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Category: भारत

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मध्यमग्राम में सुवेन्दु आडहिकरी के करीबी सहयोगी चंद्रनाथ राठ की गोलीबारी से मौत, प्रशासन पर तीखा सवाल

पश्चिम बंगाल के उत्तर २४ पर्गना जिले के मध्यमग्राम में 6 मई 2026 को राजनीतिक नज़रिये से करीब हुए सहयोगी चंद्रनाथ राठ की फायरआर्म से गोली मार कर हत्या कर दी गई। राठ, जो राज्य के प्रमुख राजनेता सुवेन्दु आडहिकरी के भरोसेमंद सहयोगी के रूप में जाने जाते थे, शाम के समय स्थानीय सड़क पर गाड़ी चलाते हुए सात गोलियों से मारे गये।

घटना स्थल पर त्वरित पुलिस प्रविष्टि हुई, पर प्रथम सूचना के बाद 45 मिनट से अधिक समय तक मामूली जांच ही की गई। प्रारंभिक रिपोर्ट में बताया गया कि आरोपी बचकर फरार हो गया, पर घटना स्थल पर मौजूद नागरिकों के बयान के आधार पर संदेहित व्यक्तियों की पहचान नहीं हो पाई। आक्रमण के बाद राज्य पुलिस ने केस को ‘अपराधी समूह’ के नाम पर दर्ज किया, जबकि हस्ताक्षरित शिकायत में कहा गया था कि यह व्यक्तिगत प्रतिद्वंद्विता से उत्पन्न हिंसा है।

इस घटनाक्रम ने राज्य एरिया में शहरी सुरक्षा की ढील के सवाल खड़े कर लिये हैं। पश्चिम बंगाल में पिछले दो सालों में राजनीतिक हत्याओं और गैंग-संबंधी अपराधों में तीव्र वृद्धि दर्ज की गई है, पर प्रशासन द्वारा उठाए गए ठोस कदम दिखते नहीं हैं। नजदीकी पुलिस थाने में उपलब्ध फायरआर्म रजिस्टर में इस प्रकार की वारंट‑ड्राइविंग अनियमितताओं की पुनरावृत्ति का उल्लेख है, पर निरीक्षण समितियों के आदेशों पर कार्यवाही अक्सर ‘प्रशासनिक सुस्ती’ की स्याही में खत्म हो जाता है।

राज्य सरकार ने तुरंत उत्तर दिया कि मामला उच्च स्तर के जांच एजेंटों को सौंपा जा रहा है और ‘सुरक्षा पर पुनरीक्षण’ शुरू किया जाएगा। परंतु इस तरह के बयान में अक्सर ठोस कार्य‑सूची का अभाव रहता है। सार्वजनिक प्रतिनिधियों ने कहा कि असुरक्षित राजनीतिक वातावरण में चुनावी प्रक्रिया के मूल सिद्धान्त ही धूमिल हो रहे हैं, और नागरिकों को अपनी मतदान की आज़ादी के लिए ‘जीवी सुरक्षा’ की आशा नहीं मिल पा रही।

नीति‑निर्माताओं को अब इस बात पर विचार करना चाहिए कि कानून‑व्यवस्था को मजबूती देने हेतु तेज़ फ़ॉरेंसिक प्रोसेसिंग, संवाद‑केंद्रित पुलिसिंग और राजनीतिक ध्रुवीकरण को कम करने हेतु सख्त परामर्श‑प्रोटोकॉल लागू किए जाएँ। अगर तत्कालिक उपायों के बिना निरंकुश हिंसा को तिरस्कार किया गया तो प्रशासनिक जवाबदेही का दायरा केवल शब्दों तक सीमित रहेगा, जबकि वास्तविक प्रशासनिक ठहराव जनता के विश्वास को और घटा देगा।

जहां तक पुनरावृत्ति की बात है, यह स्पष्ट है कि केवल ‘जाँच‑रिपोर्ट’ के साथ मामला बंद नहीं किया जा सकता। प्रभावी नीति‑निर्माण, निपुण कार्यान्वयन और निरंतर निगरानी के बिना, मध्यमग्राम जैसी शहरी कस्बों में शांति और लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं की रक्षा एक अधूरा वाद बन ही रहेगा।

Published: May 6, 2026