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Category: राजनीति

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वोटर निराशा से SNP को बहुमत से वंचित कर सकता है, स्कॉटलैंड के चुनाव की अनिश्चितता

स्कॉटिश संसद के लिए जल्द ही होने वाले चुनाव को अब तक का सबसे अनिश्चित मतदान माना जा रहा है। राष्ट्रीय स्वायत्तता के प्रमुख दल, स्कॉटिश नेशनल पार्टी (SNP), को मुख्य सीट हैमिल्टन में अपनी जीत पर संदेह का सामना करना पड़ रहा है। पार्टी के नेता जॉन स्विननी को इस चुनाव में ‘विचारशील मतदाताओं’ को जीतने के लिए एक व्यवस्थित यात्रा करनी थी, परंतु वह स्वयं भी अपने ही समर्थकों की निराशा का शिकार बन गए।

हैमिल्टन में आयोजित सार्वजनिक सभा में स्विननी के सामने गुस्से में लाठ लादते वोटर खड़े हुए, जिनमें स्थानीय परिषद की विफलता से पीड़ित नागरिक भी शामिल थे। 35 वर्षीया नेताशा केली ने परेशानियों की झलक बयां की—उनके दो बच्चों (13 और 8 साल) को लगातार अस्थमा का रोग रहा, जिसका कारण उनका गिरते हुए नमी वाले काउंसिल फ्लैट था, जिसे परिषद ने न सुधारा। इस व्यक्तिगत कहानी ने किराया, स्वास्थ्य और स्थानीय प्रशासन के बीच तालमेलहीनता को उजागर किया, जो SNP के ‘समानता और प्रगति’ के दावों के विपरीत है।

इसी बीच, भौगोलिक रूप से केन्द्रित बहु-ध्रुवीय राजनीति का माहौल बदल रहा है। स्कॉटिश लेबर पार्टी ने दावा किया है कि वह ‘विचारहीन’ मतदाताओं को अपनी ओर आकर्षित कर रही है, विशेषकर उन वर्गों से जो स्वास्थ्य, आवास और सार्वजनिक सेवाओं में लगातार निराश हुए हैं। इस दावे के समर्थन में हालिया सर्वेक्षण दिखाते हैं कि कई मध्यम वर्गीय मतदाता अब SNP की ‘स्वतंत्रता’ के सपनों से अधिक स्थिर सामाजिक सुरक्षा की माँग करते दिख रहे हैं।

यदि वर्तमान प्रवृत्ति जारी रहती है, तो SNP के बहुमत के सपने पर प्रश्नचिह्न लग सकता है। संसद में अधिकांश सीटें अभी भी पार्टी के पक्ष में हैं, पर लक्ष्य सीटों पर ‘ड्रॉप-ऑफ’ वोटों की संभावना अब की तरह नहीं रह गई। यह न केवल सत्ता संतुलन को बदल सकता है, बल्कि स्कॉटिश सरकार के दायित्वों पर भी गहरी पड़ताल को जन्म देगा।

निवेशक, नागरिक संघ और नीति निर्माताओं को इस मोड़ पर दो प्रश्नों का सामना करना पड़ेगा: पहला, क्या SNP अपनी ‘नेशन-इम्पोर्टेड’ नीतियों को स्थानीय समस्याओं—जैसे खराब सार्वजनिक आवास और स्वास्थ्य जोखिम—के साथ मिलाकर जवाबदेह बना पाएगा? दूसरा, क्या विपक्षी दल अपनी आलोचना को ठोस नीति विकल्पों में बदल पाते हैं, ताकि मतदाताओं को केवल निराशा ही न करना पड़े?

जैसे भारत में भी चुनावी वादे अक्सर वास्तविक कार्यान्वयन से टकराते हैं, स्कॉटलैंड में यह टकराव अब भी साफ दिख रहा है। मतदाता अपने दायरे में देख रहे हैं कि क्या सरकार अपने वादों को ‘ऑफ़िस के दायरे में’ लाकर हर घर में साँस लेने योग्य हवा और सुरक्षित जीवन सुनिश्चित कर सकती है, या फिर ‘स्वतंत्रता’ के आदर्श को अभेद्य मानते हुए स्थानीय प्रशासन की विफलताओं को अनदेखा कर देती है। आगामी परिणाम इस बात का अहम इशारा देंगे कि समुदाय-स्तर की समस्याओं को राष्ट्रीय राजनीति के दावे से ऊपर रखा जा सकता है या नहीं।

Published: May 7, 2026