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Category: भारत

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तमिलनाडु में टीवीके की जीत के बाद गठबंधन की उलझी कहानी: एआईएडीएमके फिशर और बाएँ दलों का अप्रत्याशित समर्थन

दिसंबर 2025 में तमिलनाडु के विधायी सभा चुनावों में टीवीके (तमिल जनता कांग्रेस) ने आश्चर्यजनक प्रदर्शन किया, जिससे राज्य की दो प्रमुख द्राविडियन पार्टियों—एआईएडीएमके और डीएमके—को अप्रत्याशित राजनीतिक जटिलता का सामना करना पड़ा। एआईएडीएमके के भीतर कई फिशर उभरे, और इनके बीच सत्ता निर्माण के लिए विभिन्न कूटनीतिक उपायों का दौर शुरू हुआ।

एआईएडीएमके के एक हिस्से ने तुरंत टीवीके के साथ गठबंधन का प्रस्ताव रखा, यह मानते हुए कि उनके मतभोगी मतदाता वर्ग को जोड़कर बहुमत बनाना संभव होगा। वहीं, पार्टी के सामान्य सचिव ने वैकल्पिक रूप से डीएमके के साथ समझौता करने का प्रयास किया, जिससे दो बड़े प्रतिस्पर्धी दलों के बीच एक असामान्य गठबंधन की संभावना बनी। दोनों दिशा-निर्देशों के बीच भागते हुए, एआईएडीएमके की नेतृत्व शृंखला में स्पष्ट नीति‑निर्माण की कमी और निर्णय‑प्रक्रिया में पारदर्शिता का अभाव उजागर हुआ।

परिदृश्य को मोड़ने वाला तत्व बाएँ दलों—मुख्यतः कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (मैार्क्सवादी) और उसके सहयोगी—का टीवीके के पक्ष में समर्थन था। बाएँ दलों ने विशिष्ट सामाजिक न्याय एजेंडा को देखते हुए टीवीके को समर्थन देने का सार्वजनिक घोषणा की, जिससे एआईएडीएमके और डीएमके दोनों के गठबंधन प्रस्ताव भंग हो गए। यह समर्थन न केवल एआईएडीएमके की कूटनीतिक चेष्टाओं को निरस्त कर गया, बल्कि राज्य के राजनीतिक संतुलन को भी बदल दिया।

इस घटना ने तमिलनाडु की प्रशासनिक प्रणाली में गहरी कमियों को उजागर किया। सत्ता‑निर्माण के दौरान मौखिक समझौते, कच्चे गठबंधन प्रस्ताव और स्पष्ट नीति‑दिशा की कमी ने नागरिकों को अनिश्चितता में डाल दिया। सरकार गठन में देरी से राजस्व संग्रह, विकास परियोजनाओं एवं कल्याणकारी योजनाओं के कार्यान्वयन में बाधाएँ उत्पन्न हुईं, जिससे आम जनता के जीवन‑स्तर पर प्रत्यक्ष असर पड़ा।

राज्य सरकार के मौजूदा प्रशासनिक ढाँचे में ऐसी स्थितियों के लिए कोई स्पष्ट विधिक या प्रक्रियात्मक प्रावधान नहीं है, जिससे संस्थात्मक सुस्ती और जवाबदेही की कमी स्पष्ट हो रही है। यदि इस प्रकार के चुनाव‑परिणाम के बाद गठबंधन की प्रक्रिया को नियमानुसार, पारदर्शी और समयबद्ध तरीके से संचालित किया गया होता, तो सार्वजनिक विश्वास को सुदृढ़ करने के साथ‑साथ नीति‑निर्माण में निरंतरता भी बनी रहती।

भविष्य में राजनीतिक दलों को चाहिए कि वे कूटनीति को सार्वजनिक विमर्श में ले आएँ, गठबंधन प्रस्तावों को स्पष्ट दस्तावेज़ीकरण के साथ प्रस्तुत करें, और प्रशासनिक संस्थाओं को ऐसे आकस्मिक परिस्थितियों के लिए तैयार रखें। तभी तमिलनाडु के नागरिकों को स्थिर शासन, जवाबदेह नीति‑निर्माण और विकास के वास्तविक लाभ मिल सकते हैं।

Published: May 9, 2026