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Category: भारत

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तमिलनाडु में कांग्रेस ने डीएमके से गठबंधन तोड़ते हुए वीजी के टीवीके को शर्तीय समर्थन दिया

6 मई, 2026 को तमिलनाडु की राजनीतिक धारा में एक नई दिशा मिली। भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने आधिकारिक तौर पर डॉ. एम.डब्ल्यू. राजन के नेतृत्व वाले ड्रमक (DMK) के साथ अपने गठबंधन को समाप्त कर दिया, और इसके बदले में विंचेज़ (Vijay) के नेतृत्व वाले तमिलवाणी कॅज्य (TVK) को "सामुदायिक बलों को बाहर रखें" की शर्त पर समर्थन का संकेत दिया। यह कदम, जो चुनावी रणनीति के रूप में सम्मानित किया गया, राज्य‑स्तरीय गठबंधन की परम्परागत उलझनों को फिर से प्रकट करता है।

कांग्रेस के प्रधान सचिव ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, "हम किसी भी सामुदायिक अथवा ध्रुवीकरण वाली शक्ति को हमारी नीति‑निर्माण प्रक्रिया में स्थान नहीं देंगे। इसलिए, हम टीवीके को शर्तीय समर्थन दे रहे हैं, बशर्ते वह इस सिद्धांत का पालन करे।" इस घोषणा के साथ ही, कांग्रेस ने डीएमके के साथ अपनी 2024‑2026 की गठबंधन अवधि को आधिकारिक तौर पर समाप्त कर दिया, जो अब तक राज्य के अधिकांश विकास कार्यक्रमों में केन्द्र‑राज्य समन्वय का एक प्रमुख उदाहरण रहा था।

स्थानीय माध्यमों ने इस परिवर्तन को दो‑तीन प्रमुख कारणों से जोड़कर देखना शुरू किया: प्रथम, डीएमके की अल्पसंख्यकों के प्रति अत्यधिक नीतियों को लेकर लगातार आलोचनाएँ; द्वितीय, कांग्रेस की राष्ट्रीय स्तर पर अपेक्षित "सांप्रदायिकता‑रहित" प्रतिमूर्ति को पुनः स्थापित करने की इच्छा; तथा तृतीय, आगामी विधानसभा चुनाव में "वोट‑बैंक" रणनीति को पुनः परिभाषित करने की ज़रूरत।

राज्य प्रशासन ने इस विकास को तत्कालीन शांति एवं व्यवस्था के जोखिम के रूप में ही नहीं, बल्कि नीति‑निर्माण प्रक्रिया में संभावित स्थिरता‑भंग के रूप में पहचाना। मुख्यमंत्री के कार्यालय ने त्वरित बयान में कहा, "विभिन्न राजनैतिक ताकतों के बीच गठबंधन बदलना लोकतांत्रिक प्रक्रिया का हिस्सा है, परंतु प्रशासन को इसके परिणामस्वरूप उत्पन्न हो सकने वाले अग्निपरीक्षण को रोकने के लिये सतर्क रहना होगा।" इस पर केंद्र सरकार की मुख्य कार्यालय ने भी "राज्य‑केन्द्र संवाद के माध्यम से संतुलन बनाए रखने" की बात दोहराई।

विशेषज्ञों का तर्क है कि कांग्रेस का यह कदम केवल वोट‑बैंक की तलाश नहीं, बल्कि एक रणनीतिक संकेत है, जिससे केंद्र‑राज्य गठबंधन में मौजूद संस्थागत सुस्ती को तोड़ने की कोशिश की जा रही है। "सामुदायिक बलों को बाहर रखने" की शर्त का प्रयोग, व्यवहार में, सरकारी नीति‑निर्माण में ध्रुवीकरण‑रोधी मानकों को लागू करने के लिये वैध साधन हो सकता है, परंतु इसके अभाव में यह केवल एक रुख़ ओढ़ा हुआ बयान बन जाता है। इस प्रकार, जब तक राजनैतिक गठबंधन की निरंतरता के बजाय पारदर्शी नीति‑फ्रेमवर्क नहीं स्थापित किया जायेगा, तब तक संस्थागत जवाबदेही केवल कागज़ी ढांचों तक सीमित रहेगी।

नागरिक समाज की प्रतिक्रिया भी मिश्रित रही। कई सामाजिक संगठनों ने "सामुदायिक शक्ति को बाहर रखने" के स्पष्ट वादे को सराहते हुए कहा कि यह भाषा कई दशकों तक निरंतर चलती आ रही जाति‑आधारित राजनीति को चुनौती देती है। वहीं, कुछ मान्यवादी समूहों ने संकेत दिया कि शर्तीय समर्थन का अर्थ है कि यदि टीवीके अपनी वैचारिक दिशा में बदलाव नहीं करता, तो कांग्रेस फिर से अपनी मौजूदा गठबंधन को पुनर्विचार कर सकती है।

समग्र रूप से, तमिलनाडु की राजनीति में यह परिवर्तन प्रशासनिक लचीलापन, नीति‑निर्माण की वास्तविकता और सार्वजनिक जवाबदेही के प्रश्नों को फिर से उजागर करता है। गठबंधन परिवर्तन की प्रक्रिया में जेनेरिक नीतियों की जगह ठोस, जांची‑परखी रणनीतियाँ नहीं दिख पातीं, तो यह केवल चुनावी हलचल ही बना रहेगा। भविष्य में यह देखना बाकी है कि क्या कांग्रेस अपने शर्तीय समर्थन को वास्तविक शासन‑सुधार में बदलेगी, या यह केवल ध्रुवीकरण‑रोधी शब्दों का एक अल्पकालिक चयन बन कर रहेगा।

Published: May 6, 2026