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Category: भारत

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रुबियो की भारत यात्रा से पहले, गोर ने $20 अरब के संभावित भारतीय निवेश की सराहना की

विदेशी मामलों के राज्यमान्‍य गोर ने 12 मई को होने वाली अमेरिकी सीनेटर मार्को रूबियो की भारत यात्रा से ठीक पहले $20 अरब के आकार के संभावित निवेश को राष्ट्रीय विकास का बेजोड़ अवसर कहा। उन्होंने इस अवसर को ‘दोनों देशों के आर्थिक सहयोग में नया माइलस्टोन’ घोषित करते हुए, विशेषकर नवीकरणीय ऊर्जा, सूचना प्रौद्योगिकी और दवा उद्योग में इन निवेशों की संभावना उजागर की।

वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय ने बताया कि ये निवेश मुख्यतः अमेरिकी स्टार्ट‑अप इकोसिस्टम, सौर पैनल निर्माण और बायो‑फार्मास्यूटिकल्स के क्षेत्र में होने वाले सहयोग पर केंद्रित हैं। इसके लिये भारत ने कई नीतिगत प्रोत्साहन, जैसे इलेक्ट्रॉनिक डेटा एक्सचेंज प्लेटफ़ॉर्म में आसान पंजीकरण, करेज़ छूट व फॉलो‑अप के लिये विशेष एक‑स्थल संपर्क बिंदु, तैयार कर दिया है।

हालाँकि, इस दावों के पीछे कई प्रशासनिक झंझट छिपे हुए हैं। पिछले दो वर्षों में समान पैमाने के विदेशी निवेशों के लिये अनुमोदन प्रक्रिया में औसत 12‑महीने का विलंब रहा है, जिसमें कई प्रमुख परियोजनाओं को क्लिहेस्ट्रोफिलिक क्लियरेंस और भूमि‑अधिग्रहण की बोझिल प्रक्रियाओं का सामना करना पड़ा। इस संदर्भ में, गोर की प्रशंसा को ‘नीति‑निर्माण की तेज़ी’ का दावा करने के बजाय ‘उद्यमी आशा की झलक’ कहना अधिक सटीक रहेगा।

नीति‑निर्माताओं द्वारा प्रस्तुत प्रोत्साहन‑पैकेज में कुछ स्पष्ट lacunae भी हैं। दुर्लभ धातु एवं विशेष उपकरणों की आयात में अभी भी दोहरी कर व्यवस्था और अनावश्यक तकनीकी विनियम बरकरार हैं, जो निवेशकों के लिये अतिरिक्त बाधा बनाते हैं। साथ ही, परियोजना‑पंजिकरण में ‘एक‑स्थल संपर्क बिंदु’ की उपस्थिति का अभाव कई बार औद्योगिक ब्यूरो के बीच असंगत निर्देशों का कारण बनता है, जिससे नीतियों का प्रभावी कार्यान्वयन बाधित रहता है।

केंद्रीय सरकार ने इस अवसर को ‘विकास की गति को तेज़ करने’ का औचित्य दिया, परंतु वास्तविक प्रशासनिक जवाबदेही अभी भी प्रश्नवाचक है। सार्वजनिक सूचना अधिकार (RTI) के तहत कई प्रार्थनाओं के जवाब में लंबित या अपूर्ण डेटा उपलब्ध कराए जा रहे हैं, जिससे निवेशकों को सही‑समय पर निर्णय लेना कठिन हो रहा है। संस्थागत सुस्ती और नीति‑निर्णयों में पारदर्शिता की कमी, इस स्तर के निवेश को साकार करने के लिये आवश्यक विश्वास को नष्ट कर रही है।

रुबियो की यात्रा के बाद यदि ये $20 अरब की संभावनाएं वास्तविक निवेश में परिवर्तित होती हैं, तो यह भारतीय नीति‑निर्माताओं के लिये एक परीक्षण होगा: क्या उन्होंने केवल शब्दों से नहीं, बल्कि सुदृढ़ प्रशासनिक ढाँचा और समय पर निष्पादन से इस अवसर को पकड़ सकेंगे? यह भारतीय उद्यमी वर्ग और विदेशी भागीदारों की धीरज और नीति‑निर्माताओं की जवाबदेही दोनों पर ही निर्भर करता है।

Published: May 7, 2026