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ईरान के ड्रोन शॉट‑डाउन वीडियो से भारत की विदेशनीति पर सवाल
ईरान के राज्य‑नियंत्रित चैनलों ने हाल ही में एक वीडियो जारी किया है, जिसमें एक अमेरिकी निगरानी ड्रोन के मलबे को दिखाया गया है, जिसे ईरानी रक्षा बल ने खाड़ी के हर्मुज जलमार्ग में गिराया बताया है। इस घटना ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सैन्य तनाव को फिर से भड़का दिया है, जबकि भारत के लिए यह सगाई के दोहरे दायरे का सवाल खड़ा करती है।
भारत सरकार ने तत्काल एक सामान्य टिप्पणी जारी कर कहा कि वह क्षेत्रीय शांति व समुद्री सुरक्षा के महत्व को समझती है और सभी पक्षों से आवश्यक सावधानी बरतने का आग्रह करती है। विदेश मंत्रालय ने कहा कि भारत अपनी रणनीतिक स्वायत्तता को कायम रखते हुए, अमेरिकी साथी देशों के साथ मिलकर मध्य पूर्व में स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए तैयार है। लेकिन यह बयान कई बार दोहराया गया, जहाँ “संतुलन” शब्द के पीछे कई अनकहे प्रश्न छिपे हैं।
विपक्षी दलों ने इस पर तीखी नज़र डालते हुए सरकार को “अस्थिर संबंधों के खींचतान में अंधा” करार दिया। कुछ प्रमुख विपक्षी नेताओं ने कहा कि भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिए इराक‑इरान का तेल‑गैस मार्ग अपरिहार्य है, परन्तु अमेरिकी दबाव के सामने सरकार ने “संतुलन” ही चुन लिया है, जिससे राष्ट्रीय हित पर समझौता हो रहा है। चुनावी माहौल में यह मुद्दा विपक्षियों के लिए नई जीत का साधन बन गया, जहाँ वे सरकार की “साहसिक” नीति को “हमीशा के लिये उधम” कहे बिना नहीं रह पाए।
नीति‑परिणाम की दृष्टि से हर्मुज जलमार्ग विश्व तेल व्यापार का एक प्रमुख कलाई का कक्सा है। इस जलमार्ग में अस्थिरता का सीधा असर भारत के तेल की कीमतों तथा निर्यात‑आधारित महँगी वस्तुओं पर पड़ता है। विशेषज्ञों का मानना है कि सरकार को इस तरह के भूराजनीतिक झटकों के लिए वैकल्पिक तेल‑स्रोत और वैकल्पिक शिपिंग मार्ग की सक्रिय रूपरेखा तैयार करनी चाहिए, न कि “कथित संतुलन” की धुंधली नारियों में फंसना चाहिए।
जनता के दृष्टिकोण से देखे तो इस वीडियो ने सिर्फ एक विदेशी द्रुत‑प्रकाशन ही नहीं, बल्कि सड़कों पर तेल की कीमतों की उछाल और समुद्री सुरक्षा की अनिश्चितता को भी उजागर किया है। जब आम नागरिक अपने पैट्रोलीन खर्च में कटौती का आंकलन करते हैं, तो वे देखना चाहते हैं कि सरकार अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपने शब्दों को किस हद तक ठोस कार्रवाई में बदल पाती है। इस बीच, भारत की विदेश नीति कितनी “स्वायत्त” है, इस सवाल का जवाब अभी संसद के मंच पर या अगले चुनावी बहस में ही मिलेगा।
Published: May 7, 2026