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Category: राजनीति

अमेरिका ने इरानी मिसाइल‑ड्रोन को नष्ट किया, हर्मज़ जलडमरूमध्य में तनाव तेज हुआ; भारत की सुरक्षा नीति पर नई परीक्षा

संयुक्त राज्य ने पिछले 24 घंटों में इराकी जलडमरूमध्य में अपने जहाजों को लक्ष्य बनाते हुए लॉन्च की गई कई मिसाइल‑ड्रोन को मार गिराया, अमेरिकी नौसैनिक कमांडर ने कहा। इन ड्रोनों को इरान की सैन्य ताकतों ने फायर किया था, जिसका उद्देश्य अमेरिकी वाणिज्यिक तथा सैन्य जलयान पर हमला करना था। इस घातक झड़प से नाजीब-सी अभी बनी शांति-सहमति के टूटने की आशंका उत्पन्न हो गई है, जबकि अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प ने इस जलडमरूमध्य में इरान द्वारा लगाए गए प्रभावी ब्लॉक को तोड़ने का सार्वजनिक लक्ष्य रखा है।

हर्मज़ जलडमरूमध्य, जो मध्य‑पूर्वी तेल की लगभग 21 प्रतिशत वैश्विक सप्लाई का रास्ता है, भारत की ऊर्जा सुरक्षा का एक नाजुक कड़ी है। लगभग 15‑20 प्रतिशत भारतीय आयातित कच्चे तेल इस शॉर्टकट से गुजरते हैं। इसलिए दिल्ली को अब इस तनावपूर्ण मु़हाने पर अपने दोहरे-खिलौने‑राजनीति की फिर से परीक्षा देनी पड़ेगी—एक ओर संयुक्त राज्य के साथ रणनीतिक साझेदारी को मजबूत बनाना, तो दूसरी ओर इरान के साथ आर्थिक व जलवायु‑संबंधी सहयोग को बरकरार रखना।

इसी बीच, विपक्षी दलों ने इस घटना को अमेरिकी बाहरी नीति की विफलता के रूप में उजागर किया। राष्ट्रीय सुरक्षा विशेषज्ञों ने कहा कि अमेरिकी नौसैनिक तैनाती ने न केवल तनाव को बढ़ाया है, बल्कि समुद्र में मुक्त नेविगेशन के झूठे वादे को भी उजागर किया है। "खुले समुद्र की रक्षा के नाम पर एक छोटे हिट‑एंड‑रन ऑपरेशन, जबकि असली खतरें—जैसे तेल की कीमतों में अस्थिरता, समुद्री डकैती, और जलवायु‑प्रभाव—पर पर्याप्त गठबंधन नहीं बना पाया है," एक विपक्षी सांसद ने टिप्पणी की।

केन्द्रीय सरकार ने तुर्मान में कहा कि वह इस क्षेत्र की स्थिरता में "सुरक्षित और जिम्मेदार" भूमिका निभाएगी और भारत के जहाज़ों की सुरक्षा के लिए अनिवार्य कदम उठाएगी। हालांकि, आलोचक इस बात पर सवाल उठाते हैं कि भारत ने अभी तक अपने स्वयं के समुद्री सुरक्षा बुनियादी ढांचे को पर्याप्त रूप से नहीं मजबूत किया है, जबकि अमेरिकी जहाज़ों को संरक्षक सतह पर रखा गया है। भारतीय नौसेना के आधुनिकीकरण योजना में कई परियोजनाएँ अभी भी व्यवधान के कारण स्थगित हैं, जिससे यह स्पष्ट होता है कि औसत भारतीय नागरिक को इस रणनीतिक दिखावे के पीछे के वास्तविक खर्च का पता नहीं चलता।

पर्यावरण और ऊर्जा विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि हर्मज़ जलडमरूमध्य में किसी भी उच्च-स्तरीय सैन्य टकराव से तेल की कीमतें तीन अंकों में उछाल सकते हैं, जिससे भारतीय उपभोक्ता वर्ग पर सीधे असर पड़ेगा। यह स्थिति भारतीय चुनावी माहौल में भी गंभीर प्रश्न उठाती है: क्या वर्तमान सरकार अंतरराष्ट्रीय तनाव के बीच राष्ट्रीय आर्थिक हितों की रक्षा के लिए सक्षम है?

संक्षेप में, अमेरिकी-इरानी टकराव न केवल मध्य‑पूर्व में एक अस्थिर शांति को धुंधला कर रहा है, बल्कि भारत के लिये एक दोधारी तलवार बन रहा है। यह परीक्षण दिखाता है कि विदेश नीति के बड़े बयानों को वास्तविक क्षमता, जवाबदेही और जनता के हित से जोड़ना कितना महत्वपूर्ण है—न कि केवल वादे‑और‑दावे के मंच पर।

Published: May 5, 2026