राघव चड्ढा ने पंजाब सरकार पर ‘वेंडेटा राजनीति’ का आरोप, राष्ट्रपति मूर्मु से सुरक्षा की माँग
राज्यसभा सदस्य राघव चड्ढा ने 5 मई, 2026 को एएपी‑शासन वाले पंजाब राज्य की सरकारी मशीनरी को विपक्षी पक्ष‑परिवर्तन करने वाले सांसदों के खिलाफ ‘राजनीतिक प्रतिशोध’ के साधन के रूप में उपयोग करने का सीधा आरोप लगाया। चड्ढा का कहना है कि राज्य के पुलिस, राजस्व एवं अन्य एजेंसियों को केवल उन विधायकों को निशाना बनाकर तैनात किया गया है, जो भाजपा में शामिल हुए हैं, जिससे प्रशासनिक संसाधनों का वैध उपयोग ही नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक प्रक्रिया की बुनियाद ही क्षीण हो रही है।
इस संदर्भ में चड्ढा ने राष्ट्रीय स्तर पर राष्ट्रपति द्रौपदी मूर्मु से मुलाकात की, जहाँ उन्होंने इन घटनाओं को संविधान के आश्रय में लाने तथा सुरक्षा के उपायों की मांग की। इस मुलाकात के दौरान राष्ट्रपति ने आश्वासन दिया कि केंद्र की संस्था‑न्यायिक संरचनाएँ ऐसे किसी भी दमन के खिलाफ त्वरित प्रतिक्रिया देंगी। इसी प्रकार, राजनैतिक ‘बागी’ सांसद संदीप पाथक ने भी संवैधानिक सुरक्षा की मांग की, और राष्ट्रपति ने उन्हें समान आश्वासन प्रदान किया।
इन आरोपों के बावजूद पंजाब सरकार ने अभी तक कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं की है, जिससे प्रशासनिक जवाबदेہی और पारदर्शिता की कमी पर प्रश्नचिह्न लगते हैं। ऐसी स्थिति में प्रान्तीय कार्यपालिका के ‘संसदीय भाग्यपरकता’ के प्रयोग से न केवल बहुलतावाद को नुकसान पहुँचता है, बल्कि अनुशासनहीनता के खतरे को भी बढ़ावा मिलता है।
नीति‑निर्माण के दृष्टिकोण से यह घटना दोहरी असफलता को उजागर करती है: एक ओर, राज्य‑स्तर पर राजनीतिक हस्तक्षेप से प्रशासनिक एजेंसियों की स्वायत्तता का उल्लंघन हो रहा है; दूसरी ओर, केंद्र के पर्यवेक्षण तंत्र की वहनीयता पर संदेह उत्पन्न हो रहा है। यदि राजनैतिक प्रतिशोध को रोकने हेतु कोई प्रभावी नियामक ढाँचा न हो, तो भविष्य में समान ‘वेंडेटा’ के मामले बढ़ सकते हैं, जिससे लोकतंत्र के मूल सिद्धांत—स्वतंत्र नागरिक‑राज्य संबंध—स्थायी रूप से क्षतिग्रस्त हो सकते हैं।
अंत में, यह स्पष्ट है कि केवल राष्ट्रपति के आश्वासन पर्याप्त नहीं। प्रशासनिक संस्थाओं को अपने नियामक कर्तव्यों का पालन करते हुए, पक्ष‑परिवर्तन करने वाले सांसदों के खिलाफ लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र जाँच करनी चाहिए, तथा यदि कोई दुरुपयोग सिद्ध होता है तो तीव्र अनुशासनात्मक कार्रवाई करनी चाहिए। ऐसी जवाबदेही ही सरकारी प्रणाली को पुनः विश्वसनीय बना सकती है और नागरिकों के विश्वास को पुनर्स्थापित कर सकती है।
Published: May 5, 2026