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Category: राजनीति

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लंदन में ग्रिन पार्टी का उभार, लेबर के सुरक्षित किले पर धधकता खतरा

केन्द्र सरकार के प्रधान मंत्री के अपने निर्वाचन क्षेत्र, कैम्ब्रिज में भी अब वही पुरानी धड़कन नहीं सुनी जा रही जो कई दशकों से लेबर की गूँज थी। ग्रिन पार्टी ने इस बार सिर्फ मतगिनती में नहीं बल्कि स्थानीय निकाय के स्तर पर भी अपना दांव लगाते हुए, लंदन के प्रमुख बरो में चुनावी तालमेल को अस्थिर कर दिया है।

हाइ‑कटफ़ी ने कहा – "मैं हमेशा लेबर को वोट कर रही हूँ, मेरा पूरा परिवार भी करता आया है, पर अब बदलाव का समय है" – यह शब्द केवल व्यक्तिगत निराशा नहीं, बल्कि एक बड़े सामाजिक प्रवाह को दर्शाते हैं। हाल ही में कैम्ब्रिज काउंसिल की बैठक में लोरना जेन रसेल, जो अब तक ग्रिन पार्टी की एकमात्र काउंसिल सदस्य थीं, ने अपनी विजय की आशा जताई। 7 मई को होने वाले स्थानीय चुनाव में उनका दल ज़ैक पोलांस्की की ग्रिन पार्टी से जुड़े बड़े समूह के साथ वापसी कर सकता है, जिससे उनका प्रभाव मात्र एक काउंसिल सदस्य से बढ़कर पूरी बरो के राजनीतिक समीकरण को बदलने की संभावना बन जाती है।

हैकनी में इस प्रवाह का सबसे स्पष्ट प्रतिबिंब दिख रहा है। सर्वेक्षणों के अनुसार, ग्रिन पार्टी के पास बोरोज के महापौर पद पर कब्ज़ा करने की भी सम्भावना है, जो अगर साकार हो जाए तो संसद में लेबर की शक्ति को प्रत्यक्ष चुनौती मिल जाएगी। इस बीच लैम्बथ और लेविशैम जैसे बरो, जहाँ लेबर ने दशकों से ऐतिहासिक आधार बनाया था, भी अब विरोधी मतों के सागर में डूबते दिख रहे हैं।

लेबर के राष्ट्रीय नेतृत्व, प्रमुखतः केयर स्टारमर, ने इन घटनाओं को "विकल्पों की क्षणिक लहर" कह कर खारिज करने की कोशिश की है, परन्तु उनका यह बयान सार्वजनिक मतभेदों को शांत नहीं कर पा रहा है। विपक्षी कांग्रेस पार्टी ने इस अवसर का फायदा उठाते हुए, लेबर की नीतियों में जहाँ तक पहुंच न हुई, जलवायु परिवर्तन, सस्ते किराये और सामाजिक न्याय की गति को थकी हुई बताकर, ग्रिन की बढ़ती लोकप्रियता को अपने लिए एक चेतावनी बनाकर पेश किया है।

सिर्फ चुनावी रणनीति ही नहीं, बल्कि नीति‑परिचालन की कमी भी इस बदलाव के पीछे मुख्य कारक बन रही है। कई लंदनियों ने कहा है कि अभावग्रस्त आवास, बढ़ते किराए और सार्वजनिक परिवहन की अनदेखी ने उन्हें ग्रिन के वादे – स्वच्छ ऊर्जा, किफायती आवास और सामुदायिक विकास – की ओर आकर्षित किया है। ऐसे में यदि ग्रिन पार्टी को स्थानीय स्तर पर बल मिला तो यह राष्ट्रीय स्तर पर भी लेबर की अबाधित छवि को चुनौती देगा, और सरकार को न केवल बहु‑पक्षीय गठजोड़ की, बल्कि नीतियों में मौलिक पुनरावलोकन की आवश्यकता होगी।

Published: May 6, 2026