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Category: राजनीति

स्टारमर ने ईरान को किया कड़ा संदेश: यहूदी विरोधी उकिसाब बर्दाश्त नहीं

ब्रिटेन के प्रधानमंत्री केर स्टारमर ने मंगलवार को ईरान को स्पष्ट चेतावनी दी कि वह देश यदि यहूदी समुदाय के प्रति उकसावन जारी रखेगा तो इसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। यह बयान दिल्ली‑लंदन के बीच बढ़ती एकसंधता के बीच आया, जहाँ भारत के विदेश मंत्रालय ने भी हालिया संयुक्त राष्ट्र मंच पर ईरान की नीतियों की निंदा की थी।

डाउनिंग स्ट्रीट में आयोजित शिखर सम्मेलन में, जहाँ कई विदेशियों और नागरिक समाज के प्रतिनिधियों ने उपस्थित किया, स्टारमर ने "हानिकारक खतरों" को संबोधित करने का वादा दोहराया। उन्होंने कहा कि ब्रिटिश सरकार antisemitism के विरुद्ध सख्त कदम उठाएगी, चाहे वह घरेलू असहिष्णुता हो या विदेशी सरकारों द्वारा उत्पन्न प्रदर्शित हो। यह घोषणा ब्रिटिश विपक्ष, विशेषकर कंजरवेटिव नेता, के प्रश्नों के जवाब में आई, जिन्होंने पिछले साल सरकार पर यहूदी समुदाय की सुरक्षा के मामलों में लापरवाह रहने का आरोप लगाया था।

विरोधी दल ने तुरंत आलोचना की, कहते हुए कि इस प्रकार के रैंपेजिंग भाषण अक्सर कूटनीति की असली समस्याओं से ध्यान हटाते हैं। कंजरवेटिव सांसद जेम्स डायर ने कहा, "इंकारिया बयान तो बहुत सहज हैं, पर असली मुद्दा है कब और कैसे इस नीति को जमीन पर उतारा जाएगा, इसलिए हमें ठोस कार्य‑योजना चाहिए, न कि केवल शब्दों का महोत्सव"।

संबंधित नीति‑प्रभाव की बात करें तो ब्रिटेन ने पिछले कुछ महीनों में कई आक्रमणकारी कदम उठाए हैं: ईरान के प्रमुख सैन्य अधिकारियों पर आर्थिक प्रतिबंध, और घरेलू स्तर पर antisemitism के शिकारों को सहायता देने के लिए नई फंडिंग योजना। हालांकि, इन उपायों की कार्यक्षमता पर सवाल उठ रहे हैं। कई गैर‑सरकारी संगठनों ने रिपोर्ट किया है कि यूरोप और यूएसए में समान प्रतिबंधों से ईरान को वास्तव में आर्थिक दबाव नहीं मिला है, जबकि भारत जैसे देशों में ईरान के साथ रणनीतिक सहयोग जारी है, विशेषकर ऊर्जा क्षेत्र में। यह द्वैत सत्ता और आर्थिक हितों की जटिल भरमार को दिखाता है।

भारत‑ब्रिटेन संबंधों के संदर्भ में, इस बयान का एक अप्रत्यक्ष असर पड़ सकता है। भारत ने हाल ही में ईरान के साथ वैकल्पिक तेल आयात को बढ़ाया है, जिससे दोनों देशों के बीच आर्थिक गठबंधन मजबूत हुआ है। ब्रिटिश विदेश मंत्रालय ने इस मुद्दे को "पारस्परिक सम्मान" के सिद्धांत पर रख कर, भारत के साथ सहयोग को पुनः मूल्यांकित करने का संकेत दिया है। वहीं, भारतीय जमीनी स्तर के यहूदी समुदाय ने इस विकास पर मिश्रित प्रतिक्रिया दी है; कुछ पक्ष इसे विश्व स्तर पर ईंटीय उन्माद के खिलाफ सहयोग की प्रतिबद्धता मानते हैं, तो कुछ इसे विदेश नीति में दोहरी मानदंड रखने की ओर इशारा करते हैं।

अंत में, स्टारमर का यह बयान राजनीतिक रूप से संवेदनशील समय में आया है, जब घरेलू असहिष्णुता के मामलों में जनता से जवाबदेही की मांग बढ़ रही है। यदि सरकार वास्तव में "हानिकारक खतरों" को जड़ से खत्म करना चाहती है, तो उसे न केवल शब्दों में, बल्कि कानूनी व्यवस्था, पुलिस प्रवर्तन और अंतरराष्ट्रीय सहयोग में ठोस कदम उठाने होंगे। वरना, यह फिर भी एक राजद्रोही रैपिडरी बन कर रह सकता है, जो चुनावी मंच पर देखी जाने वाली रेटोरेटिक का हिस्सा ही रहेगा।

Published: May 5, 2026