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Category: भारत

राहुल गांधी ने बंगाल‑असम चुनाव में ‘भ्रष्टाचार’ का आरोप, ईसी पर सवाल उठाए

भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के अध्यक्ष राहुल गांधी ने 5 मई 2026 को सार्वजनिक सभा में कहा कि बिहार की राष्ट्रीय पार्टी (BJP) ने 2026 के बंगाल तथा असम विधानसभा चुनावों में ‘इलेक्शन कमीशन की मदद’ से परिणामों को मोड़ दिया। उन्होंने यह आरोप कई बार दोहराते हुए, उम्मीदवार चयन, वोट‑केन्द्रीकृत तकनीकी साधनों और गड्ढे‑बुजुर्गी के माध्यम से प्रभावी धोखाधड़ी का उल्लेख किया।

गांधी जी ने इस संदर्भ में ‘सत्रह‑सत्रह’ करोड़ वोटों की ‘असामान्य वृद्धि’ का हवाला दिया, जिससे यह संदेह उत्पन्न हो कि मतदान प्रक्रिया में अनुचित हस्तक्षेप हुआ। उन्होंने तत्काल एक स्वतंत्र आयोग के गठन की माँग की, जिसमें सार्वजनिक प्रतिनिधियों, न्यायपालिका और सर्वेक्षण विशेषज्ञों को शामिल किया जाए, ताकि ‘जाच‑परख’ को सख़्त और पारदर्शी बनाया जा सके।

इलेक्ट्रॉनिक कंप्लायंस (ईसी) ने इस पर आधिकारिक टिप्पणी देते हुए कहा कि चुनाव परिणामों की घोषणा से पहले सभी प्रोटोकॉल, रैखा‑परिक्षा और दूर्यवादी उपकरणों की वैधता की जाँच की गई थी। आयोग ने आगे कहा कि “किसी भी परिस्थिति में चुनावी प्रक्रिया की शुद्धता, निष्पक्षता और गोपनीयता को बनाए रखने के लिये मौजूदा नियामक ढाँचा पर्याप्त है” और “आरोपों की सच्चाई स्थापित करने हेतु उचित कानूनी प्रक्रिया अपनाई जाएगी”।

बिहार की राष्ट्रीय पार्टी (BJP) के मुख्य कार्यकारी अधिकारी ने इस आरोप को “बिना आधार के, निराधार टिप्पणी” कहा, और कहा कि पार्टी ने ‘जनता के विश्वास’ को जीतने के लिये ‘विकास‑हंगामे’ व ‘सुस्थिर प्रशासन’ को आधार बनाया। उन्होंने यह भी कहा कि ‘इलेक्शन कमीशन’ ने ‘समान अवसर’ के सिद्धांत पर सभी दलों को कार्य करने की अनुमति दी।

राजनीतिक विश्लेषकों का तर्क है कि इस तरह के सार्वजनिक आरोप चुनावी माहौल में संवादहीनता बढ़ाते हैं। वे संकेत देते हैं कि यदि वास्तविक में चुनावी प्रक्रिया में ‘डिजिटल धोखाधड़ी’, ‘डेटा‑गडबड़ी’ या ‘सहयोगी तकनीकी मदद’ जैसी बातें मौजूद हों, तो मौजूदा मॉनिटरिंग तंत्र को पुनः मूल्यांकन करने की आवश्यकता है। अन्यथा, लगातार ऐसे संदेहों से सार्वजनिक भरोसा कमजोर हो सकता है, जिससे लोकतांत्रिक संस्थानों की विश्वसनीयता पर प्रश्नचिन्ह लगते हैं।

गाँधी की मांग के उत्तर में, कुछ विधायी सदस्यों ने प्रस्तावित किया है कि संसद में ‘इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों की सुरक्षा’, ‘डेटा‑प्रोटोकॉल की बाहरी ऑडिटिंग’ तथा ‘रिपोर्टिंग मैकेनिज़्म की पारदर्शिता’ पर विशेष समिति का गठन किया जाए। यदि यह कदम उठाया जाता है तो यह न केवल भाजपा-इसी सहयोग के दावों को स्पष्ट करेगा, बल्कि चुनावी प्रशासन में मौजूदा ‘संस्थागत सुस्ती’ को भी मिटाने का अवसर प्रदान करेगा।

वर्तमान में, इस मुद्दे पर कोई औपचारिक शिकायत दर्ज नहीं हुई है, न ही किसी न्यायालय में मामला दाखिल किया गया है। ये तत्व राज्य‑स्तर पर शासकीय जवाबदेही के लिए एक चुनौती प्रस्तुत करते हैं—कि कैसे सार्वजनिक दावों को त्वरित और निष्पक्ष जांच के माध्यम से स्थापित किया जाए, जबकि चुनावी प्रक्रिया की निरंतरता और निष्पक्षता बनी रहे।

Published: May 5, 2026