जो होना ही था, उसे दर्ज करता, देखता और सवाल करता समाचार मंच

Category: राजनीति

ट्रेड यूनियन कांग्रेस ने यूके बैंकों पर विंडफॉल टैक्स बढ़ाने की मांग की

बृहस्पतिवार को ट्रैड्स यूनियन कांग्रेस (टीयुसी) ने फिर से उन चार बड़े यूके बैंकों पर विंडफॉल टैक्स को 3 प्रतिशत से 8 प्रतिशत तक बढ़ाने की माँग रखी। यह माँग उन बैंकों द्वारा प्रथम तिमाही में दर्ज कराए गए लगभग 14 अरब पौंड के लाभ के सामने आई, जिसे कुछ हिस्सों में इरान-युद्ध से उत्पन्न बाजार अस्थिरता ने भी बढ़ावा दिया।

कनसरवेटिव सरकार ने 2023 में इस टैक्स को 8 प्रतिशत से घटाकर 3 प्रतिशत कर दिया था, यह तर्क देते हुए कि यह वित्तीय संस्थानों को अधिक तरलता प्रदान करके आर्थिक विकास को गति देगा। अब वही सरकार इस साल के उच्च ब्याज दरों और अंतरराष्ट्रीय तनाव के कारण बैंकों के मुनाफे में अचानक उछाल के सामने राजस्व की दुबली खिड़की देख रही है।

टीयुसी के प्रमुखों ने कहा कि “जब बैंकों का लाभ 100 मिलियन पौंड से अधिक हो तो उन्हें 8 प्रतिशत टैक्स देना ही उनका सामाजिक उत्तरदायित्व है”। उन्होंने यह भी जोड़ते हुए कहा कि मौजूदा दर “बड़ी वित्तीय संस्थाओं को सार्वजनिक फंड की ओर से असमान लाभ उठाने से बचाने में असफल” है।

विरोधी लेबर पार्टी ने इस पर त्वरित प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि सरकार को “संकट के समय में ही नहीं, बल्कि तब भी जब वित्तीय संस्थाएँ अत्यधिक मुनाफा कमा रही हों, तब भी सार्वजनिक हित की रक्षा के लिए कर नीति में दृढ़ता दिखानी चाहिए”। वहीं कंजर्वेटिव पक्ष के प्रवक्ता ने कहा कि “कौशलपूर्ण कर सुधार से निवेश को प्रोत्साहन मिला, और वर्तमान में बैंकों का प्रॉफिट मुख्यतः उच्च ब्याज दरों का स्वाभाविक परिणाम है”।

आर्थिक टिप्पणीकारों ने इस मुद्दे को नीति‑विफलता का एक स्पष्ट उदाहरण बताया। उन्होंने इंगित किया कि मौद्रिक नीति के कारण ब्याज दर में वृद्धि ने उपभोक्ताओं के ऋण भार को बढ़ाया, जबकि बैंकों को उच्च मार्जिन मिल रहा है, और टैक्स नीति में दोहरे मानकों से सार्वजनिक भरोसा क्षीण हो रहा है।

जैसे-जैसे यूके में किराया, ईंधन और खाने की कीमतें ऊपर की ओर जा रही हैं, इस प्रकार की कर माँगें आम जनता की “बैंकों के बड़े मुनाफे पर कराधान” की अपेक्षा के साथ तालमेल रखती हैं। यदि सरकार ने यह कदम नहीं उठाया, तो आगामी वित्तीय चुनावों में यह मुद्दा विपक्ष की जाँच का मुख्य बिंदु बन सकता है।

दुनिया भर में सरकारें सार्वजनिक धन को निजी लाभ से अलग करने की कोशिश में अक्सर दोपहिया रास्ते चुनती हैं; यूके में यह फिर से वही दुविधा सामने है, जहाँ वित्तीय लाभ के साथ सामाजिक जिम्मेदारी का संतुलन अभी भी सवालों के घेरे में है।

Published: May 6, 2026