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Category: भारत

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विजयन की अतिरंजित आश्वासन ने बुनियादी विफलता को जन्म दिया: केरल में सीपीएम ने नाकामी का विश्लेषण शुरू किया

केरल सरकार के मुख्य मंत्री पिनारायी विजयन द्वारा पिछले दो वर्षों में प्रस्तुत किए गए विकास‑आधारित प्रोजेक्शन, जो आर्थिक वृद्धि, रोजगार सृजन और बुनियादी ढाँचा निर्माण में अभूतपूर्व प्रगति का वादा करते थे, अब गंभीर प्रश्नों के समुद्र में डूब रहे हैं। राज्य के जाति-आधारित निर्वाचन परिणामों में सीपीएम को मिली बहुस्तरीय हार के बाद पार्टी ने आधिकारिक तौर पर इस ‘डिबैकल’ की जाँच‑परिचय का कार्य आरम्भ कर दिया है।

विजयन की सरकार ने 2024‑25 में वार्षिक जीडीपी वृद्धि को 8‑9% तक बढ़ाने का लक्ष्य घोषित किया था, साथ ही 2025 में 10,000 मी.मी.³ जलविद्युत क्षमता तथा 5 % रोजगार वृद्धि का आश्वासन दिया गया था। वास्तविक आंकड़े, जो राज्य आँकड़ों के अनुसार 2025‑26 में 4.3% की सीमित वृद्धि और जलविद्युत परियोजनाओं में 2,000 मी.मी.³ की कम उत्पादन दिखाते हैं, न केवल लक्ष्य से बेमेल हैं, बल्कि सार्वजनिक फाइनेंस में असंतुलन को भी उजागर करते हैं।

प्रशासनिक प्रतिक्रिया धीमी और असंगत रही। केरल जल विभाग की परियोजना निगरानी समितियों ने कई बार रिपोर्टें प्रस्तुत कीं, परंतु उन पर कार्यान्वयन की दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। परिणामस्वरूप, जलप्रदूषण, जलसंसाधन की कमी और बिजली कटौतियों की शिकायतें तेज़ी से बढ़ीं। इस प्रकार नीतिगत आश्वासन व वास्तविक कार्यान्वयन के बीच का अंतर प्रशासनिक सुस्ती को स्पष्ट रूप में उजागर करता है।

नीति‑निर्माण प्रक्रिया में नियोजित सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP) मॉडल को भी निरंतर टाल‑मटोल का सामना करना पड़ा। कई निजी निवेशकों ने अनुबंधीय शर्तों में अस्पष्टता और अधिकारिक ब्योरे में देरी का उल्लेख किया, जिससे निवेश आकर्षण कमज़ोर रहा। इस दौर में सरकार ने बिचौलियों को प्राथमिकता देते हुए मूलभूत संरचना परियोजनाओं की गति में अनावश्यक देरी की, जो सार्वजनिक हित के प्रति अनुचिंतन का स्पष्ट संकेत है।

सतत जवाबदेही के अभाव ने नागरिक भरोसे को हिला दिया। कई सामाजिक संगठनों ने सूचना के अधिकार (RTI) के माध्यम से तथ्यों की मांग की, परंतु उत्तरों में अक्सर ‘भ्रष्टाचार की जाँच चल रही है’ जैसे अस्पष्ट बयान ही देखे गए। ऐसी स्थिति में लोकतांत्रिक व्यवस्था की तीव्रता और सरकारी संस्थाओं की विश्वसनीयता दोनों पर प्रश्न खड़े होते हैं।

सीपीएम ने अब अपनी आंतरिक कार्यसमिति के माध्यम से “प्रोजेक्ट री‑एजुमेंट” और “अधिसूचना प्रबंधन” पर विशेष रिपोर्ट तैयार करने का आदेश दिया है। यह कदम, यद्यपि प्रशंसनीय है, तभी सार्थक होगा जब इसका प्रयोग नीतिगत विफलताओं को सुधारने के ठोस उपायों में किया जाये, न कि केवल राजनीतिक बचाव में।

केवल वैध आंकड़े, स्पष्ट उत्तरदायित्व और समय‑सापेक्ष कार्यान्वयन ही इस बात को तय कर सकते हैं कि अतिरंजित आश्वासन का दुष्परिणाम अंततः शासन के पुनर्निर्माण की ओर ले जा सके या अंततः सार्वजनिक कल्याण पर गहरा सेंध लगा सके।

Published: May 8, 2026