छाद में बोको हमार के घात में 23 सैनिकों की मौत, सुरक्षा नीति पर सवाल
छाद के लेक चाड क्षेत्र के बर्का टोलोरम द्वीप पर नाइजीरिया-आधारित उग्रवादी समूह बोको हमार ने एक घात किया, जिसमे छाद की सेना के 23 जवान मारकर बिखर गये। छाद के सेना प्रमुख ने बताया कि इस हमले में विस्तृत तोपबंदि और रॉकेट चलाए गये, जो कि निचली कक्षीय इंजीनियरिंग इकाइयों द्वारा तैयार किया गया था।
बोको हमार ने पहले भी लेक चाड के चारों ओर कई बार सीमापार हमले किये हैं, जिससे छाद, नाइजर, नौजर और कॅमेरून में सुरक्षा स्थिति लगातार बिगड़ती जा रही है। इस समूह को नाइजीरिया में 2009 में स्थापित किया गया था, लेकिन पिछले कुछ सालों में उन्होंने अपनी कार्रवाई को सीमाओं के पार विस्तारित कर, अंतरराष्ट्रीय सामुदायिक सुरक्षा ढांचे को चुनौती दी है।
छाद के राष्ट्रपति ने दुख व्यक्त करते हुए कहा कि "हमारी सेना ने अपने कर्तव्य को अडिग रह कर पूरा किया है" और कहा कि सरकार जल्द ही इस‑संबंधी सख्त कदम उठाएगी। उसने भारतीय सेना के साथ सैन्य सहयोग को सुदृढ़ करने की बात भी कही, जिससे यह संकेत मिला कि छाद अब अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा साझेदारियों पर अधिक निर्भर हो रहा है।
विपक्षी दलों ने इस घटना को सरकार की नीतिगत विफलता का प्रमाण बताया। कई सांसदों ने सवाल उठाया कि बोको हमार जैसी प्रतिद्वंद्वी समूहों के प्रति छाद की सीमा सुरक्षा नीतियां इतने सालों से क्यों नाकाफ़ी रहतीं, जबकि पड़ोसी देशों ने सीमा निगरानी में अत्याधुनिक तकनीक और सामुदायिक खुफिया आदान‑प्रदान को लागू कर लिया है। विरोधी राजनेताओं ने यह भी कहा कि सेना को पर्याप्त आधुनिक हथियारों और प्रशिक्षण की कमी है, जिससे इस तरह के हमलों का जोखिम बढ़ रहा है।
सुरक्षा विशेषज्ञों ने इंगित किया कि छाद के लिए बोको हमार की रणनीति को समझना और उसके आधारभूत आर्थिक स्रोतों—जैसे खनन, कृषि और मानव तस्करी—को तोड़ना आवश्यक है। उन्होंने कहा, "यदि छाद केवल सैन्य कार्रवाई पर निर्भर रहेगा, तो बोको हमार के हमले कम नहीं होंगे; व्यापक रणनीति, जिसमें सामाजिक विकास और अभियानात्मक खुफिया साझेदारी शामिल हो, अनिवार्य है।"
यह घटना भारत के भी समान सुरक्षा चुनौतियों को उजागर करती है, जहाँ बशरजाद क़ायलू जैसी सीमावर्ती विक्रोधियों के साथ लड़ते समय सरकार की नीतियों पर बार‑बार सवाल उठते रहे हैं। इससे यह स्पष्ट होता है कि सीमावर्ती आतंकवाद के मुकाबले केवल बल के प्रयोग से काम नहीं चल पाता, बल्कि दीर्घकालिक विकासात्मक उपायों और पारदर्शी जवाबदेही की भी जरूरत है।
अगले हफ़्ते छाद के राष्ट्रपति ने राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के अंतर्गत एक विशेष समिति गठित करने की घोषणा की, जिसका काम बोको हमार की अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क का विश्लेषण और भविष्य की रणनीति तैयार करना होगा। इस वादे की सच्ची कार्यान्वयन क्षमता को देखते हुए विपक्षी दल और नागरिक समाज ने सरकार को त्वरित कदम उठाने और नीतियों में पारदर्शिता लाने की अपील की है।
Published: May 5, 2026