तमिलनाडु में सरकार का गठन बाधित: टीवीके प्रमुख विजय के पास मात्र 10 सीटों की कमी, 7 मई को शपथ समारोह में अनिश्चितता
२२ मई को समाप्त हुए तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में तमिलनाडु वैजनन केन्द्रीय (टीवीके) दल ने 224 एंगेजेबल सीटों में 114 मंचन हासिल किए। एक पूर्ण बहुमत के लिये आवश्यक 118 सीटों से यह गठबंधन ठीक 10 सीटों से कम रहा, जिससे राज्य के प्रशासनिक परिदृश्य में नई अनिश्चितता बन गई।
टीवीके के प्रमुख एवं प्रमुख प्रार्थी, विजय कृष्णन, 7 मई को गवर्नर के सामने शपथ लेने के लिये निर्धारित हैं। तथापि, शपथ ग्रहण के बाद सरकार बनाने के लिये उन्हें अतीत में स्वतंत्र उम्मीदवारों, छोटे दलों और दलित-जनसमुदाय राजनैतिक गठबंधनों से समर्थन जुटाना पड़ेगा। इस प्रक्रिया में गवर्नर के बिचौलिये के रूप में कार्य करने की अनुमति है, परंतु अस्थायी गठबंधन के तहत सरकार को स्थायी शक्ति प्राप्त करने हेतु सत्ता में विश्वास मत (कोन्फिडेंस मोशन) की आवश्यकता पड़ेगी।
ऐसी स्थिति में प्रशासनिक उत्तरदायित्व दो पहलुओं में प्रकट होता है: प्रथम, राज्य कार्यवाहियों की निरंतरता के लिये एक सक्षम कार्यकारी का त्वरित गठन। द्वितीय, विधायी प्रक्रिया में स्थिरता बनाये रखने हेतु न्यूनतम कार्यकाल में एक स्पष्ट बहुमत स्थापित करना। वर्तमान में, मुख्यमंत्री के शपथ के बाद भी वित्त मंत्रालय, पास पोर्टफोलियो वाणिज्य एवं उद्योग, तथा सामाजिक कल्याण विभागों में काफी हद तक बिखरे हुए एग्जीक्यूटिव निर्णयों की संभावना है।
नीति-निर्माण पर पड़ने वाले प्रभाव भी स्पष्ट हैं। साल 2026 में प्रस्तावित जल संसाधन पुनर्गठन, कृषि सुगमता योजना और शहरी बुनियादी ढाँचा विकास कार्यक्रमों को पहले से ही धुंधले परिदृश्य ने घिरा दिया है। यदि गठबंधन वार्ता में देरी होती है, तो मौजूदा परियोजनाओं के लिये फंड रिलीज़, निरंकुश अनुबंधों की पुनः समीक्षा तथा स्थानीय प्रशासन के लिये निर्देशात्मक आदेशों का अभाव जोखिम पैदा करेगा।
सार्वजनिक जवाबदेही का प्रश्न भी उठता है। पिछले पाँच सालों में तमिलनाडु में संस्थागत सुस्ती की कई शिकायतें दर्ज हुई थीं—विशेषकर भूमि पुनर्वितरण, स्वास्थ्य सेवाओं की पहुँच और शैक्षणिक सुधराव में। अब, प्रतिबंधित बहुमत के कारण प्रशासन के लिये नीतिगत निरंतरता की गारंटी देना कठिन हो गया है, जिससे सामान्य जन को अपने अधिकारों के लिये आगे बढ़ने पर अधिक बाधाओं का सामना करना पड़ेगा।
राज्य के मुख्य कार्यकारी को अब केवल व्यक्तिगत लोकप्रियता ही नहीं, बल्कि बहु-पार्टी गठबंधन की कूटनीति में भी महारत हासिल करनी होगी। यदि वह असफल होते हैं, तो अगले दो महीने में अस्थायी सरकार की निरंकुशता या फिर गवर्नर द्वारा बिचौलिये की भूमिका का विस्तार संभावित है—जो लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं की विश्वसनीयता को झूठे प्रश्नों के सामने रखता है।
संक्षेप में, तमिलनाडु में वर्तमान राजनीतिक परिदृश्य प्रशासनिक क्षमता, नीति-निरंतरता और सार्वजनिक भरोसे के लिये एक कठिन परीक्षा बन चुका है। 7 मई का शपथ समारोह केवल औपचारिक चरण है; वास्तविक चुनौती उस शपथ के बाद आने वाली गठबंधन वार्ता, विश्वास मत और प्रभावी शासन की कार्यवाही में निहित है।
Published: May 5, 2026