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चाड ने बोको हराम के घात के बाद राष्ट्रीय शोक घोषित किया, सुरक्षा नीति पर सवाल उठे
लेक चाड के किनारे स्थित एक सैन्य बेस पर बोको हराम के घातक दुरुपयोग में दो जनरल की मौत हुई, यह खबर सरकार ने देर शाम सूचना दी। इस हिंसा के बाद राष्ट्रपति महामत इद्रिस दеби ने राष्ट्रीय शोक की घोषणा की, जबकि इस क्षेत्र में पिछले हफ्ते ही बोको हराम के हमले में दर्जनों लोगों की मौत हो चुकी थी।
सुरक्षा दायरे में कई आधे साल से चल रहा संघर्ष, अब एक बार फिर Chad के क्रियान्वयनशील सुरक्षा नीति की प्रभावशीलता को चुनौती देता दिख रहा है। दеби सरकार ने 2022 में बोको हराम को पूरी तरह से काबू में करने का वादा किया था, लेकिन लगातार आतंकवादी हमले इस वादे को धुंधला कर रहे हैं।
विपक्षी दल, मुख्य रूप से राष्ट्रीय स्वतंत्रता गठबंधन (CND) और सामाजिक लोकतांत्रिक पार्टी, इस अवसर पर सरकार की सुरक्षा व्यवस्था में 'निरन्तर लापरवाहि' का आरोप लगा रहे हैं। वे तर्क देते हैं कि जमीनी स्तर पर बुनियादी खुफिया ढांचा कमजोर है, और सेना के भीतर भ्रष्टाचार ने ऑपरेशनल दक्षता को घटाया है। विपक्ष के लीडर मारिया बेन्यो ने कहा, "जब हमारे सबसे ऊंचे सैन्य नेता मार जाते हैं, तो यह दर्शाता है कि राष्ट्रीय सुरक्षा का बोझ अकेले राष्ट्रपति के कंधों पर नहीं, बल्कि पूरे प्रशासनिक तंत्र पर है।"
सरकार ने इस मुद्दे पर प्रतिवाद किया, यह कहते हुए कि बोको हराम के संघर्ष में अस्थायी नरसंहार अनिवार्य है और यह आतंकवादी समूहों की अनुकूलन शक्ति का परिणाम है, न कि सरकारी नीतियों में कमी। रक्षा मंत्री ने कहा कि अगले दो महीनों में क्षेत्रीय निगरानी के लिए ड्रोन और सैटेलाइट इंटेलिजेंस को बढ़ाया जाएगा, तथा राष्ट्रीय आतंकवाद विरोधी योजना को पुनः समीक्षा किया जाएगा।
इन घटनाओं का भारतीय नीति-निर्माताओं पर भी प्रभाव पड़ता है। भारत ने अतीत में अफ़्रीकी सुरक्षा अभियानों में सहयोग किया है, और साक्सेन (SAC) के माध्यम से Chad को मानवीय सहायता व प्रशिक्षण प्रदान किया है। इस दौर में भारत की विदेश नीति को दो तरफा चुनौती का सामना करना पड़ेगा: एक ओर, अफ्रीकी साझेदारों को दृढ़ सुरक्षा समर्थन देना है; दूसरी ओर, घरेलू विपक्षी आवाज़ें भारत के विदेश नीति में अधिक सक्रियता को "पुस्तक में लिखी हुई सुरक्षा नीति" मानने की आलोचना कर रही हैं।
नागरिक समाज की प्रतिक्रिया मिश्रित है। मानवाधिकार संगठनों ने बोको हराम द्वारा किए गए अंधाधुंध हमले की निंदा की, साथ ही सरकार से माँग की कि पीड़ितों के परिवारों को उचित मुआवजा और पुनर्वास सुविधाएँ उपलब्ध कराई जाएँ। वहीं, स्थानीय आबादी में आतंकवाद के निरंतर खतरे के कारण सुरक्षा बलों के प्रति भरोसा घटता दिख रहा है।
संक्षेप में, दो जनरल की मौत और राष्ट्रीय शोक की घोषणा केवल एक दुखद घटना नहीं, बल्कि एक व्यापक राजनीतिक विमर्श को उत्पन्न करती है। यह सवाल उठता है कि Chad का वर्तमान सुरक्षा ढांचा, जो स्थानीय गुटों और अंतरराष्ट्रीय साझेदारों पर अधिक निर्भर है, क्या वास्तव में बोको हराम जैसे आतंकवादी नेटवर्क को नष्ट कर सकेगा, या यह सिर्फ सतह पर एक अस्थायी समाधान है। इस मुद्दे पर सरकार, विपक्ष और जनता के बीच जारी तीखी बहस, आने वाले चुनावी सालों में सुरक्षा, प्रशासनिक जवाबदेही और राष्ट्रीय हित के परिदृश्य को फिर से आकार दे सकती है।
Published: May 7, 2026