की स्पष्ट पहचान’ और ‘हथियार प्रवाह पर कड़ा नियंत्रण’ की मांग की गई थी। जब अफ्रीका में शक्ति‑संतुलन परिवर्तनशील रहता है, तो भारत का रणनीतिक हित भी बदलता है—विशेषकर जब वह अपनी विदेश नीति में ‘संतुलित सहयोग’ को प्रमुख मानता है।
एक ओर, इथियोपिया का दावा है कि उसकी सीमाओं के भीतर कोई ड्रोन संचालन नहीं हुआ, और वह इस मुद्दे को ‘रुझानी’ कहता है। दूसरी ओर, यूएई ने अभी तक आधिकारिक तौर पर ड्रोन निर्यात नीति में कोई बदलाव नहीं किया है, जबकि अंतरराष्ट्रीय निर्यात नियंत्रण संघ (उन्हैं प्रमोट करने वाले संगठनों) से यह अपेक्षा की जाती है कि वे ‘उपयोगकर्ता’ की जाँच को सख्त बनाएँ।
इस परिदृश्य में, भारतीय नीति निर्माताओं को दो प्रमुख चुनौतियों का सामना करना पड़ेगा: पहले, अफ्रीका के साथ रणनीतिक साझेदारी को सुरक्षित रखना, जबकि दूसरे, अपने रक्षा आयात का ‘जिम्मेदार उपयोग’ सुनिश्चित करना। संसद में अभी आने वाले बहसें इस दिशा‑निर्देश को स्पष्ट कर सकती हैं और यह तय कर सकती हैं कि भारत किस हद तक अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा मुद्दों में मध्यस्थ बनकर अपने नैतिक दायित्वों को निभाएगा।
Published: May 5, 2026