वेटिकन यात्रा से पूर्व, विदेश मंत्री ने ट्रम्प की पॉपे लियोन‑इरान टिप्पणी का बचाव
नई दिल्ली—वेटिकन में पॉपे लियो XIV के साथ आधिकारिक बैठक के एक दिन पूर्व, विदेश मंत्रालय के वरिष्ठ राजनेता ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की पॉपे के इरान‑संबंधी बयान को समर्थन देते हुए कहा कि इस पर कोई फॉर्मल विरोध नहीं होना चाहिए। इस कदम ने विपक्षी दलों और कई विदेश नीति विश्लेषकों को अचरज में डाल दिया, क्योंकि यह भारत की अपनी धार्मिक‑राजनीतिक संतुलन‑नीति के साथ स्पष्ट रूप से टकराता दिखा।
ट्रम्प ने पिछले हफ्ते पॉपे के ईरान के परमाणु वार्ता में मध्यस्थता की भूमिका को ‘साबित‑परिणाम‑हीन’ करार देते हुए आलोचना की थी। भारत के विदेश मंत्री ने आधिकारिक टिप्पणी में कहा, “अमेरिकी राष्ट्रपति का अधिकार है कि वह किसी भी अंतरराष्ट्रीय मुद्दे पर अपनी राय रखे। हमें उनकी राय को प्रतिबंधित नहीं करना चाहिए, विशेषकर जब वह वैश्विक सुरक्षा से जुड़ी हो।” इस बयान को कई अलग‑अलग सन्दर्भों में सज्जन‑समीक्षा का सामना करना पड़ा।
विपक्षी दलों ने त्वरित प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यह बयान ‘राजनीतिक मुनाफ़े की नीति’ को दर्शाता है, जहाँ भारत का आध्यात्मिक क्षत्र में स्वीकृति प्राप्त करने की कोशिश के साथ-साथ अमेरिकी‑आधारित राष्ट्रीय‑सुरक्षा रुख को भी सुदृढ़ किया जा रहा है। बहुपक्षीय मंचों पर भारत अक्सर शांति‑निर्माण के मध्यस्थ के रूप में देखा जाता है, परन्तु इस तरह की टिप्पणी से ऐसा प्रतीत होता है कि विश्वस्तर पर भारत का रुख ‘द्विध्रुवीय’ बन रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस वक्त, जब भारत 2029 के लोकसभा चुनावों की तैयारी कर रहा है, तब विदेश नीति के हर मोड़ पर राजनीतिक लाभ की तलाश बहु‑संकट को जन्म देती है। पॉपे के साथ बातचीत आध्यात्मिक जुड़ाव को मजबूती देने के लिये लाई गई थी, लेकिन उसी मंच पर अमेरिकी राष्ट्रपति की निंदात्मक टिप्पणी को बचाने से यह संदेश मिलता है कि भारत अभी भी प्रमुख अंतरराष्ट्रीय उपक्रमों में ‘स्वतंत्र राय’ देने से पीछे हट रहा है।
राष्ट्रपति कार्यालय ने इस मुद्दे पर अभी तक कोई औपचारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है, जबकि कई राज्य‑स्तर के कांग्रेस नेता और बहुपार्टी गठबंधन ने इस बयान को ‘राजनीतिक नीतियों में असंगतता’ कहा है। विपक्ष ने विदेश मंत्रालय को लिखित स्पष्टीकरण की मांग की और कहा कि यदि भारत को अंतरराष्ट्रीय मंच पर सम्मानित कूटनीति का स्थान चाहिए तो ऐसे बयानों को तत्काल रोकना होगा।
सारांश में, वेटिकन यात्रा के द्वार पर भारत का पारदर्शी, सम्मानित कूटनीतिक छवि बनाने का इरादा, विदेश मंत्री की ट्रम्प टिप्पणी के बचाव से टकरा गया है। यह घटना न केवल अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में भारत की विश्वसनीयता को चुनौती देती है, बल्कि आगामी चुनाव में सत्ता‑विपक्ष के झगड़े को भी नई दिशा देती है।
Published: May 6, 2026