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Category: भारत

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सिकल तोड़ी, जीवन बिखरा: निर्माण कार्य में किसानों की अनदेखी

७ मई, २०२६ को मध्य प्रदेश के रैना जिले के एक छोटे से गाँव में एक साधारण घटना ने ग्रामीण भारत में शोषण के पुराने पैटर्न को फिर से उजागर किया। स्थानीय किसान रघु बलराम, जो लगभग चार दशकों से अपनी धान की कटाई के लिए सिकल का उपयोग कर रहे थे, को नगर निगम के अधिनियमित सड़क‑विस्तार कार्य के दौरान अचानक अपनी ही सिकल के साथ तख्तापलट करना पड़ा।

सड़कों के विस्तार के लिये भेजी गई यांत्रिक इकाई ने निर्माण क्षेत्र में प्रवेश करते ही रघु के घर के पास खड़ी सिकल को तोड़ दिया। सिकल के टुकड़ों को गिरते धूल में मिलते ही, उसकी आजीविका—जो इस साधारण लोहे के उपकरण पर निर्भर थी—भी बिखर कर रह गई। यह घटना केवल एक व्यक्तिगत दुख नहीं, बल्कि एक प्रणालीगत विफलता की ओर संकेत करती है, जहाँ नीतियों के कागज़ी वादे जमीन पर मौजूद असहाय किसानों की वास्तविक ज़रूरतों को नहीं छू पाते।

तुरंत बाद में जिला अधिकारी ने घटना का उल्लेख कर माफी माँगी और “उचित मुआवजा” का आश्वासन दिया। फिर भी, इस आश्वासन में वह शब्द छिपा था कि “प्रक्रिया के अनुसार” मुआवज़ा दिया जाएगा, जिससे तीन हफ़्ते बाद भी रघु को कोई धनराशि नहीं मिली। यह लापरवाही केवल प्रशासनिक सुस्ती नहीं, बल्कि मौजूदा नीति‑निर्माण ढाँचे की झुर्रियों को भी उजागर करती है, जहाँ ग्रासरूट के मुद्दों को हल्के में लिया जाता है।

वर्तमान कृषि नीति, चाहे वह प्रधानमंत्री कुशल किसान आयुन्मुख योजना हो या न्यूनतम समर्थन मूल्य, इन बुनियादी उपकरणों की सुरक्षा को नज़रअंदाज़ करती है। जब भूमि अधिग्रहण के लिए “सार्वजनिक हित” का दावा किया जाता है, तो अक्सर पूँजी‑उन्मुख विकास के नाम पर किसान‑उत्पादक के सब्ज़ी को काट कर फेंक दिया जाता है। इस परिप्रेक्ष्य में, सिकल का टूटना केवल धातु का टुकड़ा नहीं, बल्कि सामाजिक सुरक्षा जाल के छिद्र का प्रतीक बन जाता है।

ऐसे मामलों में, न केवल त्वरित मुआवजे की आवश्यकता है, बल्कि एक व्यवस्थित शिकायत निवारण तंत्र की भी, जो स्थानीय तहखाने से लेकर राज्य स्तर तक सुसंगत रूप से कार्य करे। सुधार के लिए सुझाव स्पष्ट हैं: १) सभी सार्वजनिक निर्माण कार्यों में ग्रामीण वस्तु संरक्षण प्रोटोकॉल अपनाना, २) सिकल‑जैसे बुनियादी उपकरणों के नुकसान पर त्वरित नकद सहायता, ३) पुनर्स्थापन के बाद भी किसान को आर्थिक स्वास्थ्य‑संकलन की गारंटी देना।

जब तक ये कदम कागज़ी रूप में नहीं बदले, तब तक सिकल के टुकड़े हवा में गूँजते वादों जैसी ही रहेंगे—अदृश्य, परंतु उन लोगों का जीवन अंधेरे में धकेलते रहेंगे, जो इन मुस्कान‑भरे वादों पर भरोसा करते हैं।

Published: May 7, 2026