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Category: भारत

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तमिलनाडु चुनाव: कांग्रेस के समर्थन से विजय ने सरकार का दावा, टीवीके अभी भी 118‑सदस्यीय बहुमत से पाँच सीटों से कम

दक्षिण-पूर्वी भारत के तमिलनाडु में आज शाम को परिणामों की घोषणा के बाद एक नई राजनैतिक संरचना का उदय हो रहा है। तमिलनाडु विधानसभा के 234 सीटों में से 113 सीटें टीवीके (Tamizhaga Vannila Kazhagam) के नेता विजय ने अपने गठबंधन के तहत जीतीं। यह संख्या 118‑सदस्यीय बहुमत तक पहुँचने के लिए पाँच सीटों की कमी दर्शाती है। इस अंतर को पाटने के लिए भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने सार्वजनिक रूप से अपना समर्थन दिया, जिससे विजय ने सरकार बनाने का दावेदारी किया।

कांग्रेस ने, जो इस बार के चुनाव में लगभग 20 सीटें जीतने में सफल रही, अपना समर्थन ‘ओपन‑हैंडेड’ तरीके से घोषित किया। हालांकि, यह समर्थन मात्र रचनात्मक नहीं, बल्कि सबसे बड़ा प्रश्न यह भी उठाता है कि क्या यह गठबंधन स्थायी रह सकता है, क्योंकि दोनों दलों की नीति‑विषयक प्राथमिकताएँ अक्सर टकराती रही हैं। प्रशासनिक दृष्टिकोण से देखिए तो अस्थायी समर्थन कभी‑कभी नीति‑निर्माण में अनिश्चितता उत्पन्न करता है, जिससे विकास के प्रमुख क्षेत्रों—जैसे जल सुरक्षा, जलवायु‑प्रतिकारक सड़कों का निर्माण, और स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार—पर असर पड़ता है।

इस संघर्षपूर्ण माहौल में, तमिलनाडु राज्य प्रशासन को तुरंत दो‑तीन प्रमुख प्रश्नों का उत्तर देना होगा: 1) कैसे एक कार्यशील सरकार का गठन किया जाए जो वोट‑से‑केस तक उत्तरदायी हो? 2) क्या कांग्रेस के समर्थन के बदले में नीति‑निर्माण में कोई आधिकारिक समझौता हुआ है, जो सार्वजनिक हित को बाधित कर सकता है? 3) क्या इस गठबंधन के कारण संविधान‑संगत तथा पारदर्शी कार्य‑प्रणाली की कमी नहीं होगी?

विजय की सरकार‑दावा, हालांकि अभी भी बहुमत की औपचारिक सीमा से बाहर है, राज्य के प्रशासनिक यंत्र को एक अस्थायी स्तिथी में डाल रहा है। यह अस्थिरता, यदि सही ढंग से संभाली नहीं गई, तो चुनाव आयोजन, मतदाता सूची अद्यतन, और शेड्यूलिंग प्रक्रियाओं में ज्ञात संस्थागत सुस्ती को और बढ़ावा दे सकती है। चुनाव आयोग ने अभी तक किसी विशेष अनुशासनात्मक कार्रवाई की घोषणा नहीं की, पर यह स्पष्ट है कि भविष्य में ऐसी स्थितियों के लिए त्वरित निर्णय‑प्रक्रिया स्थापित करना आवश्यक हो जाएगा।

सिडी (सामाजिक विकास) और सार्वजनिक स्वास्थ्य के मामलों में, योजनाओं की निरंतरता के लिये कम से कम एक स्थिर बहुमत आवश्यक है। यदि आगामी हफ्तों में कांग्रेस के समर्थन को स्थायी नहीं किया जा सका, तो तमिलनाडु में नीति‑निर्माण में ठहराव के संकेत मिल सकते हैं। इससे न केवल राज्य की आर्थिक विकास दर पर असर पड़ेगा, बल्कि दायित्वपूर्ण शासन प्रणालियों की विश्वसनीयता भी चुनौतीपूर्ण हो जाएगी।

अंत में, यह कहा जा सकता है कि तमिलनाडु में वर्तमान राजनीतिक धूंध, नीति‑निर्माण की अस्पष्टता, और संस्थागत धीमापन का मिश्रण, जनता के भरोसे को धीरे‑धीरे घटा रहा है। यदि इस अस्थिरता को जल्दी से सुलझाने हेतु स्पष्ट, पारदर्शी और जवाबदेह कदम नहीं उठाए जाते, तो तमिलनाडु के विकास के प्रमुख रस्ते—शिक्षा, स्वास्थ्य, बुनियादी ढाँचा—में और अधिक अडचनें उत्पन्न होंगी, जो अंततः पूरे देश की सार्वजनिक प्रशासनिक दक्षता को पीछे धकेलेंगी।

Published: May 6, 2026