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Category: राजनीति

अमेरिका के सस्ते लेजर‑मार्गित रॉकेट और भारत की रक्षा नीति में दोहरी चुनौतियाँ

संयुक्त राज्य अमेरिका ने हाल ही में ‘एडवांस्ड प्रिसीजन किल वेपन सिस्टम’ (APKWS) नामक लेजर‑मार्गित रॉकेट को इरानी ड्रोन के खिलाफ इस्तेमाल किया। यह प्रणाली कोरियाई युद्ध में प्रयुक्त मूल हवाई तोप को लेजर ग्रिपिंग के साथ आधुनिक बनाकर कम लागत‑पर उच्च सटीकता वाला हथियार बना देती है। यद्यपि तकनीकी‑दृष्टि से यह कदम प्रशंसनीय है, परन्तु इस पर भारत के रक्षा‑नीति निर्माताओं और राजनेताओं के बीच तीव्र बहस छिड़ी है।

भारत‑अमेरिका द्विपक्षीय रक्षा समझौते के तहत नई तकनीक‑आधारित उपकरणों की खरीद पर विचार किया जा रहा है। सरकार ने बताया है कि APKWS जैसे ‘सस्ते‑पर‑समर्थ’ विकल्प भारत के तेज‑उभरते ड्रोन्स एवं हायपर‑सोनिक खतरों के जवाब में आवश्यक हो सकते हैं। हालांकि, इस पर मुख्यमंत्री एवं कुछ संगीतिक गठबंधन दलों ने सवाल उठाते हुए कहा है कि ‘सस्ते’ शब्द के पीछे लागत‑कटौती के साथ राइफल‑ड्रॉप तकनीकी की गुणवत्ता तथा स्वदेशी विकास को नज़रअंदाज़ किया जा रहा है।

विपक्षी पार्टियों ने सरकार के इस कदम को ‘विदेशी निर्भरता बढ़ाने’ और ‘रक्षा‑बजट को अनियंत्रित करने’ का आरोप लगाया। उन्होंने कहा, “यदि अपग्रेडेड कोरियन‑युद्ध‑टूपी को लेजर‑मार्गित बना कर हम US को कम कीमत पर बेच रहे हैं, तो अपने नागरिकों के लिए क्यों न स्वदेशी शोध‑और‑विकास को प्राथमिकता दें?” चुनाव‑सीजन के निकट आते ही इस मुद्दे को पार्टी‑गठन ने सार्वजनिक मंच पर उठाया, जिससे कई मतदाता वर्ग में ‘रक्षा‑खर्च बनाम सामाजिक‑ब्यौरा’ का सवाल खड़ा हो गया।

सभी पक्ष मिलकर इस बात पर सहमत हैं कि भारत को ड्रोन‑धमकियों के लिये तेज‑और‑सस्ती समाधान चाहिए। परन्तु विवाद इस बात में है कि क्या अमेरिकी सस्ते‑रॉकेटों को अपनाना भारतीय स्वनिर्माण क्षमता को धूमिल करेगा, या रणनीतिक साझेदारी के तहत तकनीकी हस्तांतरण के नए मार्ग खोलेगा। प्रशासन ने कहा कि APOKWS के सौदे में ‘स्थानीय उत्पादन’ और ‘जॉइंट‑वेंचर’ की संभावनाएँ शामिल हैं, परन्तु इस दावे को साक्ष्य‑आधारित रूप‑रेखा से अभी तक स्पष्ट नहीं किया गया।

जम्मा तौर पर, अमेरिकी लोज़र‑मार्गित रॉकेट की सफलता ने भारतीय नीति‑निर्माताओं को दोहरे मोर्चे पर खड़ा किया: एक ओर कम लागत‑पर उच्च क्षमतावान हथियार की तात्कालिक जरूरत, और दूसरी ओर स्वदेशी रक्षा‑उद्योग को पोषित करने की दीर्घकालिक जिम्मेदारी। जनता के सामने इस जटिल समीकरण को सहजता से प्रस्तुत करना, प्रशासन की जवाबदेही और पारदर्शिता की परीक्षा बन चुका है। समय बतलाएगा कि यह ‘सस्ता‑सुरक्षा’ मॉडल भारतीय लोकतंत्र और रक्षा‑क्षेत्र में किस रूप में निरंतर रहेगा।

Published: May 5, 2026