जो होना ही था, उसे दर्ज करता, देखता और सवाल करता समाचार मंच

Category: राजनीति

विज्ञापन

पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय, चंडीगढ़ में वकील की आवश्यकता है?

आपराधिक मुकदमों, जमानत, गिरफ्तारी, एफआईआर, जांच और उच्च न्यायालयी कार्यवाही से जुड़े कानूनी मार्गदर्शन के लिए यहां क्लिक करें

प्रधानमंत्री के चीफ़‑ऑफ‑स्टाफ का चोरी हुआ फोन बेचने वाले को गिरफ्तार किया

लंदन में अक्टूबर 2025 में प्रधानमंत्री के चीफ़‑ऑफ‑स्टाफ मॉर्गन मैकस्विनी का सरकारी मोबाइल फोन चोरी होने के बाद, वही फोन दो महीने बाद एक अनजान व्यक्ति को बेचते हुए पकड़ा गया। भारत की पुलिस ने इस व्यक्ति को गुरुवार, 7 मई को गिरफ्तार कर लिया, जिससे विदेश में उच्चस्तरीय सरकारी सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठे हैं।

मैकस्विनी, जो अक्टूबर 2025 से प्रधानमंत्री के प्रमुख सहयोगी के रूप में कार्यरत थे, उनके कार्यकाल में कई संवेदनशील प्रतिबद्धताओं और रणनीतिक दस्तावेजों का संचार उसी फोन के माध्यम से किया जाता था। चोरी के समय लंदन पुलिस ने कहा था कि फोन में एन्क्रिप्टेड डेटा था, परंतु इसका कोई आधिकारिक जांच रिपोर्ट अभी तक सार्वजनिक नहीं हुई।

अब तक पुलिस ने बताया कि चोरी हुए फोन को एक स्थानीय थ्रिफ्ट मार्केट में बेचने की कोशिश कर रहा था एक 34‑वर्षीय पुरुष, जिसे लंदन की विस्तारित सिविल पुलिस ने गिरफ्तार किया। इस व्यक्ति ने फोन को 2,500 पाउंड में बेचने की कोशिश की, जबकि वास्तविक बाजार मूल्य उससे कहीं अधिक था।

इस घटना ने नई दिल्ली में सरकार की विदेश में सुरक्षा प्रोटोकॉल की व्यापक जांच को प्रेरित किया। विदेश में भारतीय वैमानिक और राजनयिक प्रतिनिधियों की सुरक्षा का प्राथमिक जिम्मा विदेश मंत्रालय और विदेश मामलों के उपराज्य सचिव के पास है, परंतु इस मामले में यह स्पष्ट नहीं है कि किसे सूचना दी गई और किस स्तर पर रोकात्मक कदम उठाए गए।

विरोधी दलों ने इस घटना को प्रधानमंत्री की प्रशासनिक लापरवाही का एक स्पष्ट उदाहरण कहा। राष्ट्रीय कांग्रेस के प्रमुख नेता राजन सिंह ने कहा, “जब प्रधानमंत्री के प्रमुख स्टाफ का फोन लंदन में चोरी हो जाता है और फिर भी उसका पता नहीं चल पाता, तो यह सरकार की सुरक्षा नीति का पूर्ण विफलता है। हमें ऐसी ही लापरवाहियाँ लोकतांत्रिक जिम्मेदारी के विरुद्ध हैं।”

दूसरी ओर, सरकार ने इस मुद्दे को “एक व्यक्तिगत अपराध” कहा और कहा कि “किसी भी सरकारी अधिकारी की निजी सुरक्षा के लिए आवश्यक प्रोटोकॉल मौजूद हैं, और हम इस मामले की पूरी जांच करेंगे।” न्यायालय की प्रक्रिया के शुरू होने से पहले, प्रधानमंत्री के आधिकारिक प्रवक्ता ने कहा कि इस घटना का चुनावी मौसम से कोई सीधा संबंध नहीं है, फिर भी “सुरक्षा व्यवस्था को मज़बूत बनाना जारी रहेगा”।

सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के मामलों में मुख्य समस्या केवल एक लापरवाह व्यक्ति नहीं, बल्कि समग्र जोखिम मूल्यांकन की कमी है। वे सुझाव देते हैं कि विदेशी विभाग को “उच्चस्तरीय डिजिटल डिवाइस ट्रैकिंग, एन्क्रिप्शन प्रमाणन और तत्काल वैरिफिकेशन प्रोटोकॉल” अपनाना चाहिए, जिसे अब तक “कागज़ी कार्यवाही में फँसा” माना जाता रहा है।

सार्वजनिक हित के दृष्टिकोण से, इस घटना ने यह सवाल उठाया है कि सरकारी मोबाइल में निहित संवेदनशील डेटा की सुरक्षा के लिए कितनी प्रतिबद्धता है, जब एक विदेशी बाजार में उसे बेचा जा सकता है। यदि भविष्य में ऐसी ही लापरवाहियाँ दोहराती रही, तो भारत की कूटनीतिक प्रभावशीलता और राष्ट्रीय सुरक्षा दोनों ही खतरे में पड़ सकते हैं।

Published: May 7, 2026