रोलँड-गारोस पुरस्कार राशि पर टेनिस सितारों की आलोचना, भारत की खेल नीति को उजागर करती जांच
जैकीन सिनर, आर्यना सबलेन्स्का और कोको गॉफ़ ने फ्रांस के प्रमुख ग्रैंड स्लैम – रोलँड-गारोस – की पुरस्कार रक़म को ‘असंतोषजनक’ कहकर तीखा शब्दों में उजागर किया। यह मांग केवल टेनिस की सीमित दुनिया तक सीमित नहीं है, बल्कि भारत में खेल‑संबंधी सरकारी नीति, सार्वजनिक धन के वितरण और चुनावी वादों की सच्चाई को भी परखती है।
इसी साल के शुरुआती महीनों में, अटल कांग्रेस और भाजपा दोनों ने चुनाव‑समय पर खेल को राष्ट्रीय गर्व का स्रोत बनाकर, लाखों रुपए की फंडिंग का वादा किया था। बावजूद इसके, भारतीय अंतरराष्ट्रीय टेनिस खिलाड़ियों की यात्रा, बुनियादी सुविधाओं की कमी और दिये जाने वाले ट्रैवल ग्रांट में भारी अंतर बना हुआ है। विदेशों में खिलाड़ियों को मिलने वाली कवरेज की तुलना में, भारत में एकमात्र राष्ट्रीय खेलकूद प्रायोजन योजना ‘राष्ट्रीय खेल विकास निधि’ का बजट 2025‑26 में सिर्फ 3,800 करोड़ रुपए रहा, जो आयरन मेंटेनेंस, कोचिंग और प्रयोगशाला सुविधाओं में भारी गुंजाइश नहीं छोड़ता।
सिनर, सबलेन्स्का और गॉफ़ ने फ्रेंच टेनिस फेडरेशन (FFT) को ‘वैश्विक स्तर पर असमानता को कायम रखने’ का आरोप लगाया। उसी समय, भारत की खेल मंत्रालय ने मात्र एक बयान जारी कर कहा कि ‘हम सभी अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारतीय खिलाड़ियों के हितों का दृढ़ता से समर्थन करेंगे’। यह बयान, चाहे कितनी भी बुनियादी हो, तब तक मायने नहीं रखता जब तक खेल‑विकास के लिए आवश्यक बजट आवंटन, संरचनात्मक सुधार और पारदर्शी चयन प्रक्रिया नहीं बनती।
विश्लेषकों का मानना है कि इस मुद्दे को टेनिस सितारों की आवाज़ को केवल ‘खेल के लिए स्तुति' नहीं समझना चाहिए। यह एक संकेत है कि ‘राजनीतिक वादे और वास्तविक कार्य’ के बीच अंतर स्पष्ट हो रहा है। विशेषकर, आगामी 2027 राज्य चुनावों में कई राज्यों ने खेल‑सुविधाओं को ‘विकास के प्रमुख स्तम्भ’ के रूप में उपस्थित किया है, परंतु केंद्र सरकार के ‘खेल‑दिवस’ के तहत जारी किए गए निधियों की समयबद्धता और मॉनिटरिंग की कमी स्पष्ट है।
सार्वजनिक हित की दृष्टि से, यह प्रश्न उठता है: जब अलीकड़े में सरकार ने 1,500 करोड़ रुपए की योजना ‘खेल‑इन्फ्रास्ट्रक्चर में वृद्धि’ के लिए पेश की, तो क्यों कई बड़े शहरों में अभी भी ओवरड्रेनजेड कोर्ट, सॉफ़्टबॉल ग्राउंड या लिंगभेदित टेनिस अकादमी की कमी है? विरोधी दल इस प्रविष्टि को ‘डिज़ाइनर परेड’ कह कर आलोचना कर रहे हैं, जबकि सरकार कह रही है कि ‘पैसे निकास नहीं हो पाएँगे, इसलिए कुशलता से खर्च किया जा रहा है।’
टेनिस सितारों की इस शिकायत ने निश्चित ही भारत में खेल‑नीति पर व्यापक चर्चा को जन्म दिया है। सवाल अब यह है कि क्या यह अंतरराष्ट्रीय दबाव राष्ट्रीय स्तर पर ‘खेल‑नीति सुधार’ को गति देगा, या यह फिर भी ‘वादा‑और‑निष्पादन’ के बीच की खाई को ही बना रहेगा।
Published: May 4, 2026