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Category: राजनीति

ट्रम्प की ‘प्रोजेक्ट फ्रीडम’ से भारत की जल सुरक्षा नीति में नई उलझन

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने अपना नया कार्यक्रम “प्रोजेक्ट फ्रीडम” उजागर किया, जिसमें कहा गया कि स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज में फँसे जहाज़ों को मजबूती से निकाला जाएगा। विवरण कम रहने के बावजूद, यह दावा भारत के ऊर्जा‑सुरक्षा पर तत्काल प्रभाव डालेगा। भारत‑अमेरिका संबंधों के मौजूदा पृष्ठभूमि में, इस घोषणा को भारतीय सरकार ने सावधानीपूर्वक देखते हुए प्रतिवाद किया है।

मुख्य मंत्री नरेंद्र मोदी ने विदेश मंत्रालय के माध्यम से कहा कि भारत ‘हिट‑एंड‑रन’ जैसी अस्थिर कदमों से बचते हुए, बहुपक्षीय संवाद के माध्यम से जलमार्ग सुरक्षा को बनाए रखने को प्राथमिकता देगा। वहीं, विपक्षी दलों ने इस बयान को ‘अमेरिकी दावों की पुनरावृत्ति’ और ‘इकाइयों की सुरक्षा में कमज़ोरी’ के रूप में टटोल दिया। राष्ट्रीय लोकतांत्रिक गठबंधन (NDA) की सदस्य दल, बीजेपी के भीतर भी, इस संकल्पना पर प्रश्न उठाते दिखे, विशेषकर जब भारत का 70 % तेल आयात इस जलमार्ग से गुजरता है।

विपक्षी भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने ‘सरकार की रणनीतिक लापरवाही’ का आरोप लगाया, यह कहते हुए कि नई अमेरिकी नीति भारत को अनपेक्षित जोखिमों के सामने रख सकती है। कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने ‘समुचित परामर्श’ और ‘स्वतंत्र सुरक्षा रणनीति’ की माँग की, जिसमें भारतीय नौसेना की क्षमता को बढ़ाने और वैकल्पिक तेल आपूर्ति मार्गों की तलाश को प्रमुखता दी गई।

सुरक्षा विश्लेषकों का मानना है कि ट्रम्प का “फोर्सफुल” शब्द केवल रेटोरिक से आगे नहीं बढ़ा है; यह संभवतः अमेरिकी नौसैनिक हस्तक्षेप के साथ जुड़े आर्थिक प्रतिबंधों का संकेत हो सकता है, जो भारतीय कंपनियों के अंतर्राष्ट्रीय लेन‑देनों में जटिलता बढ़ा सकता है। इस संदर्भ में, भारतीय विदेश नीति को दोहरी राह पर चलना पड़ेगा: एक ओर अमेरिका के साथ सहयोग को सुदृढ़ करना, और दूसरी ओर अपने राष्ट्रीय हितों को प्राथमिकता देते हुए स्वतंत्र रणनीतिक विकल्प रखना।

सरकार ने इस दिशा में कई कदम उठाने का संकेत दिया है। रक्षा मंत्रालय ने कहा कि भारतीय नौसेना के ‘ऑफ़शोर लेजिंग’ प्रोजेक्ट को अगले वित्तीय वर्ष में तेज़ किया जाएगा, और द्विपक्षीय समुद्री अभ्यासों को बढ़ावा दिया जाएगा। इसके अलावा, ऊर्जा मंत्रालय ने वैकल्पिक तेल टर्मिनलों की गति बढ़ाने और मध्यस्थ देशों के साथ ऊर्जा साझेदारी को सुदृढ़ करने की योजना अबलॉइंड कर ली है।

आगे देखते हुए, चुनाव‑सम्बन्धी माहौल भी इस मुद्दे को राजनीतिक वजन देता है। आगामी 2026 के राज्यों के चुनावों में जल सुरक्षा और ऊर्जा अभिव्यक्ति मुख्य विषय बनेंगे, जहाँ विपक्षी गठबंधन सरकार की ‘ग्लोबल इंट्रीग्रिटी’ की नीति को चुनौती दे सकता है। इस बीच, जनसंख्या की जलमार्ग सुरक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ रही है, जिससे नीतिगत पारदर्शिता और जवाबदेही की माँग भी तेज़ हो रही है।

संक्षेप में, ट्रम्प के “प्रोजेक्ट फ्रीडम” ने भारत को अपनी समुद्री सुरक्षा रणनीति का पुनर्मूल्यांकन करने पर मजबूर कर दिया है। सरकारी कार्रवाई‑प्रणाली, विपक्षी आलोचना और जनहित की गहरी अपेक्षा के बीच, इस मुद्दे का समाधान भारत के भविष्य के ऊर्जा‑सुरक्षा ढाँचे को तय करेगा।

Published: May 4, 2026