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वीसीके ने टीवीके के गठबंधन प्रस्ताव को टालते हुए बाएँ दलों की सलाह ली
तमिलनाडु की राजनीति में एक नया मोड़ आया है। विदुथलै चिरुता गिरा कच्छी (वीसीके) के अध्यक्ष ने आज मंत्रालय के बाहर मीडिया से बात करते हुए कहा कि वे तमिलनाडु वैकल्पिक मंच (टीवीके) के गठबंधन प्रस्ताव को जल्दी नहीं ले रहे हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि विकल्पों पर विचार करने के लिए उन्होंने बाएँ मोर्चे के दलों से परामर्श किया है।
टीवीके, जो हाल ही में टॉप-लेवल पर गठबंधन की तलाश में है, ने वॉटर-आधारित सामाजिक कार्यक्रमों के समर्थन के बदले में वीसीके को कुछ दोहरे सीटों की पेशकश की थी। परंतु वीसीके के मुख्य नेता ने ‘समय की गति’ को लेकर विरोध जताते हुए कहा कि गठबंधन से पहले उन्हें बाएँ विचारधारा वाले दलों की रणनीतिक सलाह चाहिए। यह स्पष्ट संकेत देता है कि वीसीके अपनी मौजूदा नीति‑निर्माण दिशा की पुनः समीक्षा कर रहा है, जबकि चुनाव की घड़ी तेज़ी से चल रही है।
राज्य प्रशासन की प्रतिक्रिया व्याकुलता से भरी रही। मुख्य चुनाव अधिकारी ने कहा कि किसी भी गठबंधन या गठजोड़ के निर्णयों को भारतीय निर्वाचन आयोग के नियमों के दायरे में रहना चाहिए और समयसीमा का उल्लंघन न हो। इस बीच, तमिलनाडु सरकार की नीति‑निर्धारण इकाई ने कहा कि यह राजनीतिक विमर्श 'सिर्फ चुनावी गणित' नहीं, बल्कि सरकारी कार्यक्रमों पर भी प्रभाव डाल सकता है, विशेषकर सामाजिक कल्याण और दलित अधिकारों के क्षेत्र में।
विशेषज्ञों का मानना है कि वीसीके के इस कदम से दो प्रमुख समस्या उजागर होती हैं: पहला, सत्ता की तलाश में निजी-धार्मिक गठबंधन के प्रस्तावों के सामने नीतिगत स्थिरता का अभाव, और दूसरा, बाएँ मोर्चे के दलों से सलाह लेने की प्रक्रिया में असंतुलित शक्ति संबंध। जब गठबंधन के प्रस्ताव ‘प्रस्ताव’ तक ही सीमित रह जाते हैं और उनका ‘अंज़ाम’ अधीरता से टाला जाता है, तो प्रशासनिक सुस्ती और संस्थागत जवाबदेही की कमी स्पष्ट हो जाती है।
इस मोड़ ने तमिलनाडु की राजनीति में एक अनावृत खाड़ी खोल दी है। यदि वीसीके अंततः बाएँ दलों के साथ गठबंधन करेगा, तो वह टी.वी.के. को पीछे धकेल सकता है, जिससे आने वाले चुनाव में सत्ता‑परिवर्तन का परिदृश्य बदलेगा। वहीं, यदि वह सभी प्रस्तावों को अस्वीकार कर देगा, तो यह मतदाता आशा को धुंधला कर देगा और चुनावी गठबंधन की अराजकता को और बढ़ावा देगा।
संक्षेप में, वीसीके का अधीरता‑रहित निर्णय और बाएँ दलों की सलाह की माँग, राज्य‑स्तर पर नीति‑निर्माण, चुनावी व्यवस्था और सार्वजनिक जवाबदेही के बीच तनाव को स्पष्ट रूप से दर्शाती है। यह राजनीतिक क्षण, प्रशासनिक कमजोरी और नीति‑निर्माण में व्यवधान का संयोजन, आगामी विधानसभा चुनावों की दिशा को पुनः लिख सकता है।
Published: May 7, 2026