केयर स्टार्मर ने यू.एस. राष्ट्रपति ट्रम्प के साथ यूरोप में बढ़ती तनातनी को स्वीकार किया
यूरोपियन पॉलिटिकल कम्युनिटी (EPC) के शिखर सम्मेलन में उपस्थित ब्रिटेन के प्रधानमंत्री केयर स्टार्मर ने खुले तौर पर कहा कि डोनाल्ड ट्रम्प राष्ट्रपति और यूरोपीय संघ के बीच तनाव "उच्चतम स्तर" पर पहुँच चुका है। यह बयान, जो अर्मेनिया के राजधानी येरवान में हुआ, यूरोप में यूक्रेन के संघर्ष और ईरान पर प्रतिकूल विचारधारा के मध्यावधि तनाव के बीच आया।
स्टार्मर ने कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति की यूक्रेन युद्ध में घटती भागीदारी, यूरोपीय नेताओं के बीच असहजता पैदा कर रही है। "जब तक ट्रम्प अपने विदेश नीति को पुनः परिभाषित नहीं करते, यूरोप को रणनीतिक अनिश्चितता का सामना करना पड़ेगा," उन्होंने टिप्पणी की। स्टार्मर का यह बिंदु, ब्रिटिश सरकार द्वारा यूएस‑यूरोपीय गठबंधन को सुदृढ़ करने के प्रयासों से स्पष्ट रूप से अलग दिखता है, जहाँ अब उनका ध्यान घर के अंदर के हितों, विशेषकर यूक्रेन के लिए यूरोपीय ऋण योजना में शामिल होने की दिशा में है।
शिखर सम्मेलन के मुख्य एजेंडा में यूक्रेन के पुनर्निर्माण हेतु यूरोपीय संघ के ऋण तंत्र (EU‑Lending Facility) पर चर्चा थी। ब्रिटेन, जो आधिकारिक रूप से यूरोपीय संघ का सदस्य नहीं है, इस योजना में भागीदारी की इच्छा जताई है। स्टार्मर ने बताया कि ब्रिटिश वित्त मंत्रालय इस पहल के तहत वित्तीय सहयोग का एक नया मंच तैयार कर रहा है, जिससे ब्रिटेन अपनी आर्थिक प्रभावशीलता को बढ़ा सके और साथ ही यूरोपीय सुरक्षा ढांचे में अपनी भूमिका को पुनः स्थापित कर सके।
विपक्षी लेबर पार्टी के वरिष्ठ नेता इस पर सवाल उठाते हुए कहा कि सरकारी तर्क "बाजारवादी कूटनीति" तक सीमित है, जबकि वास्तविक मुद्दा यूक्रेन के प्रति अंतरराष्ट्रीय समर्थन की मजबूती है। उन्होंने ट्रम्प-यूरोप तनाव को एक वैध राष्ट्रीय सुरक्षा खतरे के रूप में नहीं बल्कि संयुक्त राज्य के विदेश नीति में “परिवर्तन” के संकेत के रूप में देखना चाहिए।
साथ ही, भारत के विदेश मंत्रालय ने अर्मेनिया में आयोजित EPC शिखर सम्मेलन को "वैश्विक शांति और बहुपक्षी सहयोग" के मंच के रूप में सराहा। भारतीय प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि यूक्रेन के पुनर्निर्माण एवं ईरान के कूटनीतिक प्रश्नों पर बहुपक्षीय समाधान ही स्थायी शांति का माध्यम है, और इस दिशा में सभी प्रमुख शक्तियों को constructive भूमिका निभानी चाहिए।
शिखर सम्मेलन के दौरान ट्रम्प ने अभी तक कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया, पर यूरोपीय राजनयिक सूत्रों के अनुसार, वह यूक्रेन में अमेरिकी सहायता को “अस्पष्ट” कह रहे हैं, जिससे यूरोप की आर्थिक नीति और सुरक्षा रणनीति पर प्रत्यक्ष असर पड़ रहा है। स्टार्मर की टिप्पणी इस अंतर को उजागर करती है, और यह संकेत देती है कि ब्रिटेन ने अब यूरोप के साथ वित्तीय सगाई को अपनी विदेश नीति का प्राथमिक स्तंभ बना लिया है—भले ही वह अमेरिकी मित्रता से दूरी बनाते हुए।
यह विकास न केवल संयुक्त राज्य‑यूरोप संबंधों की नई जटिलता को दर्शाता है, बल्कि यूरोपीय वित्तीय सहकारिता में ब्रिटेन की भागीदारी को लेकर आने वाले राजनैतिक विवादों का भी आगाज़ करता है। चुनावी समय के करीब आने पर, यह तथ्य उत्तरी अटलांटिक में सत्ता संतुलन को फिर से लिख सकता है—और शायद भारतीय नीति निर्माताओं को भी बहुपक्षीय मंचों में अपनी रणनीतिक स्थिति पुनः परिभाषित करनी पड़ेगी।
Published: May 4, 2026