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Category: भारत

भगवत मान ने राष्ट्रपति दुरुप्रस्थ से छह पूर्व AAP सांसदों के खिलाफ त्वरित कार्रवाई की माँग की

नई दिल्ली, 5 मई 2026 – राष्ट्रीय स्तर के प्रमुख राजनेता भगवत मान ने आज राष्ट्रपति श्रीमती दुर्गा भाबहिया मुर्मु से मुलाक़ात की, जिसमें उन्होंने छह पूर्व आम आदमी पार्टी (AAP) सांसदों को लेकर गंभीर शिकायतें पेश कीं। मान ने कहा कि इन पूर्व सांसदों को संसद के संसाधनों का दुरुपयोग, गैर‑क़ानूनी संपत्ति अधिग्रहण और सार्वजनिक धन की खपत जैसी गंभीर आरोपों के तहत जांच के बावजूद कोई ठोस कार्यवाही नहीं हुई है।

राष्ट्रपति महल, जहाँ मुलाक़ात हुई, वह भारतीय लोकतंत्र के मूलभूत अधिकारों के सम्मान को दर्शाता है, परन्तु इस बैठक ने इस बात को भी उजागर किया कि कई मामलों में कार्यवाही की गति अत्यंत धीमी है। मान ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि “यदि इस संसद के मानदंडों को लागू नहीं किया गया तो लोकतांत्रिक संस्थाएँ ही क्षीण हो जाएँगी”।

छह पूर्व सांसदों पर अब तक कई एजेंसियों द्वारा जांच प्रारम्भ की जा चुकी है, परन्तु सरकार द्वारा अब तक कोई सार्वजनिक आदेश, सत्र‑डिस्प्लिनरी कार्रवाई या अनुशासनात्मक दंड नहीं दिया गया है। इस संकोच के पीछे प्रशासनिक प्रक्रियाओं की जटिलता, राजनीतिक तटस्थता का दावेदार स्वरूप और अक्सर “जिसे देखो, उससे बचो” की नीति को माना जा रहा है।

राष्ट्रपति कार्यालय ने इस अनुरोध को रिकॉर्ड किया है और संकेत दिया है कि मामलों की समीक्षा के बाद उचित कदम उठाए जाएँगे। परन्तु पिछले वर्षों में समान परिस्थितियों में दी गई प्रतिक्रिया अक्सर महीनों, कभी‑कभी सालों तक के विलंब के बाद ही आई है, जिससे सार्वजनिक भरोसा क्षीण होता हुआ दिखता है।

इस घटना ने दो प्रमुख प्रश्न उठाए हैं: प्रथम, सार्वजनिक संसाधनों के दुरुपयोग के मामलों में सरकारी संस्थाओं की जवाबदेही कितनी प्रभावी है? द्वितीय, क्या उच्चतम स्तर पर भी राजनीतिक दबाव या मौसमी विचारों के कारण न्याय की ओर सम्भावित रुकावटें मौजूद हैं? प्रशासनिक मार्गदर्शन में उल्लिखित “प्रभावी जांच एवं शीघ्र निष्पादन” की नीति यहाँ केवल कागज़ी रूप में ही ठहरी प्रतीत होती है।

विश्लेषकों का मत है कि यदि इस तरह के मामलों में त्वरित कार्यवाही नहीं की गई तो यह न केवल भ्रष्टाचार को हवा देगी, बल्कि लोकतांत्रिक संस्थाओं की कार्यक्षमता पर भी प्रश्नचिह्न लगायेगी। विपक्षी दल और नागरिक समाज ने इस पर पहले ही कई बार आवाज़ उठाई है, परन्तु संस्थागत अकार्यक्षमता ने अब तक इसे गहरी खाई में बदल दिया है।

जैसे-जैसे इस मुद्दे पर चर्चा बढ़ेगी, यह देखना होगा कि क्या राष्ट्रपति महल की प्रतिक्रिया केवल औपचारिक प्रक्रिया तक सीमित रहेगी या इस तरह के गंभीर दावों के लिये वास्तविक, त्वरित और पारदर्शी कार्रवाई होगी। जनता की अपेक्षा है कि शक्ति के शिखर से देने वाली जिम्मेदारी को समझा जाए और लोकतंत्र की मूलभूत नींव को सुरक्षित रखने के लिये आवश्यक कदम तुरंत उठाए जाएँ।

Published: May 6, 2026