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Category: राजनीति

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इज़राइल के जनरल ने उजागर किया दोहरी शूटर नीति: फिलिस्तीनियों के खिलाफ गोलीबारी, बस्तीवासियों को छूटा

वेस्ट बैंक में इज़राइल की सेना के कमांडर द्वारा सामने लाए गए लीक दस्तावेज़ों से यह स्पष्ट हुआ है कि सैनिकों को फिलिस्तीनियों के खिलाफ कठोर गोलीबारी की अनुमति है, जबकि समान परिस्थितियों में यह निर्देश बस्तीवासियों पर नहीं लागू होता। इस दो-स्तरीय नीति को स्वयं जनरल ने "द्विपक्षीय मानक" के रूप में वर्णित किया, जिससे इज़राइल के सुरक्षा और मानवाधिकार अभिकर्ताओं के बीच तनाव बढ़ रहा है।

दस्तावेज़ में दिखाया गया है कि सैनिकों को "आक्रामक पहरेदार कार्यों" के दौरान फिलिस्तीनियों को मारने की सख्त अनुमति है, जबकि बस्तीवासी नागरिकों को "रोकथाम" के उपायों में ही सीमित किया जाता है। इस असमानता को इज़राइल के कई राजनीतिक दलों ने पहले से ही आलोचना का मुद्दा बनाया था, पर अब आधिकारिक रूप से जनरल के बयान से इसका प्रमाण मिल गया है।

इज़राइल सरकार ने इस बात को तात्कालिक रूप से खारिज कर दिया, यह कहते हुए कि यह जानकारी "अवांछित लीक" है और सुरक्षा संचालन के लिये आवश्यक विवेक को प्रतिबिंबित नहीं करती। रक्षा मंत्रालय ने आगे कहा कि सभी ऑपरेशनों में "समान मानक" लागू होते हैं, और यह लीक "आंतरिक रड़ानुक्रमीय मतभेदों" को उजागर करने की कोशिश है।

इज़राइल की विपक्षी पार्टियों ने इस खुलासे को "सरकारी धोखाधड़ी" और "मानवाधिकार उल्लंघन" का प्रमाण कहा। वे इस बात पर बल दे रहे हैं कि यदि सरकार ने इस दोहरी मानक को वैध ठहराने की कोशिश की, तो यह अंतरराष्ट्रीय कानून और इज़राइल के स्वयं के लोकतांत्रिक सिद्धांतों के विरुद्ध है। इनके पास अब चुनावी मंच पर यह मुद्दा लाने की तैयारी है, जिससे सत्ता में रह रही पार्टी को जवाबदेह ठहराने के लिये एक नया हथियार मिल गया।

भारत में भी समान दोहरी मानदंडों के सवाल बार-बार उठते रहे हैं, विशेषकर दलित, मुस्लिम और जनजातीय समुदायों के साथ हुए असमान व्यवहार पर। इस इज़राइल के केस को भारतीय राजनीतिक विश्लेषक अक्सर एक "समानतर कथा" के रूप में देखते हैं, जहाँ एक पक्ष के लिये सुरक्षा के नाम पर कठोर कार्रवाई को मंजूरी मिलती है, जबकि दूसरे वर्ग को सुरक्षा के तहत ही घटनाओं को घटित रहने दिया जाता है। इस तरह के अंतरराष्ट्रीय उदाहरण से यह स्पष्ट होता है कि "सुरक्षा" शब्द का प्रयोग अक्सर नीति‑निर्माताओं के लिये आवरण बनता है, जबकि वास्तविक कदम अक्सर सामुदायिक असमानता को बढ़ाते हैं।

अंतरराष्ट्रीय संगठनों ने इस लीक पर गंभीर आवाज़ उठाई है, यह कहते हुए कि द्विपक्षीय शूटर नीति न केवल इज़राइल के अंतरराष्ट्रीय छवि को नुकसान पहुंचाएगी, बल्कि वेस्ट बैंक में शांति प्रक्रिया को भी स्थायी रूप से बिखेर सकती है। कुछ देशों ने इज़राइल के साथ मिलने वाले सैन्य सहायता पर पुनर्विचार करने की सभ्यता जताई है।

आगे बढ़ते हुए, इस खुलासे के बाद इज़राइल के संसद सदस्यों को सुरक्षा कवायदों की पारदर्शिता और जवाबदेही पर सवाल उठाने की उम्मीद है। जनता की नजरें अब इस बात पर टिकी हैं कि सरकार किन सिद्धांतों के तहत फिर से सुरक्षा राजनीति को पुनः परिभाषित करेगी, और क्या इस दोहरी मानक को सुधारने के लिये कोई ठोस कदम उठाया जाएगा। इस बीच, फिलिस्तीनी नागरिकों को रोज़मर्रा की असुरक्षा का सामना करना पड़ेगा, जबकि अंतरराष्ट्रीय समुदाय की निरंतर नज़रें इस दोहरी नीति के विरुद्ध उठाए गए कदमों को मापेंगी।

Published: May 7, 2026