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जैक स्मिथ ने न्याय विभाग को ‘भ्रष्ट’ करारते हुए ट्रम्प और उनके सहयोगियों को मुकदमेबाज़ी के सहायक बताया
वॉशिंग्टन में पिछले महीने आयोजित एक निजी सभा में अमेरिकी पूर्व विशेष अभियोक्ता जैक स्मिथ ने सीधे न्याय विभाग के नेताओं पर आक्रमण किया, कहा कि वे राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प और उनके करीबी सहयोगियों के पक्ष में मुकदमे चलाने के उद्देश्य से अभियोजन रणनीति बनाते हैं। स्मिथ ने कहा कि इस प्रकार की ‘पार्टी‑सेवा‑प्रोफ़ाइल’ अभियोजन न केवल न्यायिक तंत्र को दुरुस्त करती है, बल्कि प्रशासन को भी राजनैतिक रूप से कमजोर करती है।
स्मिथ का यह बयान एक एहतियातपूर्वक उजागर हुई सच्चाई का हिस्सा है, जहाँ कई हाई‑प्रोफ़ाइल मामलों में ट्रम्प‑समर्थित कोरियों को ‘रक्षा‑उपकरण’ माना गया है। उनके अनुसार, न्याय विभाग के भीतर कुछ शीर्ष अधिकारी, जिनमें एटर्नी जनरल की नियुक्ति प्रक्रिया भी शामिल है, ने न्याय व्यवस्था को राष्ट्रपति के बेमौला “इम्प्रेशन” के लिए प्रयोग किया।
इस आरोप पर व्हाइट हाउस ने तुरंत नापसंदगी व्यक्त की, कहा कि “अफ़रातफरी के इस दौर में ऐसी धुंधलीं‑धुंधलीं बातें करना निंदनीय है” और स्मिथ के शब्दों को “राजनीतिक दाव‑पेंच” बताया। रिपब्लिकन पार्टी के कई वरिष्ठ नेता भी स्मिथ को “विचार‑विहीन” कहकर लेबल कर रहे हैं, जबकि डेमोक्रेटिक सांसदों ने इस खुलासे को “साक्ष्य‑परक” करारते हुए राष्ट्रपति के पूर्वकाल की जांच के लिए नया आयाम पेश किया।
स्मिथ की टिप्पणी को जनसुरक्षा के पहलू से भी देखना आवश्यक है। यदि वास्तव में DOJ के कुछ प्रमुख व्यक्तियों ने राष्ट्रपति को खुश करने के लिये मुकदमे बुनते हों, तो यह न्यायिक स्वतंत्रता के मौलिक सिद्धांतों को गंभीर रूप से क्षति पहुंचाता है। ऐसी स्थिति में सार्वजनिक भरोसा टूटता है, और शासन की वैधता पर प्रश्न उठते हैं।
वर्तमान में कई हाई‑प्रोफ़ाइल मामलों की सुनवाई चल रही है, जिनमें ट्रम्प की संभावित चुनाव‑अवैध कार्यों से जुड़ी जांच भी शामिल है। स्मिथ के आरोपों के परिणामस्वरूप कांग्रेस में अब एक विशेष सुनवाई का प्रस्ताव सामने आया है, जहाँ दोनों पक्ष (डेमोक्रेटिक एवं रिपब्लिकन) इस मुद्दे को ‘विधान‑परिधि की सीमा’ के भीतर ले जाने का दावा कर रहे हैं। यदि इस प्रस्ताव को मंजूरी मिलती है, तो यह अमेरिकी न्याय व्यवस्था के लिए ‘राजनीतिक‑समीक्षा’ का नया अध्याय खोल सकता है।
हिंदुस्तान में भी इस प्रकार के आरोपों की गूँज सुनाई देती है, जहाँ कई राज्य स्तर पर न्यायपालिका तथा पुलिस बल पर राजनीतिक दबाव की बातें सामने आई हैं। भारतीय वस्तुस्थिति में, जब लोकतांत्रिक संस्थाएँ ‘राजनीतिक‑उपयोगिता’ के शिकार बनती हैं, तो इसके दीर्घकालिक परिणाम समाजिक असंतोष तथा शासन की जवाबदेही के प्रश्नों में परिलक्षित होते हैं। इस संदर्भ में, स्मिथ का बयान न केवल अमेरिका में बल्कि विश्व स्तर पर न्यायिक संस्थाओं की स्वतंत्रता के प्रति सतर्कता का संकेत देता है।
Published: May 7, 2026