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Category: राजनीति

विश्व कप में IRGC को अपमान न करने का आग्रह: इरान के फुटबॉल प्रमुख की चेतावनी

इंटरनैशनल फुटबॉल महासंघ (FIFA) द्वारा संयुक्त राज्य, कनाडा और मेक्सिको में 2026 में आयोजित होने वाले विश्व कप के संबंध में इरान के फुटबॉल संघ के प्रमुख मेहदी ताज़ ने अमेरिकी सह‑आयोजकों को स्पष्ट चेतावनी दी है। ताज़ का कहना है कि प्रतियोगिता के दौरान इस्राइल-ईरान संबंधों को लेकर चल रहे तनाव को देखते हुए इरान की सुरक्षा बल इराकी रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) को ‘अपमानित’ या ‘भेदभावपूर्ण’ टिप्पणी से बचना चाहिए।

संयुक्त राज्य ने पिछले दशकों में IRGC को आतंकवादी संगठनों की सूची में शामिल किया है, जिससे दोनों देशों के बीच कूटनीतिक संबंध पहले ही तनावपूर्ण हो चुके हैं। इस संदर्भ में ताज़ का बयान केवल खेल क्षेत्र तक सीमित नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय राजनीति की कठोर वास्तविकताओं को प्रतिबिंबित करता है। उन्होंने कहा, “खेल सच्ची मैत्री का मंच हो सकता है, परंतु यदि एक पक्ष द्वारा दूसरे की राष्ट्रीय सुरक्षा संस्थाओं को निंदात्मक रूप में पेश किया जाता है तो खेल ही नहीं, राष्ट्रीय गौरव भी धूमिल हो जाता है।”

अमेरिकी अधिकारियों ने अभी तक इस बयान पर कोई औपचारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है। हालांकि, संभावित प्रश्न उठता है कि क्या FIFA के संचालन प्रोटोकॉल में प्रतिभागी देशों की सेना या सुरक्षा बलों के बारे में टिप्पणी पर प्रतिबंध है, तथा यदि ऐसा कोई प्रतिबंध है तो इसका उल्लंघन होने पर क्या प्रभाव पड़ेगा।

इरानी सरकार इस मांग को घरेलू राजनीति में उपयोग कर रही है। hard‑line पक्ष इस अवसर को IRGC के समर्थन में जनता को एकजुट करने के लिए प्रयोग कर रहे हैं, जबकि विपक्षी वर्ग तर्क देता है कि खेल के मैदान को राजनीतिक शस्त्र में बदलना राष्ट्रीय खेल नीति की विफलता को उजागर करता है। कई विशेषज्ञ इस बात पर प्रकाश डालते हैं कि विश्व कप जैसा ग्लोबली बात करने वाला आयोजन ‘स्पोर्ट्स डिप्लोमेसी’ का अवसर प्रदान करता है, पर जब कूटनीतिक मुद्दे खेल के नियमों से बाहर आ जाएँ तो वह अवसर ही बिगड़ जाता है।

सार्वजनिक रूप से इस विषय को लेकर मिश्रित प्रतिक्रियाएँ देखी जा रही हैं। कुछ खेल प्रेमी इसे ‘सुलभ दांव’ मानते हैं, जबकि कई नागरिक इस बात को लेकर चिंतित हैं कि क्या खेल आयोजनों में विदेशी सरकारों के दबाव के कारण भारतीय या इरानी खिलाड़ियों के प्रदर्शन पर असर पड़ेगा। यह प्रश्न न केवल क्रीड़ा प्रशासन, बल्कि विदेश मंत्रालय की जवाबदेही को भी चुनौती देता है: क्या वे इस तरह के ‘राजनीतिक शर्तों’ को खेल आयोजनों के दायरे में लाने की अनुमति देंगे?

परिणामस्वरूप, यह मामला 2026 विश्व कप के पूर्वाभ्यास में एक नई परत जोड़ता है। यदि कोई भी पक्ष इस ‘सैन्य‑संबंधी’ अपमान को रोकने में विफल रहता है, तो खेल की पवित्रता पर धुंध लग सकती है, और यह समझ में आ जाता है कि “जब खेल के मैदान में भी टकराव हो, तो क्या सॉकर बॉल ही पुल्लिंग बन कर नहीं घट जाएगी?”

Published: May 6, 2026