शहर परिषद में छपे मतपत्र न मिलने की समस्या पर तत्काल जांच की घोषणा
वित्तीय वर्ष 2026‑27 के अंतर्गत आयोजित होने वाले नगर चुनावों में, कई पोस्टल वोटरों ने बताया कि उन्हें मतपत्र नहीं मिला। इस मज़बूत शिकायत के बाद शहर की परिषद ने "अत्यावश्यक" जांच का आदेश दे दिया, जिससे प्रशासनिक लापरवाही और चुनावी प्रक्रिया की भरोसेमंदी पर सवाल उठे हैं।
परिषद के अधिकारी कहते हैं कि मतपत्रों की डिलीवरी में तकनीकी गड़बड़ी और डाक विभाग की सहयोगी कमी के कारण देरी हुई। लेकिन विरोधी दलों ने इसे "भ्रष्टाचार की बौछार" कहकर आरोप लगाया कि सरकारी पक्ष ने चुनावी परिणामों को प्रभावित करने के लिए जानबूझ कर ऐसी चूक की। कई स्थानीय नेताओं ने कहा कि यदि पोस्टल वोटिंग का भरोसा नहीं बनाया जा सकता, तो आगामी नगर निगम चुनावों की वैधता ही संकट में पड़ सकती है।
राष्ट्रपति निकाय के चुनाव आयोग ने पहले ही कहा था कि पोस्टल वोटिंग को ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में समान रूप से सुलभ बनाने के लिए नई तकनीकी व्यवस्था लागू की जाएगी। परंतु इस मामले में न केवल डाक प्रणाली के प्रति अति भरोसा दिखा, बल्कि प्रक्रियागत निरीक्षण की कमी भी स्पष्ट हुई। विपक्षी सांसदों ने यह माँग की कि इस जांच में स्वतंत्र तृतीय पक्ष को शामिल किया जाए और जिम्मेदार अधिकारियों को सरकरी हाथों में जवाबदेही के साथ रखा जाए।
परिषद ने कहा कि जांच में पाया गया कि कुछ मतपत्रों को अनुचित क्रम में भेजा गया, कुछ ड्रॉप बॉक्स में टूट-फूट हुई, तथा कुछ गांवों तक पहुँचते‑पहुँचते उनकी वैधता समाप्त हो गई। परिणामस्वरूप, पोस्टल वोटिंग में भाग लेने वाले नागरिकों को अपना मताधिकार प्रयोग करने का अवसर नहीं मिला। यह केवल एक प्रशासनिक चूक नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक अधिकारों पर सीधा हमला माना गया।
संकट से बाहर निकलने के लिए, परिषद ने तुरंत एक पुनः-डिलीवरी योजना तैयार करने और सभी बिलिंग फ़ॉर्म को डिजिटल रूप में ट्रैक करने का प्रस्ताव रखा। साथ ही, अगले दो हफ़्तों में एक स्वतंत्र ऑडिट रिपोर्ट को सार्वजनिक करने का वादा किया गया। विपक्ष ने कहा कि यह कदम पर्याप्त नहीं है, जब तक दोषी अधिकारियों को हटाया नहीं जाता और भविष्य में ऐसी त्रुटियों को रोकने के लिए कड़े नियम नहीं बनते, तब तक जनता का विश्वास फिर से नहीं लौटेगा।
भविष्य की चुनौतियों को देखते हुए, राजनीतिक विश्लेषकों का अनुमान है कि इस विवाद का असर आगामी नगरपालिका चुनावों में बड़ा हो सकता है। यदि मतपत्र वितरण की चूक को ठीक नहीं किया गया, तो बाहुबली चुनावी दांवपेंच के बीच लोकतांत्रिक प्रक्रिया की वैधता पर गंभीर प्रश्न उठेंगे।
Published: May 5, 2026