जो होना ही था, उसे दर्ज करता, देखता और सवाल करता समाचार मंच

Category: राजनीति

जापान के प्रधानमंत्री का हार्मुज बंद पर चेतावनी: भारत के ऊर्जा सुरक्षा को अस्थिर करने वाली जटिल चुनौती

टोक्यो के प्रधान मंत्री यासुहिरो फुजिता ने सोमवार को कहा कि स्ट्रेट ऑफ हार्मुज की प्रभावी बंदी एशिया‑प्रशांत क्षेत्र पर "भारी प्रभाव" डाल रही है। इस बयान में उन्होंने समुद्री मार्ग की बाधा को तिर्यक कर तेल आपूर्ति, समुद्री व्यापार और क्षेत्रीय स्थिरता पर संभावित जोखिमों की ओर इशारा किया।

भारत, जो अपनी 80 % से अधिक तेल आयात के लिए मध्य‑पूर्वी समुद्री मार्ग पर निर्भर है, इस विकास को राष्ट्रीय सुरक्षा का प्रश्न मान रहा है। नई दिल्ली का विदेश मंत्रालय पहले ही यह संकेत दे चुका है कि हार्मुज बंदी से भारतीय तेल आयात पर प्रत्यक्ष असर पड़ सकता है, जिससे निर्यात‑आधारित उद्योगों में लागत बढ़ेगी और अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ेगा।

वर्तमान में केंद्र सरकार ने इस संकट को लेकर कई कदम उठाए हैं: पश्चिमी खाड़ी के अन्य समुद्री मार्गों की क्षमता बढ़ाने, भारतीय नेविगेशन क्षमताओं को सुदृढ़ करने और वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों की त्वरित उपलब्धता सुनिश्चित करने की योजना पर जोर दिया है। हालांकि, विपक्षी दलों ने इन उपायों को "प्रतिध्वनि‑नीति" और "मांग के मुकाबले अपर्याप्त" करार देते हुए आलोचना की। राष्ट्रीय लोकतांत्रिक गठबंधन (एनडीडी) के प्रमुख नेता सियावर लालवानी ने कहा, "हमें दीर्घकालिक ऊर्जा सुरक्षा के लिए नवीकरणीय ऊर्जा और रणनीतिक तेल भंडारण में निवेश करना चाहिए, न कि अस्थायी वैकल्पिक मार्गों को लेकर हल्का‑फुलका बयान देना।"

दिवाली से पहले आने वाले लोकसभा चुनावों के मध्य-परिसर में इस मुद्दे को राजनीतिक लाभ के साधन के रूप में भी देखा जा रहा है। अधिनायकवादी रूप में सत्ता को अस्वीकार करने वाली विपक्षी पार्टी, भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की विदेश नीति को "कुशलता‑की कमी" और "राष्ट्रहित को निरक्षर" कह कर सभ्य बनाते हुए, सरकार के ज्ञान‑संकट को उजागर कर रही है।

साथ ही, रणनीतिक विशेषज्ञों ने कहा कि हार्मुज बंदी के मूल कारण – मध्य‑पूर्व में जियोपॉलिटिकल तनाव और ईरान‑यूएससी संबंध – को केवल समुद्री रूट वैकल्पनाओं से सुलझाया नहीं जा सकता। उन्होंने न्यू दिल्ली से इस बात की अपेक्षा की कि सरकार एशिया‑प्रशांत के साथ मिलकर बहुपक्षीय सुरक्षा ढांचे को सुदृढ़ करे, और समुद्री सुरक्षा के लिए संयुक्त नौसैनिक अभ्यासों को तेज़ी से लागू करे।

जापान के प्रधान मंत्री की इस चेतावनी ने न केवल भारत में बहस को जलाया, बल्कि यह संकेत दिया कि एशिया‑प्रशांत की बड़ी आर्थिक धारा, जो भारत, चीन, जपान और दक्षिण कोरियन देशों को जोड़ती है, अब स्थानीय जलमार्ग के उलझनों से ग्रस्त हो रही है। इस संदर्भ में, सरकार की जवाबदेही स्पष्ट होने चाहिए: क्या वह मौजूदा ऊर्जा नीति की निरंतर विफलता को सुधारने के लिए व्यापक रिफॉर्म करेगा, या चुनावी आँकड़ों को संवारने के लिए अस्थायी उपायों पर ही टिकेगा?

अंततः, हार्मुज बंदी का प्रभाव ‘भारी’ कहलाने के बाद, यह देखना बेक़ाबू होगा कि भारत के राजनीतिक वर्ग इस संकट को किस तरह से प्रजननशील नीति संवाद में बदलते हैं, और क्या वह राष्ट्रीय हित को निर्वाचन‑केंद्रित राजनीति से ऊपर रख पाते हैं।

Published: May 4, 2026