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Category: राजनीति

ड्रोन-फ्री ज़ोन प्रस्ताव पर केंद्र की नई नीति के राजनैतिक उलटफेर

नई दिल्ली – सिविल एवियोशंस अथॉरिटी (CAA) ने आज एक मसौदा नियम पेश किया, जिसके तहत देश के प्रमुख ऊर्जा, जल, संचार और सुरक्षा संबंधी बुनियादी ढाँचे को ‘ड्रोन-फ्री ज़ोन’ घोषित करने की संभावना बनी है। प्रस्ताव में बताया गया है कि इन क्षेत्रों में अनमैन्ड एरियल व्हीकल (UAV) की उड़ान प्रतिबंधित होगी, जब तक कि विशेष अनुमति न मिल सके।

सरकार इस कदम को राष्ट्रीय सुरक्षा, जनसुरक्षा और आर्थिक स्थिरता के संरक्षण के रूप में पेश कर रही है। विशेष रूप से न्यूक्लियर प्लांट, अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे, जल शुद्धिकरण केन्द्र और महत्त्वपूर्ण रेल हब को प्राथमिकता दी जाएगी। आशा की जा रही है कि यह नियामक ढांचा संभावित दुर्भावनापूर्ण उड़ानों को रोकते हुए अवसंरचना के लिए एक अतिरिक्त सुरक्षा परत जोड़ देगा।

हालांकि, इस घोषणा पर विपक्षी दलों ने तुरंत सवाल उठाए। बहु-पार्टी गठबंधन ने इसे ‘उद्यमी माहौल पर धक्का’ तथा ‘डिजिटल इंडिया’ के अन्तर्गत शुरू की गई ड्रोन‑आधारित नवाचार को बाधित करने वाला कदम कहा। वे तर्क देते हैं कि बिना पर्याप्त परामर्श के जारी किया गया यह नियमन निजी सेक्टर और स्टार्ट‑अप इकाइयों के लिए ‘पर्याप्त अनुमति प्रक्रिया’ को जटिल बना सकता है, जिससे भारत के ड्रोन‑इकोसिस्टम की विकास गति धीमी पड़ेगी।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह प्रस्ताव आगामी लोकसभा चुनाव की पृष्ठभूमि में आया है, जहाँ अधिकांश विपक्षी पार्टियां सरकार को ‘तकनीकी हस्तक्षेप के माध्यम से विकास को रोकना’ का आरोप लगा रही हैं। चुनावी क्षेत्र में कई राज्य सरकारें इस मुद्दे को उठाकर स्थानीय निर्माताओं और किसान‑उद्यमियों का समर्थन जीतने की कोशिश कर रही हैं, जो ड्रोन‑आधारित निगरानी और फसल बीमा सेवाओं से काफी लाभान्वित होते हैं।

साथ ही, नागरिक समाज के प्रतिनिधियों ने नियमन के प्रभाव को लेकर चिंता जताई। भारत में ड्रोन का प्रयोग अब सिर्फ शहरी एरेटिक स्वच्छता या फिल्म‑निर्माण तक सीमित नहीं रहा; ग्रामीण क्षेत्रों में सर्वेक्षण, आपदा प्रबंधन, जंगलों की निगरानी आदि में भी इसका प्रयोग बढ़ रहा है। इन क्षेत्रों में ‘ड्रोन‑फ्री ज़ोन’ की घोषणा से कार्यकर्ता असहज हो सकते हैं, विशेषकर यदि स्पष्ट मानक या छूट नहीं दी जाती।

अंत में, इस नियामक पहल की कार्यान्वयन प्रक्रिया पर भी सवाल उठ रहे हैं। यदि अनुमोदन प्रक्रिया में कई कड़े ‘परमिट‑ऑफ़‑फॉर्म’ और लंबी समयसीमा जुड़ी हुई है, तो यह मौजूदा अवसंरचना सुरक्षा बिंदुओं की ही नहीं, बल्कि नई तकनीकी पहलों की भी बाधा बन सकती है। इस संदर्भ में, विशेषज्ञों ने सीएए को ‘सुरक्षा और नवाचार के बीच संतुलित समीकरण’ बनाने की अपील की है, ताकि भारत में ‘सुरक्षित ड्रोन’ की अवधारणा केवल कागज़ी नीति तक सीमित न रहे।

Published: May 6, 2026