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Category: राजनीति

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कांग्रेस के कप्तान ने खो दिया नियंत्रण, क्या पार्टी की उड़ान अब भी सुरक्षित है?

जब एक स्विस उड़ान में पायलट को अचानक स्वास्थ्य समस्या का सामना करना पड़ा, तो दो डॉक्टरों और एक सह-उड़ानकर्ता ने समन्वय करके विमान को सुरक्षित ज़ूरिख़ में उतारा। उसी नहीं, बल्कि भारतीय राजनीति में भी ऐसे अस्थायी संकट अक्सर सामने आते हैं, जहाँ ‘पायलट बदलने’ की बारी नहीं, बल्कि ‘कप्तान को ही बदलने’ की बात होती है।

पिछले सप्ताह के अंत में कांग्रेस के केंद्र कार्यालय में एक सार्वजनिक मुलाक़ात के दौरान, कांग्रेस अध्यक्ष महासचिव द्वारा कई बार कहा गया कि पार्टी के मौजूदा नेतृत्व को ‘स्थिर’ रहना चाहिए। लेकिन बेशक, यह शब्दावली तब तक अर्थहीन है जब तक कूलिज़न‑ड्रॉप के साथ विरोधी दल की बैठकों में प्रमुख पदों पर बार‑बार परिवर्तन नहीं होते।

राष्ट्रीय स्तर पर, प्रमुख नेताओं जैसे राहुल गांधी, मौलीकर्ज़न खड़गे, और फिरुकी बंधु ने चुनावी एजेंडा पर ‘बदलाव’ की बात की, परन्तु व्यावहारिक निर्णय‑लेने की प्रक्रिया में उलझन दिखी। वे बैंचमार्क के तौर पर ‘एक पायलट को बीच उड़ान में बदलना नहीं चाहिए’ जैसी पुरानी कहावत को दोहराते हैं, जबकि स्वयं उनकी रणनीति अक्सर ‘भ्रमित पायलटों को बदलते हुए’ नजर आती है।

दिलेरे को देखते हुए, कई राज्य स्तर के कार्यकर्ता यह सवाल उठा रहे हैं कि क्या कांग्रेस का ‘उड़ान‑सुरक्षा प्रोटोकॉल’ वास्तव में अस्तित्व में है। पार्टी के भीतर सत्ता‑संघर्ष, गठबंधन में झटके, और चुनावी गठबंधन के पुनः‑परिभाषा के माहौल ने एक ‘फ्लाइट‑रिकॉर्ड’ तैयार किया है, जिसका कोई स्पष्ट दिशा‑निर्देश नहीं है। इस पर विपक्षी वेंचर के रूप में भाजपा की ओर से कई बार कहा गया है कि ‘स्थिरता ही शक्ति है’, परंतु वही स्थिरता कांग्रेस की आंतरिक कूटनीति में कई बार ‘धुंधली’ रहती है।

नीति‑प्रभाव की बात करें तो, कांग्रेस ने अपने ‘किसान कर्ज़ रिलीफ़’ एवं ‘रोज़गार योजना’ के दावों को अक्सर बेवकूफ़ी नहीं कहा जा सकता, परन्तु इन नीतियों की कार्यान्वयन गति और शासकीय जवाबदेही पर सवाल अब भी बना हुआ है। चुनावी दावों की ‘उड़ान’ को वास्तविकता में उतारने की क्षमता में अंतराल निहित है, जिसका प्रबंधन ही अब कांग्रेस के ‘कप्तान’ से अपेक्षित है।

सारांश में, चाहे विमान का पायलट अचानक लंगड़ा हो या पार्टी का नेता अस्थिर, ‘उड़ान के दौरान पायलट नहीं बदलते’ का सिद्धांत तभी लागू हो सकता है, जब बुनियादी संचालन‑प्रणाली मजबूत हो। कांग्रेस को इस बात का स्पष्ट उत्तर देना होगा कि क्या वह अभी भी अपने ही टीम को भरोसा रखकर, एक स्पष्ट उड़ान‑पथ पर ले जा पाएगी, या फिर वह निरंतर ‘बदलते पायलटों’ के साथ कहीं न कहीं गिरती ही रहेगी।

Published: May 9, 2026