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Category: राजनीति

ज़ेलेंस्की के पास रूस व पश्चिम के खिलाफ प्रभावी साधन नहीं बचा

यूक्रेन के राष्ट्रपति व्लादिमीर ज़ेलेंस्की अब ऐसी स्थिति में फँस चुके हैं जहाँ वह न तो रशिया के खिलाफ मजबूत कूटनीतिक प्रतिरोध रख पाते हैं, न ही पश्चिमी सहयोगियों से नई आर्थिक‑सैन्य राहत प्राप्त कर पाते हैं। कई वर्षों का सैन्य संघर्ष और लगातार बढ़ता युद्ध‑थकान, दोनों ही किनारों पर चल रही शर्तों को कमजोर कर गया है।

रूस ने युद्ध के शुरुआती महीनों में प्राप्त हुए नुकसान को धीरे‑धीरे भरते हुए एशिया‑पैसिफ़िक साझेदारियों के माध्यम से नई संसाधन लाइनें स्थापित कर ली हैं। इसकी बलपराक्रमी स्थिति अब भी यूरोपीय सीमाओं के भीतर एक वास्तविक खतरा बनकर बनी हुई है, जबकि यूक्रेन के पास वह सौदा नहीं है जो मौजूदा कष्टभरी शांति को एक सार्थक लाभ में बदल सके।

पश्चिमी सहयोगियों की ओर से भी सैन्य सहायता में गिरावट देखी जा रही है। NATO के प्रमुख देशों में से कई ने घरेलू आर्थिक दबाव और चुनावी समीक्षाओं के कारण आगे की सहायता को सीमित कर दिया है। इस प्रवृत्ति ने ज़ेलेंस्की के वैकल्पिक कूटनीतिक विकल्पों को समाप्त कर दिया है; वह अब शर्तों पर बातचीत करने के लिए मजबूर हैं, फिर भी उन शर्तों में पर्याप्त प्रतिपूर्ति नहीं मिल रही।

यह स्थिति भारत की विदेशी नीति के पारिदृश्य में नई चर्चा का कारण बन गई है। नई दिल्ली ने युद्ध के शुरुआती चरण में स्पष्ट समर्थन दिखाते हुए सैन्य सहायता और आर्थिक प्रतिबंधों को प्राथमिकता दी थी। परंतु वर्तमान में सरकार ने संतुलन बनाते हुए दोनों पक्षों के साथ संवाद को जारी रखा है, जिससे विपक्ष को ‘राष्ट्र की सुरक्षा के प्रति निरंकुशता’ का आरोप लगा रहा है। आगामी लोकसभा चुनावों में यह मुद्दा फिर से उभरेगा, क्योंकि विरोधी दल यूक्रेन‑रूस संकट को भारत की ऊर्जा सुरक्षा और कूटनीतिक स्वायत्तता पर संभावित प्रभाव के रूप में पेश कर रहे हैं।

परिणामी, ज़ेलेंस्की के पास अब कोई ऐसा ‘कार्ड’ नहीं बचा जो रूसी आक्रमण को रोक सके या पश्चिम से पर्याप्त समर्थन उत्पन्न कर सके। यह न केवल यूक्रेन के नागरिकों के लिए एक कष्टदायक शांति का संकेत देता है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय मंच पर शक्ति संतुलन को भी पुनः निर्धारित करता है। भारत की नीति निर्माताओं को अब इस नए युग में अपनी रणनीति को पुनर्मूल्यांकन करना पड़ेगा, ताकि राष्ट्रीय हितों को संरक्षित किया जा सके और वैश्विक मंच पर अपनी आवाज़ को सुदृढ़ किया जा सके।

Published: May 3, 2026