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Category: राजनीति

लेबर सरकार की सरकारी जमीन को प्रकृति‑मित्र बनाने की योजना पर बढ़ता सवाल

पर्यावरण सचिव एमा रेनॉल्ड्स ने इस हफ़्ते चुनावी माहौल में कांग्रेस‑समान लेबर (ब्रिटेन) के चुनावी अभियान के बीच एक महत्वाकांक्षी घोषणा की: जेलों और सैन्य क्षेत्र में नर्सरी व दलदल बनाकर सरकारी भूमि को प्राकृतिक आवास में बदलने का लक्ष्य। इस योजना को उन्होंने ‘सरकारी जमीन की पुनरुज्जीवन’ का प्रतीक बताया, जबकि हरित (ग्रीन्स) दल की आक्रमणिल आलोचना सामने है।

लेबर के पास अब चुनाव के नजदीकी दावों में पर्यावरणीय जिम्मेदारी को प्रमुख बिंदु बनाकर वोटर के भरोसे को वापस जीतने का लक्ष्य है। परंतु इस योजना की वास्तविकता कई सवाल खड़े करती है। प्रथम, जेलों में नर्सरी स्थापित करने की लॉजिस्टिक जटिलताएँ – सुरक्षा, बुनियादी ढांचा, फंडिंग एवं कर्मचारियों की पुनःप्रशिक्षण – को सतही आश्वासनों से नहीं सुलझाया जा सकता। द्वितीय, सैन्य रेंज को हीदलैंड या दलदल में बदलने हेतु विस्तृत भूमि‑उपयोग पुनर्मूल्यांकन एवं रक्षा विभाग की स्वीकृति आवश्यक होगी, जिसे राष्ट्रीय सुरक्षा के ढांचे में पुनः देखना पड़ेगा।

इसी बीच ग्रीन पार्टी ने इस योजना को ‘राजनीतिक दर्शावनी’ करार दिया। ग्रीन के सांसद सारा क्लार्क ने कहा, “लेबर की यह योजना पर्यावरणीय संकट के सामने बुखार की तरह ठंडी है। असली कार्य‑योजना में भारी निधि, स्थानीय समुदाय की भागीदारी और दीर्घकालिक प्रभाव‑मापन नहीं है।” ग्रीन का दावा है कि वे सरकार को प्रकृति‑मित्रता के शब्दों के पीछे वास्तविक वित्तीय जवाबदेही लाने के लिए कांग्रेस‑सदृश पूछताछ का प्रावधान चाहते हैं।

विपक्षी पौधों के पक्ष में कर रहे हैं कि इस तरह के बड़े‑पैमाने पर प्रोजेक्ट को जनता के बिना सलाह के लागू किया जाना लोकतांत्रिक सिद्धांतों के विरुद्ध है। पार्लमेंट में कई विपक्षी सांसदों ने मौजूदा सरकारी बजट में इस नई योजना के लिये उचित आवंटन की स्पष्टता नहीं मिलने को ‘नीतिगत भ्रम’ कहा। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि इस योजना का फोकस केवल दृश्यात्मक स्थायी रंग लेकर नहीं, बल्कि जलवायु परिवर्तन के गंभीर मापदंडों को कम करने के ठोस आँकड़े होना चाहिए।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि लेबर के लिए यह कदम दोहरी जाल में फँस सकता है। एक ओर चुनावी गैलरी में यह “हरित वादे” के रूप में मुकम्मल हो सकता है, दूसरी ओर यदि योजना ठोस परिणाम नहीं दिखाती तो यह वादे‑भ्रष्टता के रूप में उभरकर लेबर की विश्वसनीयता को क्षति पहुँचा सकता है। इसके अलावा, नागरिक समाज के पर्यावरण समूहों ने कहा कि सरकारी जमीन की पुनर्स्थापना के लिए पहले से मौजूद ग्रामीण समुदायों और स्वदेशी अधिकारों को नजरअंदाज़ नहीं किया जाना चाहिए।

सारांश में यह कहा जा सकता है कि लेबर की प्रकृति‑मित्र भूमि योजना एक नयी आकांक्षा है, परन्तु इसका वास्तविक प्रभाव, फंडिंग की पारदर्शिता और प्रशासनिक जवाबदेही अभी तक स्पष्ट नहीं हुई। चुनावी तनाव, ग्रीन पार्टी की तीखी आलोचना और विपक्षी संसद की जाँच‑परख इस प्रस्ताव को तथाकथित “हवा में कलंकित” से “कार्यान्वयन योग्य नीति” तक ले जाने की परीक्षा में खड़ी कर रही है।

Published: May 4, 2026