नेपाल ने भारत‑चीनी तीर्थयात्रा समझौते को लेकर सीमा विवाद में औपचारिक विरोध जताया
काठमांडू ने सोमवार को भारत के साथ दीर्घकालिक सीमा विवाद को लेकर एक कड़ी प्रोटेस्ट नोटिस दर्ज किया, जब भारत और चीन ने एक धार्मिक तीर्थयात्रा को पुनर्स्थापित करने पर समझौता किया। यह यात्रा एक लक्ष्यहीन हिमालयी पास — जिसे नेपाल, भारत और चीन तीनों ही सीमा के रूप में दावा करते हैं — के माध्यम से आयोजित होगी।
नेपाल सरकार का कहना है कि इस पास को लेकर उनके साथ निष्पक्ष वार्तालाप नहीं हुआ, जबकि भारत और चीन ने बिना उचित परामर्श के ही यात्रियों को मार्ग खोल दिया। कूटनीति के परिप्रेक्ष्य में इस कदम को नेपाल की संप्रभुता के उल्लंघन के रूप में चित्रित किया गया है, जिससे दोपहर के बाद कूटनीति स्तर पर तनी हुई फूट पैदा हुई।
वर्तमान में भारत सरकार ने इस निर्णय को धार्मिक सहिष्णुता और लोगों के पारस्परिक संबंधों को मजबूत करने के प्रयास के रूप में प्रस्तुत किया है। वहीं, चीन ने इसे “क्षेत्रीय सहयोग” कहा है, जो भारत के साथ सामुद्रिक-भू-राजनीतिक साझेदारी को प्रतिबिंबित करता है। दोनों देशों के इस संयुक्त बयान के सामने नेपाल के प्रतिनिधिमंडल ने स्पष्ट किया कि वह अपने राष्ट्रीय हित के बिना कोई भी समझौता नहीं स्वीकार करेगा।
नेपाली विपक्षी दलों ने भी इस मुद्दे को लेकर कड़ी आलोचना की। उन्होंने सरकार पर ‘संदेहास्पद कूटनीति’ करने और भारत के साथ असमान शक्ति संतुलन में फँसने का आरोप लगाया। उन्होंने यह भी जोड़ा कि ऐसी भूमिगत समझौते से देश के सर्वांगीण विकास में बाधा उत्पन्न हो सकती है, क्योंकि सीमा विवाद के समाधान के बिना पर्यटन या धार्मिक यात्राएँ बुनियादी सुरक्षा जोखिम पैदा करती हैं।
भौगोलिक रूप से, इस पास को लेकर दीर्घकालिक विवाद 1962 के चीन‑भारत युद्ध के बाद से ही बना हुआ है, जबकि नेपाल ने 1950 के बाद कई बार इस क्षेत्र को पुनर्विचारित करने की कोशिश की है। यह विवाद न केवल सीमा सुरक्षा को प्रभावित करता है, बल्कि जल संसाधन, व्यापार मार्ग और रणनीतिक पहलों के संदर्भ में भी महत्वपूर्ण है।
सरकारी उत्तर में विदेश मंत्रालय ने कहा कि भारत-नेपाल सीमा के मामलों में हमेशा संवाद को प्राथमिकता देता है, लेकिन “सभी संबंधित पक्षों की सहजता से सहमति बनाना” आवश्यक है। इस बात के बावजूद, भारत अभी तक नेपाल को आधिकारिक तौर पर कोई सूचना नहीं दे पाया है कि वह इस तीर्थयात्रा को लेकर वार्ता में सम्मिलित है या नहीं।
इस प्रोटेस्ट नोटिस के बाद अगले कुछ हफ्तों में कूटनीतिक स्तर पर वार्ता की संभावना बनी हुई है। यदि समाधान नहीं मिलता, तो यह सीमा विवाद को फिर से अंतरराष्ट्रीय मंच पर लाने का जोखिम उठाएगा, जिससे भारत-नेपाल संबंधों में नई चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है।
Published: May 4, 2026