रिफॉर्म यूके की कड़ी इमीग्रेशन नीति स्कॉटिश चुनावों को कैसे बदल सकती है?
7 मई को तय होने वाले स्कॉटिश पार्लियामेंट के चुनाव में इमीग्रेशन अब पहले से कई गुना प्रमुख मुद्दा बन चुका है। रिफॉर्म यूके, जिसका मुख्य चुनावी वचन ‘बोट्स को रोकें, सीमा सुरक्षित करें, अवैध प्रवासियों को डिपोर्ट करें’ है, हालिया सर्वे में राष्ट्रीय राष्ट्रीय पार्टी (एसएनपी) के बाद दूसरे स्थान पर दिख रहा है। यह स्थिति एक असामान्य विरोधाभास को उजागर करती है: इमीग्रेशन कार्यभार Westminster को सौंपा गया है, परंतु स्कॉटलैंड की राजनीति इस पर नज़र नहीं हटा रही।
रिफॉर्म की उभरी लोकप्रियता का एक कारण स्पष्ट है – एक कठोर, अक्सर अतिरंजित, जनसंवाद जो भावनात्मक डर को राजनीतिक ध्रुवीकरण के साथ जोड़ता है। इस कथा को रोकने के बजाय, लेबर सरकार ने स्वयं को इस दिशा में मोड़ लिया है, जिससे उनके अपने ‘सख्त इमीग्रेशन’ के एजेंडा को वैधता मिल रही है। इस क्रम में, यदि होलीरूड इस प्रवाह को अपनाता है, तो स्कॉटलैंड के मौजूदा सामाजिक‑सांस्कृतिक संतुलन पर गंभीर असर पड़ सकता है।
स्कॉटिश नेशनल पार्टी (एसएनपी) ने हमेशा से ‘खुले दरवाज़े’ की नीति को अपनाते हुए, स्वयं को शरणार्थियों और आर्थिक प्रवासियों के स्वागतकर्ता के रूप में प्रस्तुत किया है। परन्तु, रिफॉर्म की तेज़ी से बढ़ती समर्थन संख्या दिखाती है कि कई मतदाता अब इस बरकरार रखी गई सहिष्णुता से निराश हैं। यह निराशा किन-किन कारणों से उत्पन्न हो रही है? मुख्यतः, विंडसर द्वारा अंतिम समय में घोषित ‘आवासीय उदारीकरण’ नीतियों में देरी, बेरोज़गारी के बढ़ते आंकड़े और सार्वजनिक सेवाओं की लगातार घटती गुणवत्ता। इन समस्याओं को इमीग्रेशन से जोड़कर, रिफॉर्म ने एक सरल लेकिन खतरनाक कारण‑परिणाम का ढांचा तैयार कर दिया है।
विपक्षी पक्षों की प्रतिक्रिया भी दोधारी तलवार बनकर सामने आई है। एसएनपी ने रिफॉर्म को ‘विदेशी‑संबंधी वैमनस्य’ का आरोप लगाते हुए कहा है कि उनका एजेंडा ‘ड्राइंग बोर्ड पर नहीं, बल्कि वास्तविक जीवन में लोगों की सुरक्षा और संपन्नता के लिए है’। दूसरी ओर, स्कॉटिश ग्रीन पार्टी ने इस विमर्श को ‘पर्यावरणीय अस्थिरता’ के रूप में वर्णित किया, यह तर्क देते हुए कि इमीग्रेशन को ‘सुरक्षा‑केन्द्रित’ बनाकर सामाजिक एकता को खतम किया जा रहा है। दोनों ही पक्षों ने रिफॉर्म के संभावित नीति‑स्थलीय प्रभावों को लेकर चेतावनी जारी की, परंतु अपनी स्वयं की रणनीति में इमीग्रेशन को टेबल पर रखे बिना उनका विरोध असहज होता दिख रहा है।
यदि रिफॉर्म यूके को स्कॉटिश संसद में पर्याप्त सीटें मिलती हैं, तो सबसे बड़ा प्रश्न यह रहेगा कि वे Westminster के साथ ‘संरक्षित अधिकारों’ के कसौटे पर कैसे दबाव डालेंगे। वर्तमान में, इमीग्रेशन पर निरंकुश सख़्त रुख Westminster की नीति‑निर्धारण प्रक्रिया में सम्मिलित हो सकता है, जिससे स्कॉटलैंड की ‘खुलापन’ की छवि को धूमिल करने की संभावना है। यह न केवल सामाजिक बहुलता के सिद्धांत को हिला देगा, बल्कि सार्वजनिक सेवाओं की पहले से ही तनावपूर्ण स्थिति को और बिगाड़ सकता है।
सार्वजनिक हित की बात करें तो, यह स्पष्ट है कि मतदाता केवल ‘बोर्डर‑सेक्योरिटी’ वादे से नहीं, बल्कि आर्थिक स्थिरता, स्वास्थ्य‑सेवा और शिक्षा में सुधार से प्रभावित होते हैं। रिफॉर्म का केवल इमीग्रेशन‑केंद्रित प्रतिमान इस बात को नज़रअंदाज़ करता है कि स्कॉटिश नागरिकों की रोज़मर्रा की समस्याएँ किस हद तक अनदेखी रह गई हैं। इस प्रकार, यह चुनाव न केवल एक ‘इमीग्रेशन‑बेट’ का मंच नहीं, बल्कि सरकार की जवाबदेहिता और नीतिगत विफलताओं का भी परीक्षण बनेगा।
अंत में, यह देखा जाएगा कि स्कॉटलैंड की राजनीति इस ‘टॉक्सिक सोच’ को कितनी हद तक समेट पाती है। यदि रिफॉर्म को संसद में जगह मिलती है, तो होलीरूड को न केवल वैधता के प्रश्न का सामना करना पड़ेगा, बल्कि वह यह भी सिद्ध करना होगा कि वह सीमा‑सुरक्षा के नाम पर अपने मूलभूत, प्रगतिशील मूल्यों को नहीं खो रहा। नहीं तो, इस चुनाव के बाद स्कॉटलैंड को ‘सुरक्षा‑का‑पुराना गीत’ ही नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक प्रतिबद्धताओं की ध्वनि भी कहीं खो सकती है।
Published: May 4, 2026