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Category: भारत

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सरकार ने नया वेतन कोड लागू किया: साप्ताहिक कार्य घंटे 48, ओवरटाइम दो गुना वेतन

नई दिल्ली – केंद्रीय श्रम और रोजगार मंत्रालय ने गुरुवार को वेतन एवं औद्योगिक संबंध कोड के अंतिम नियम जारी कर 48‑घंटे का साप्ताहिक कार्य समय औपचारिक कर दिया। इस नियम के तहत अतिरिक्त घंटे का कार्य दो गुना वेतन दर पर भुगतान किया जाएगा। साथ ही, सरकार ने राष्ट्रीय पुन:स्किलिंग फंड की घोषणा की, जिसका वित्तीय भार पूरी तरह नियोक्ताओं पर रहेगा।

कोड का लक्ष्य 2020‑21 में शुरू हुए व्यापक श्रम सुधारों को साकार करना था, लेकिन दो‑तीन साल बाद भी अंतिम व्यवस्था केवल अभी तैयार हुई है। प्रशासनिक धीमी‑गति ने नजदीकी उद्योग जगत में अनिश्चितता पैदा की है; कई कारखानों ने इस देरी को “नीति‑निर्माण में संस्थागत सुस्ती” के रूप में अभिव्यक्त किया है।

नियोजक संघों ने दो‑गुना ओवरटाइम का दावा किया कि यह उत्पादन लागत में और वृद्धि करेगा, जबकि श्रमिक प्रतिनिधियों ने कहा कि 48‑घंटे की सीमा से पहले ही उद्योगों में ‘डिक्री‑ड्रिवेन’ कार्य‑समय की प्रवृत्ति स्पष्ट हो रही है। मौजूदा कोड में कार्य‑समय को लेकर कोई लचीलापन नहीं दिया गया है, जिससे छोटे‑मध्यम उद्यमों को विशेष रूप से दबाव में आना संभव है।

सरकार के इस कदम की प्रशंसा इस तथ्य से भी कम नहीं होगी कि वेतन कोड अंतिम रूप से तैयार होने के बाद ही लागू किया गया, जबकि कई राज्यों में पहले से ही ऐसी नियामक अस्पष्टता के कारण रोजगार‑सुरक्षा पर सवाल उठ रहे थे। आलोचक तर्क देते हैं कि “सिर्फ नियम बनाना” ही नहीं, बल्कि उनका निपटारा करने के लिए एक सुदृढ़ निगरानी‑प्रणाली भी स्थापित करनी चाहिए, जो अभी तक स्पष्ट नहीं हुई है।

नया राष्ट्रीय पुन:स्किलिंग फंड, जिसे “रिट्रेनमेंट‑सहायता” कहा गया है, का उद्देश्य बेमेल कार्यबल को पुनः रोजगार योग्य बनाना है। फंड का पूँजीकरण “नियोक्ता योगदान” पर आधारित है, जिससे छोटे उद्यमों पर अतिरिक्त बोझ बढ़ेगा। नियोक्ता समूहों ने इस व्यवस्था को “असमंजस आर्थिक भार” बताया, जबकि श्रमिक संगठन इसे “सरकारी जिम्मेदारी का हल्का‑सुई” कहकर आलोचना कर रहे हैं।

समग्र रूप से, 48‑घंटे कार्य‑सप्ताह और दो‑गुना ओवरटाइम दर के आयाम स्थापित करना नयी नीति का सकारात्मक पहलू है, परन्तु कार्यान्वयन‑संबंधी अस्पष्टता, नियोक्ता‑केंद्री वित्त पोषण मॉडल और नियामक निगरानी की कमी प्रशासनिक उत्तरदायित्व को धुंधला कर देती है। यदि इन कमियों को शीघ्र सुधार नहीं किया गया तो नीति का वास्तविक लाभ श्रमिक वर्ग तक पहुँचना कठिन ही रहेगा।

Published: May 9, 2026