ट्रम्प सरकार ने मोंटाना में बाइसन को निकालने का आदेश: कृषकों के पक्ष में, पर्यावरण और जनजातियों की आवाज़ दब गई
अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प की प्रशासन ने इस हफ़्ते मोंटाना के कई संघीय घास‑भूमियों से बाइसन समूहों को हटाने का निर्देश जारी किया। यह कदम रैंचर‑समर्थक कांग्रेस के वरिष्ठ रिपब्लिकन नेताओं के दबाव को मानते हुए लिया गया, जबकि पर्यावरणीय संगठनों और स्थानीय नेटिव अमेरिकन जनजातियों ने इसे जीव‑विविधता और पारिस्थितिक संतुलन के विरुद्ध एक अनुचित कार्रवाई कहा।
पृष्ठभूमि में, बाइसन को 19वीं सदी के अंत में लगभग विलुप्त माना जाता था, परन्तु संरक्षण प्रयासों से आज लगभग 500,000 तक बढ़ा है, जिनमें से कई फेडरल लैंड में विरासत के रूप में रहने लगे थे। ट्रम्प प्रशासन ने इन पशु समूहों को "फसल‑निगरानी" और "कृषि‑उपज में बाधा" के रूप में पहचाना, और रैंचरियों को बीजी टैक्स में राहत व जमीन के प्रयोग के अधिकार प्रदान करने का वादा किया।
रैंचरियों के प्रतिनिधियों ने यह तर्क दिया कि बाइसन के बड़े झुंड स्थानीय चराई क्षेत्रों में अपार नुकसान पहुंचाते हैं, जिससे मवेशी की उपज घटती है और आर्थिक दबाव बढ़ता है। इस कारण से उन्होंने संघीय सरकार से बाइसन को हटाने की मांग को सशक्त किया, और कांग्रेस में कई सदस्य उसी दिशा में समर्थन व्यक्त कर रहे हैं।
वहीं, नेशनल पार्क सर्विस, सिएरा क्लब और अन्य पर्यावरणीय NGOs ने इस आदेश को "एकत्रित वन्यजीव संरक्षण की विफलता" कहा। उनका कहना है कि बाइसन ने अमेरिकी ग्रासलैंड की जैविक विविधता को पुनर्जीवित किया है, और उनका हटना सतत कृषि नीतियों और जलवायु परिवर्तन के मुकाबले को और कमजोर करेगा।
जनजातीय समूह, विशेषकर बर्मी बुशी और रैडोकी ट्राइब, जिन्होंने इस क्षेत्र को अपनी पारम्परिक शिकार‑स्थली माना है, ने सरकार को "कानूनी परामर्श‑व्यवस्था" की अवहेलना करने का आरोप लगाया। उन्होंने कोर्ट में याचिका दायर कर बाइसन हटाने को रोकने की मांग की, यह तर्क देते हुए कि इस कदम से उनकी सांस्कृतिक अधिकारों का उल्लंघन होगा।
यह घटना भारत में कृषि‑पर्यावरण नीति के विमर्श से कई समानताएँ दर्शाती है। जहाँ भारतीय केंद्र सरकार अक्सर धान‑विकास के नाम पर जल संसाधनों के दोहन को प्राथमिकता देती है, वहीं छोटे‑किसानों और वन्यजीव संरक्षणवादी समूहों के बीच टकराव उभरता है। ट्रम्प की इस कार्रवाई में भी वही स्वरूप दिखता है – विकास‑पर्यावरण समझौते को फ़सल‑उत्पादक वर्ग के दबाव में बदल देना, और सामाजिक‑पर्यावरणीय न्याय को किनारे पर धकेलना।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस कदम से ट्रम्प प्रशासन की रैंचर‑समर्थक नीति को स्पष्ट रूप से अद्यतन किया गया है, जिससे सत्ता में रहने वाले रिपब्लिकन मतदाताओं की रुख़-रवैया को सुदृढ़ करने का लक्ष्य है। विपक्षी डेमोक्रेट्स ने इसे "जनजातीय अधिकारों और पर्यावरणीय सुरक्षा के विरुद्ध स्पष्ट दांव" कहा, और कांग्रेस में सुनवाई की मांग की।
सार्वजनिक हित के पहलू को देखते हुए, बाइसन हटाने के आर्थिक लाभ को पर्यावरणीय क्षति, स्थानीय समुदायों के सामाजिक‑सांस्कृतिक अधिकारों और संभावित कानूनी चुनौतियों के साथ तोलना आवश्यक है। यदि इस नीति को न्यायिक जाँच के बिना लागू किया गया, तो यह न केवल अमेरिकी वन्यजीव संरक्षण के अंतर्राष्ट्रीय प्रतिबद्धताओं को कमजोर करेगा, बल्कि लोकतांत्रिक जवाबदेही के सिद्धान्तों पर भी सवाल उठाएगा।
Published: May 5, 2026