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Category: राजनीति

ओहायो सेनेट प्राइमरी: एपनस्टीन स्कैंडल में GOP का जलता तबका, डेमोक्रेट्स ने ली नई चाल

ऑहायो के 2026 सेनेट प्राइमरी में अब तक का सबसे असामान्य माहौल बन चुका है। एक कम पहचाने गयेगा, हालाँकि अधिकारिक रूप से इंक्यूबेटेड, मौजूदा रिपब्लिकन सांसद का मुकाबला एक सुहृद, व्यापक रूप से जानी-मानी चुनौतीकर्ता के साथ हो रहा है, जो पिछले चुनाव में राष्ट्रीय स्तर पर धूम मचा चुका था। इस द्वंद्व का केंद्र बिंदु सिर्फ वैधता या नीति नहीं, बल्कि जेफ्री एपनस्टीन के घातक घोटाले से उत्पन्न गहरी नाराजगी है, जिस पर दोनों पक्ष अपने-अपने लाभ की कोशिश कर रहे हैं।

डेमोक्रेटिक नेता ने एपनस्टीन के विविध संदिग्ध संबंधों को GOP के भीतर ‘समान्य’ करियर‑परिपथ का हिस्सा बताकर राजनीतिक बाण चलाए हैं। उनका तर्क है कि कई रिपब्लिकन सांसद, जिनमें प्री‑प्राइमरी में खड़े अनायासिया पार्टी का सदस्य भी शामिल है, एपनस्टीन के नेटवर्क से जुड़ाव के संकेतों को अनदेखा नहीं किया जा सकता। इस संदर्भ में उन्होंने कहा, “जब न्यायालय ने एपनस्टीन को मार दिया, तो यह नहीं भूलना चाहिए कि उसके संपर्क में रहे कई राजनेता अभी भी सत्ता में हैं” – यह कथन उसी तरह का है, जैसा भारतीय राजनीति में अक्सर विरोधियों को ‘भ्रष्टाचार के जाल’ में फँसाने के लिये प्रयोग किया जाता है।

रिपब्लिकन पक्ष ने तुरंत प्रतिक्रिया देते हुए एपनस्टीन के मामलों को “जुना विषय” घोषित किया और कहा कि वर्तमान में चल रहे चुनावी मुद्दे—आर्थिक विकास, रोजगार और ऊर्जा नीति—पर ध्यान देना चाहिए। वे यह भी तर्क देते हैं कि एपनस्टीन से जुड़े मामलों को ‘राजनीतिक टार्गेट’ बना कर वोटर भावना को भड़काना लोकतंत्र के मूल सिद्धांतों को कमजोर करता है।

वास्तविकता में, इस प्राइमरी का परिणाम नहीं केवल दो व्यक्तिगत उम्मीदवारों के बीच नहीं रहेगा। यह एक बड़ा संकेत देगा कि क्या अमेरिकी जनता, विशेषकर मध्य‑पश्चिमी स्थितियों में, नैतिक प्रश्नों को आर्थिक और राष्ट्रीय सुरक्षा के सवालों के ऊपर प्राथमिकता देती है। इसी तरह, भारत में भी अक्सर हम देखते हैं कि सत्ता‑प्रतिद्वंद्वी राष्ट्रीय या अंतर्राष्ट्रीय घोटालों को अपने राजनीतिक मोर्चे पर लाते हैं—जैसे आर्थिक नीतियों की विफलता, भ्रष्टाचार के मामले, या सामाजिक उथल‑पुथल—और जनता के असंतोष को अपने फायदे के लिये मोड़ते हैं।

आगे देखते हुए, ओहायो की यह प्राइमरी दो दिशा‑संकटों को उजागर करती है: (1) एक पक्ष से ‘समान्य’ भ्रष्टाचार‑संबंधी आरोपों को राजनीतिक हथियार में बदलना, और (2) दूसरी ओर, उन मुद्दों को बायपास कर विकास‑केन्द्रित एजेंडा पर ध्यान केंद्रित करने का प्रयास। चाहे परिणाम कुछ भी हो, पार्टी‑आधारित बगावत, चुनावी बयानबाज़ी तथा नीतिगत जवाबदेही के प्रश्न दोनों ही पक्षों के लिए समान रूप से चुनौतीपूर्ण रहेंगे। इस दशा में, ओहायो के मतदाता केवल एक वैध प्रतिनिधि ही नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक प्रक्रिया की सच्ची परीक्षा का भी गवाह बनेंगे।

Published: May 6, 2026