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Category: राजनीति

380 मिलियन पाउंड सब्सिडी के बिना जैगुआर लैंड रोवर ने किया यूके कार उत्पादन छोड़ने की धमकी

वित्तमंत्री के अधीन व्यापार विभाग (DBT) ने पिछले दिसंबर महीने के एक अंशुविश्वसनीय दस्तावेज़ में बताया कि यूके की सबसे बड़ी ऑटोमोबाइल नियोक्ता, जैगुआर लैंड रोवर (JLR), अपनी कार उत्पादन को ब्रिटेन से बाहर ले जाने और हजारों नौकरी घटाने की योजना बना रहा था – यदि उसकी सहायक बैटरियां निर्मित करने वाली कंपनी को 380 मिलियन पाउंड की सब्सिडी नहीं मिली होती।

यह खुलासा इस बात को रौशन करता है कि सरकार ने "इलेक्ट्रिक‑विद्युत् भविष्य" को बचाने के नाम पर बड़े पैमाने पर कर‑पैसमैदान किया, जबकि उसी समूह को दो अलग‑अलग मोर्चों पर आर्थिक समर्थन दिया गया। विरोधी दल ने इसे "सार्वजनिक धन का दोगुना कँधना" कहा, यह तर्क देते हुए कि इस तरह की मदद से केवल एक बड़े कॉरपोरेशन को ही फायदा हो रहा है, जबकि छोटे और मध्यम आकार के निर्माताओं को बाजार में जीवित रहने के लिए पर्याप्त सहारा नहीं मिल रहा।

वित्त मंत्रालय ने तुरंत इस मुद्दे को सुलझाने के लिए एक दुबारा मूल्यांकन का वादा किया, यह कहकर कि "राष्ट्र की ऊर्जा सुरक्षा और रोजगार संरक्षण दोनों को प्राथमिकता देने वाले निर्णय लिए गए हैं"। लेकिन आलोचनात्मक टिप्पणीकारों ने बता दिया कि ये बयानों में मौलिक विरोधाभास छिपा है: बैटरी सब्सिडी के कारण JLR ने उत्पादन स्थल नहीं बदला, पर उसी समय अन्य घरेलू कार निर्माताओं को ऐसी प्रतिपूर्ति नहीं दी गई, जिससे उद्योग के भीतर असमान प्रतिस्पर्धा कायम हो गई।

उपरोक्त तथ्य को राष्ट्रीय चुनाव की परिधि में ले जाकर, विपक्षी पार्टी ने सरकार पर "ऐसा आर्थिक पथ बुनने" का आरोप लगाया, जहाँ बड़े समूहों को निजी लाभ के लिए सार्वजनिक कोष का उपयोग किया जाता है, जबकि आम जनता को रोजगार के बड़े झटका का खतरा रहता है। इस दिशा-निर्देश के तहत संसद में कई सवाल उठाए गये, विशेष रूप से यह पूछते हुए कि भविष्य में समान सब्सिडी‑आधारित नीति को किस तरह से पारदर्शी और जवाबदेह बनाया जाएगा।

सार्वजनिक हित की दृष्टि से यह मामला दो धुरीयों पर उजागर होता है: पहला, किस हद तक सरकार को प्रमुख उद्योगों को बचाने के लिए कर‑पैसे खर्च करने चाहिए, और दूसरा, ऐसी महंगी सहायता के पीछे दीर्घकालिक आर्थिक स्थिरता और पर्यावरणीय लक्ष्यों की वास्तविक प्राप्ति कितनी संभव है। यदि सरकार का यह कदम भविष्य में भी दोहराया जाता रहा, तो यह न केवल राज्य सहायता के दुरुपयोग का संकेत देगा, बल्कि उद्योग में भरोसेमंद प्रतिस्पर्धा तथा नौकरी‑सुरक्षा के मूल प्रथाओं को भी धुंधला कर देगा।

Published: May 5, 2026