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Category: भारत

विदेश मंत्रालय ने फुजैराह में हुए हमले को “अस्वीकार्य” कहा, तीन भारतीय घायल

वर्तमान में, संयुक्त अरब अमीरात के फुजैराह में घटी एक अज्ञात हमले में तीन भारतीय नागरिक घायल हो गए। यह घटना 5 मई 2026 को सामने आई, जब मुख्‍यतः काम‑काज के लिये प्रवासित भारतीयों ने अपने कार्यस्थल पर सामान्य दिन बिताया था।

भारत के विदेश मंत्रालय ने इस घटना को “अस्वीकार्य” बताते हुए तुरंत कूटनीतिक निंदा व्यक्त की। दूतावास ने कहा कि भारतीय नागरिकों की सुरक्षा राष्ट्र के सर्वोच्च हितों में शामिल है और इस प्रकार के हमले को सहन नहीं किया जा सकता। इसके साथ ही, गंभीर रूप से घायल भारतीयों को उपचार हेतु आवश्यक सहायता प्रदान करने, साथ ही उनके परिवारों को सूचित करने के लिए कूटनीतिक चैनलों को सक्रिय किया गया।

हालाँकि, इस त्वरित वचनबद्धता के पीछे प्रशासनिक व्यवधानों का आश्चर्यजनक चित्र उभरता है। पिछले वर्षों में विदेश मंत्रालय द्वारा संकट में फंसे प्रवासियों के लिये दी गयी प्रतिक्रिया अक्सर देर‑से‑देर (या “इंतज़ार‑से‑इंतज़ार”) रही है। फुजैराह में इस हमले के बाद, प्रथम सूचना प्राप्त होते ही स्थायी रूप से स्थापित संकटनिर्धारण इकाई (Crisis Management Cell) को सक्रिय करना अपेक्षित था, परंतु ज्ञात रिपोर्टों से पता चलता है कि प्रारम्भिक स्तर पर समन्वय में विलंब हुआ।

ध्यान देने योग्य है कि भारतीय सरकार ने 2019 में «विदेश में रहने वाले भारतीय नागरिकों की सुरक्षा अधिनियम» का प्रसार किया था, जो विदेश में कार्यरत भारतीयों के लिये आपातकालीन सहायता, तेज़ पुनर्वास और वैध प्रतिपूर्ति तंत्र स्थापित करने का लक्ष्य रखता था। इस हमले में स्पष्ट होता है कि नीतियों का निर्माण तो हुआ, पर उनका प्रभावी कार्यान्वयन अभी भी संस्थागत सुस्ती से जूझ रहा है। कूटनीतिक स्तर पर संगठित प्रतिक्रिया के बजाय, अक्सर व्यक्तिगत दूतावासों को “सुरक्षा अधिकरण” के अधीन कर दिया जाता है, जिससे राष्ट्रीय स्तर पर आपातकालीन प्रबंधन का मानक घट जाता है।

गुर्म्सुल्तान‑दिशा के प्रति भारत की विदेशी नीति ने हमेशा आर्थिक सगाई को प्राथमिकता दी है, जबकि सुरक्षा के पहलुओं को द्विपक्षीय समझौते के माध्यम से हल करने की प्रवृत्ति रखी है। फुजैराह में इस प्रकार के हमले ने यह प्रश्न खड़ा किया है कि क्या कूटनीतिक आश्वासन ही पर्याप्त है, या भारत को अपने प्रवासियों के लिये बुनियादी सुरक्षा कवच, जैसे कि द्विपक्षीय सुरक्षा समझौते, विशेष क्षेत्रों में “सुरक्षा प्रोटोकॉल” स्थापित करने की आवश्यकता है।

समय‑से‑समय पर दक्षिण‑एशियाई प्रवासियों के लिये संरचनात्मक जोखिम का आकलन करने की नीति‑नीति के अभाव में, इस प्रकार की घटनाएँ सार्वजनिक भरोसे को हिला देती हैं। सरकार को तत्काल कार्य योजना बनानी होगी, जिसमें शामिल हों: (i) त्वरित आपातकालीन प्रतिक्रिया इकाई की स्थापना, (ii) विदेश में भारतीयों के लिये मेडिकल एम्बुलेन्स और विमानन सहायता का प्री‑एग्रीमेंट, (iii) द्विपक्षीय सुरक्षा समझौतों का पुनरावलोकन, तथा (iv) प्रवासियों को जोखिम‑परिचालन प्रशिक्षण।

संक्षेप में, फुजैराह में हुए इस हमले ने भारतीय प्रशासनिक तंत्र की प्रतिबंधात्मक कार्यप्रणाली को उजागर किया है। अस्वीकार शब्द का प्रयोग उचित है, परंतु शब्दावली के साथ ठोस कार्रवाई का अभाव ही अब तक की सबसे बड़ी विफलता रही है। इस संकट को अवसर बनाकर, भारत को अपनी बाहरी सुरक्षा नीति को पुनः परिभाषित करना होगा, ताकि भविष्य में ऐसी “अस्वीकार्य” घटनाओं को मात्र कूटनीति के शब्दों से नहीं, बल्कि व्यावहारिक उपायों से ही रोक सकें।

Published: May 5, 2026