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Category: भारत

ममता बनर्जी ने ईसी-भ्रष्टाचार का आरोप, पदत्याग नहीं करेंगे

वेस्ट बंगाल में आयोजित 2026 की विधानसभा चुनावों के परिणाम घोषित होते ही राज्य के मुख्य मंत्री ममता बनर्जी ने मतदान प्रक्रिया को ईलेक्शन कमीशन (EC) द्वारा "भ्रष्ट" घोषित किया। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि इस तरह की धांधली के सामने वह अपने पद से इस्तीफा नहीं देंगे। यह बयान चुनावी परिणामों के दो दिन बाद, 5 मई को उनके बयान से उत्पन्न हुआ।

बनर्जी का आरोप मुख्यतः वोटों के गिनती में हस्तक्षेप, इलेक्ट्रॉनिक मैनेजेडर काउंटिंग सिस्टम (EVM) की अनधिकृत मॉडिफाइडेशन, और किसी‑न किसी चरण में चुनावी अधिकारी की लापरवाही पर आधारित है। उन्होंने तीन मुख्य बिंदुओं को उजागर किया—पहला, कई पॉलिंग स्टेशन पर इलेक्ट्रॉनिक फाइलों के अद्यतन में अनअनुपालन; दूसरा, मतगणना के दौरान असमानता से कार्यवाही; तथा तीसरा, उम्मीदवारों को पूर्व सूचना के बिना परिणाम में बदलाव।

इसी बीच, ईसी ने अपने आधिकारिक पोर्टल पर एक संक्षिप्त बयान जारी किया, जिसमें उन्होंने किसी भी अनुचित व्यवहार की जांच चल रही है, परन्तु अभी तक कोई ठोस सबूत नहीं मिलने की बात कही। केंद्रीय निर्वाचन आयोग के अध्यक्ष ने भी इस मुद्दे को “जाँच के भीतर” रखा, जिससे पहल की विफलता और संस्थागत उत्तरदायित्व पर प्रश्न उठते हैं।

राज्य सरकार के पक्ष में इस विवाद को लेकर प्रशासनिक प्रतिक्रिया अपेक्षाकृत धीमी रही। सिविल सेवाकर्मियों द्वारा किए गए कई रिकॉर्ड‑कीपिंग अनुरोधों पर देर से जवाब दिया गया, जिससे सार्वजनिक पारदर्शिता में गिरावट दर्ज हुई। केंद्र सरकार की ओर से भी किसी तत्काल हस्तक्षेप का संकेत नहीं मिला, जबकि कई संघीय अधिकारियों ने “स्वतंत्र जांच” की आवश्यकता पर जोर दिया। यह स्थिति संस्थागत सुस्ती और उत्तरदायित्व की कमी को उजागर करती है, जहाँ बहुपक्षक चुनावी प्रक्रिया में विश्वसनीयता की गिरावट स्पष्ट हो रही है।

नागरिक अभिकर्ताओं और राजनैतिक विश्लेषकों ने इस विकास को प्रशासनिक अक्षमता और नीति‑निर्माण की अयोग्यता के उदाहरण के रूप में चिह्नित किया। उन्होंने कहा कि अगर चुनावी प्रक्रिया में विश्वसनीयता नहीं बनी रह पाती, तो लोकतांत्रिक मॉडलों की स्थिरता पर गंभीर प्रश्न उठते हैं। इसी दौरान, कई भाजपा और लडका दलों ने EC के खिलाफ ‘सिस्टमिक सुधार’ की मांग की, जबकि विपक्षी दलों ने इस मामले को ‘प्रभावी जवाबदेही के अभाव’ का प्रमाण कहा।

वेस्ट बंगाल में इस विवाद का दीर्घकालिक प्रभाव अभी स्पष्ट नहीं है, पर यह स्पष्ट है कि लोकतांत्रिक संस्थानों की कार्यक्षमता पर भरोसा कमजोर हो रहा है। प्रशासनिक तीक्ष्णता, नियामक सुधार, तथा न्यायिक निरिक्षण के अभाव में ऐसी धांधली के आरोप भविष्य में भी पुनरावृत्ति का जोखिम उत्पन्न कर सकते हैं। इस परिदृश्य में केवल मौखिक प्रतिज्ञाएँ नहीं, बल्कि ठोस प्रक्रियात्मक सुधार ही विश्वसनीय चुनावी परिणामों को सम्भव बना सकते हैं।

Published: May 6, 2026