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Category: राजनीति

केयर स्टारमर के भरोसेमंद सलाहकार वरुण चंद्र ने अमेरिका के टॉप टेक कंपनियों से १६ गुप्त बैठकें कीं

अंग्रेज़ी समाचार पत्र गॉर्डियन ने खुलासा किया कि केयर स्टारमर सरकार के निकटतम आर्थिक सलाहकार, वरुण चंद्र, ने अक्टूबर 2024 से अक्टूबर 2025 के बीच १६ बार प्रमुख अमेरिकी तकनीकी कंपनियों - गूगल, मेटा, एप्पल आदि - के शीर्ष कार्यकारियों से गुप्त मुलाक़ातें कीं। इन मुलाक़ातों में नियामक सुधार, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) नीति और डोनाल्ड ट्रम्प के संभावित दूसरे कार्यकाल जैसे संवेदनशील मुद्दों पर चर्चा की गई, और एक बार चंद्र ने एक टेक कार्यकारी को सीधे प्रधानमंत्री से मिलवाने का प्रस्ताव भी रखा।

यह खुलासा थ्रेड में कई प्रश्न उठाता है। सबसे पहले, ऐसी बैठकों की जानकारी क्यों सार्वजनिक नहीं की गई? ब्रिटेन में पारदर्शिता को संवैधानिक प्रतिबद्धता कहा जाता है, पर इस मामले में राज्य के सबसे बड़े एलिट परामर्शदाता ने राष्ट्रीय हित के मुद्दों को निजी कंपनियों के साथ बंद कमरे में मोल-भाव किया। विरोधी पार्टी कंज़र्वेटिव्स ने इस पर “अंतर्महिष्कीय लाबियिंग” का टैग लगा दिया और संसद में एक विस्तृत जांच की माँग की है।

सरकारी पक्ष ने अभी तक कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं दी, केवल यह कहा है कि सभी आधिकारिक मुलाक़ातें ‘सुरक्षित रूप से दर्ज’ हैं और “राष्ट्रीय सुरक्षा एवं आर्थिक हित” को प्राथमिकता दी गई है। यह वही तर्क है, जो कई वर्षों से भारत में भी टैक लाबियिंग के दावों को झटकते समय सुना जाता है – “राष्ट्र का हित, हम पहले जानते हैं”।

वास्तविक नीति‑प्रभाव की बात करें तो, यदि इस तरह के निजी‑से‑सरकारी संवाद बिना सार्वजनिक सुनवाई के होते रहे तो AI नियमन, डेटा सुरक्षा और प्लेटफ़ॉर्म कर जैसी प्रमुख पहलें जनता की जरूरतों के बजाय कॉरपोरेट साहसिकता पर आधारित हो सकती हैं। यह स्थिति उस समय के समान है, जब भारत में डिजिटल टैक्स की अवधारणा से पहले बड़े टैक दिग्गजों की चतुराइयों ने नीति प्रक्रिया को धुंधला कर दिया था।

कई नागरिक अधिकार समूहों ने इस खुलासे पर “डोर-टू-डोर लाबियिंग का एक नया मॉडल” कहा है, और क़ानूनी रूप से लाबियिंग रजिस्टर को सख़्त करने की माँग की है। यदि सरकार इन अनुरोधों को नजरअंदाज़ करती रही, तो सार्वजनिक भरोसे को जड़ से क्षति पहुंचाने वाला एक आँसू का मोती बन सकता है।

संक्षेप में, वरुण चंद्र की १६ गुप्त बैठकों ने न सिर्फ ब्रिटिश राजनीति में “बंद दरवाज़ा” लाबियिंग की नई परिभाषा प्रस्तुत की, बल्कि पारदर्शिता, जवाबदेही और सार्वजनिक हित के मौलिक सिद्धांतों को फिर से सवालों के घेरे में डाल दिया है। आने वाले हफ्तों में संसद में इस मुद्दे पर कैसे बहस होगी, सतही “आर्थिक प्राथमिकता” के बहानों को किस हद तक झलका सकेगा, यही इस केस का प्रमुख तेल बना रहेगा।

Published: May 3, 2026