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Category: राजनीति

लेबनान के अस्पतालों पर इज़राइली हमलों का बोझ: भारत की विदेशनीति में उठते सवाल

इज़राइल-लेबनान सीमा पर तेज़ी से बढ़ते संघर्ष के बाद, लेबनान के कई शहरी और ग्रामीण अस्पतालों में घायल नागरिकों की संख्या अभूतपूर्व रूप से बढ़ गई है। स्थानीय स्वास्थ्य अधिकारियों ने बताया कि आपातकालीन कक्षों में कब्ज़ा इतना अधिक है कि बुनियादी इलाज‑सुविधाएँ भी बाधित हो रही हैं। इस स्थिति को भारत के विदेश मंत्रालय ने "मानवतावादी आपदा" कहा, परन्तु इसके साथ ही भारत‑इज़राइल रणनीतिक साझेदारी को उजागर करने वाले बयान भी सामने आए हैं।

भारत‑इज़राइल संबंधों को मजबूत करने वाले वर्तमान केंद्र सरकार के साथ, राष्ट्रीय कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों ने सवाल उठाया है कि इस रणनीतिक गठबंधन के चलते भारत की मानवीय मूल्यों में कोई समझौता तो नहीं हो रहा। विपक्षियों ने विदेश मंत्रालय के बुनियादी मानवीय आह्वान को "राजनीतिक वाणिज्यिक अनुक्रम" कहा, और इज़राइल के प्रति कूटनीतिक रुख में वैकल्पिक दृष्टिकोण अपनाने की मांग की।

इन बहसों का पृष्ठभूमि 2024 के सामान्य चुनावों में प्रमुख मुद्दा बन चुका है, जहाँ सुरक्षा‑कूटनीति, मानवीय सहायता और विदेश नीति की पारदर्शिता पर तीव्र चर्चा चल रही है। सरकार ने कहा कि इज़राइल के साथ रक्षा‑तकनीकी सहयोग राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए आवश्यक है, परन्तु वही सहयोग मानवीय संकट के सामने आज़ीवन समर्थन का दायित्व नहीं बनता। विपक्ष ने इस तर्क को "बिल्ली‑चूहा खेल" कहा, जहाँ कई बार मानव अधिकार को विदेशी रणनीति के बाद में रख दिया जाता है।

वास्तविकता यह है कि लेबनान की स्वास्थ्य प्रणाली पहले से ही आर्थिक प्रतिबंधों, बिजली कटौती और आयात‑नियंत्रण के कारण कमजोर थी। अब इज़राइल की हवाई हमलों से उत्पन्न घायल लोगों की भरमार ने इस प्रणाली को अत्यधिक दबाव में डाल दिया है। कई अस्पतालों ने अंतरराष्ट्रीय रेड क्रॉस और संयुक्त राष्ट्र की मानवीय सहायता मांग की है, जबकि भारत ने अभी तक कोई ठोस सहायता पैकेज नहीं प्रस्तुत किया है। यह अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत की मानवतावादी भूमिका को प्रश्नवाचक बना रहा है।

नीति‑प्रभाव के लिहाज़ से, यदि भारत अपनी रणनीतिक साझेदारी को लगातार प्राथमिकता देता रहता है, तो भविष्य में मध्य‑पूर्वी संघर्षों में मानवीय प्रतिघात के समय उसे अंतरराष्ट्रीय आलोचना का सामना करना पड़ सकता है। विपक्षी दलों का मानना है कि यह असंतुलन भारत के लोकतांत्रिक मूल्यों और विदेशी नीति की विश्वसनीयता को कमजोर कर सकता है। सरकार को अब दोनों पक्षों के बीच संतुलन स्थापित करते हुए, शीघ्रता से मानवीय सहायता का रूप‑रेखा तैयार करनी होगी, नहीं तो लेबनान में स्वास्थ्य‑संकट भारत की विदेश नीति की वैधता पर घाव खाएगा।

Published: May 3, 2026