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इंग्लैंड में मतदाता पहचान में फोटो आईडी अनिवार्य, मतदान कार्ड वैकल्पिक
ब्रिटिश चुनाव आयोग ने सोमवार को यह स्पष्ट किया कि इंग्लैंड के मतदाताओं को अब केवल फोटो पहचान पत्र (फोटो आईडी) दिखाना ही पर्याप्त होगा, जबकि पारंपरिक मतदान कार्ड (पोलिंग कार्ड) को चयनात्मक माना गया है। यह कदम, जो 2024 में शुरू हुए फोटो‑आईडी कानून को आगे बढ़ाता है, सरकार के "वोटिंग फ्रोड" को रोकने के बयानों के साथ तालमेल रखता है, परन्तु विपक्षी दल और नागरिक समाज के भीतर तीखी आलोचना को जन्म देता है।
सरकार का तर्क है कि फोटो आईडी की आवश्यकता मतदाता पहचान को दो‑स्तर बनाकर जालसाज़ी को रोकती है, और इस प्रकार "सुरक्षित, पारदर्शी और भरोसेमंद" चुनाव सुनिश्चित करती है। वही श्वेतपट्टी के पीछे, कई समीक्षकों का मानना है कि यह नीति सामाजिक रूप से कमजोर वर्गों—जैसे बुजुर्ग, गरीब और आप्रवासी—को अनजाने में बाहर कर सकती है, क्योंकि उनका फोटो आईडी न होना एक बाधा बन सकता है। मतदाता अभिलेखों के आँकड़े के अनुसार, इंग्लैंड में लगभग 12 % योग्य मतदाताओं के पास अभी तक वैध फोटो आईडी नहीं है, जो संभावित मतदाताओं की संख्या को नगण्य नहीं रहने देता।
विपक्षी पक्ष ने इस कदम को "डेमोक्रेसी के नाम पर मतदान का दमन" कहा है। लिबरल डेमोक्रेटिक पार्टी के मुख्य प्रवक्ता ने कहा, "जब एक सरकार चुनाव को सुरक्षित बनाने के बहाने से लोकतंत्र के मूलाधार—मतदान की पहुँच—को सीमित करती है, तो वह अपने स्वयं के वैधता को सवालों के घेरे में लाती है।" उन्होंने सरकार को तत्काल विकल्प‑आधारित पहचान समाधान—जैसे मुफ्त पासपोर्ट या राष्ट्रीय पहचान पत्र—प्रदान करने की मांग की।
इस नीति के प्रभाव का आकलन करने के लिए कई शोध संस्थानों ने संभावित टर्नआउट को दर्शाया है। कुछ विश्लेषकों के अनुसार, फोटो आईडी की कठोरता से कुछ संसदीय क्षेत्र जहाँ मतदाता जनसंख्या में असमानता है, वहाँ अंक तालिका में बदलाव आ सकता है। विशेषकर marginal constituencies में, जहाँ जीत‑हार की सीमा घटिया होती है, ऐसे नियमों से चुनावी परिणामों पर अप्रत्याशित प्रभाव पड़ सकता है।
आधारभूत प्रश्न यह भी उठता है कि सरकार ने मतदान कार्ड को वैकल्पिक बनाते समय क्या पर्याप्त सार्वजनिक जागरूकता अभियान चलाया है। कई मतदाता अभिभावकों ने बताया कि उन्होंने अक्सर अपने कार्ड को प्राथमिक पहचान दस्तावेज़ मानते हुए संग्रहीत किया था, और उनका आश्चर्य है कि अब इसे दिखाना अनिवार्य नहीं रहेगा। यह भ्रम आगे चलकर चयनित मतदान केंद्रों में लंबी कतारों और असुविधा का कारण बन सकता है।
भारत में समान बहस कई वर्षों से चल रही है। इसी तरह के फोटो‑आईडी कर्तव्य को लेकर भारतीय राजनीतिक दलों में भी मतभेद स्पष्ट हैं—एक ओर कुछ राज्य सरकारें इसे भ्रष्टाचार रोकने के साधन के रूप में अपनाने की कोशिश कर रही हैं, तो दूसरी ओर विरोधी दल इसे मतदान अधिकार के हनन के रूप में देख रहे हैं। इंग्लैंड का यह नया नियम भारतीय नीति निर्धारकों के लिए एक केस स्टडी बन सकता है, विशेषकर जब दोनों देशों में जनसंख्या संरचना और सामाजिक असमानताएँ समान प्रकार की चुनौतियों का सामना करती हैं।
संक्षेप में, इंग्लैंड में फोटो आईडी को अनिवार्य बनाते हुए मतदान कार्ड को वैकल्पिक घोषित करने का निर्णय, प्रशासनिक दक्षता की दलील के साथ सामाजिक समावेशिता की कीमत पर आया है। यह देखना बाकी है कि न्यायिक निगरानी, राजनैतिक दबाव और नागरिक आवाज़ें इस नीति को किस दिशा में मोड़ेंगी, और क्या चुनावी प्रक्रिया के मूल सिद्धांत—सभी योग्य नागरिकों का मुक्त और समरूप मतदान—को बचाया जा सकेगा।
Published: May 7, 2026