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Category: राजनीति

इज़राइल ने लेबनान पर हवाई हमले तेज़ किए, क्षेत्रीय तनाव में नया उछाल

इज़राइल ने पिछले 24 घंटों में लेबनान के विभिन्न क्षेत्रों पर कई हवाई हमले दर्ज किए, जिससे पहले से ही अस्थिर सीमा‑संकट में नई तीव्रता आई है। इस कदम को इज़राइल की नेशनल डिफेंस के आधिकारिक बयानों में "रक्षात्मक कार्रवाई" कहा गया, जबकि लहाद की ओर से लगातार रॉकेट बटालियन के सक्रिय होने का संकेत मिला है।

लेबनान की राजधानी बेयरुत में स्थित सरकार ने इन हवाई हमलों को अंतरराष्ट्रीय कानून के उल्लंघन के रूप में निंदा की, साथ ही संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद को स्थिति की घातक सम्भावनाओं पर त्वरित चर्चा करने का आह्वान किया। संयुक्त राष्ट्र विशेष एजेंट ने तटस्थ स्वर में कहा कि "सिविल जनसंख्या के बड़े पैमाने पर नुकसान का जोखिम अब अस्वीकार्य है"।

भारत की स्थिति इस क्रम में विशेष ध्यान आकर्षित करती है। विदेश मंत्रालय ने हाल ही में प्रेस विज्ञप्ति में कहा कि भारत "इज़राइल के आत्मरक्षा अधिकार को समझता है" और "शांति एवं स्थिरता के लिए सभी पक्षों से संवाद की अपील करता है"। इस बयान को विपक्षी दलों ने अधिकारिक रूप से चुनौती दी। कांग्रेस के प्रमुख राजनीतिज्ञ ने कहा, "इज़राइल की कार्रवाई को हथियारबंद समर्थन नहीं, बल्कि लहाद के अति‑प्रभावी हिट‑एंड‑रन रणनीति का परिणाम माना जा रहा है, और यह हमारे नागरिकों की सुरक्षा तथा मध्य‑पूर्वीय स्थिरता के लिए जोखिमभरा है"। राष्ट्रीय लोकतांत्रिक गठबंधन (नीड) ने भी इस पर प्रगाढ़ असहमति जताते हुए भारत के विदेश नीति में दोहरी मापदण्डों को उजागर किया।

आरएमएस के आधिकारिक आँकड़े के अनुसार, भारत ने पिछले तीन वर्षों में इज़राइल को कुल $5.2 बिलियन मूल्य की सुरक्षा उपकरणों की खरीदारी की है। आलोचक इस तथ्य को दोहराते हुए पूछते हैं कि क्या "रक्षा सहयोग" को सतत सैन्य‑संकटों के साक्षी बनाते हुए व्यापारिक लाभों के साथ नहीं जोड़ा जाना चाहिए। भारत की तटस्थता की दावेदारी पर यह सवाल उठता है कि विदेश नीति के नाम पर आर्थिक हित क्यों प्राथमिकता ले रहे हैं।

सार्वजनिक हित के दृष्टिकोण से यह विकास भारतीय प्रवासियों को सीधे प्रभावित कर सकता है। लेबनान में 45,000 से अधिक भारतीय कामगार और व्यापारी रह रहे हैं, जिन्हें अब संभावित एस्केलेशन के कारण सुरक्षित निकासी योजनाओं की आवश्यकता हो सकती है। इसके अतिरिक्त, मध्य‑पूर्व में तेल निर्यात के मुख्य मार्ग पर अस्थिरता भारत के ऊर्जा भंडार की कीमतों को अस्थिर कर सकती है, जिससे आम जनसत्ता पर असर पड़ेगा।

वास्तविकता यह है कि अंतरराष्ट्रीय कूटनीतिक मंच पर ताल‑बजाने के बीच, जब तक रॉकेट नहीं गिरते, तब तक तनाव को "राजनीतिक संवाद" का भाग मान कर नज़रअंदाज़ करना आसान रहता है। लेकिन जैसे‑जैसे हवाई हमले आगे बढ़ेंगे, भारत को न केवल अपने सार्वजनिक प्रतिबद्धताओं की, बल्कि अपने व्यापार‑सम्बंधों की साफ‑सुथरी जाँच करनी होगी, नहीं तो वह भू‑राजनीतिक जलते शिल्प के बीच अपनी स्वयं की छवि को धुंधला कर देगा।

Published: May 4, 2026