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ड्रॉडो प्रमुख की ICBM घोषणा के कुछ ही दिनों बाद भाजपा ने 'अग्नि‑6' को ऐतिहासिक घोषणा किया
नई दिल्ली – 6 मई 2026 को रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) के प्रमुख ने संसद के बाहर एक संवाद सत्र में स्पष्ट किया कि भारत वर्तमान में अपनी पहली अंतरमहाद्वीपीय बॉलिस्टिक मिसाइल (ICBM) के विकास की प्रक्रिया में है। यह घोषणा सुरक्षा‑नीति के अधिसूचना‑परिचालन चरण में एक उल्लेखनीय मोड़ माना गया, जबकि इस पर सरकारी दस्तावेज़ी प्रमाण अभी सार्वजनिक नहीं हुए।
इसी सप्ताह के बाद भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के प्रवक्ता ने एक सार्वजनिक सभा में कहा, "अग्नि‑6 तैयार है और इतिहास लिखेगा।" इस बयान में विशेष रूप से यह संकेत दिया गया कि अग्नि‑6, जो ICBM का संभावित युग्म माना जाता है, परीक्षण‑तैयारी के अंतिम चरण में पहुँच चुका है। दो अलग‑अलग टिप्पणीकारों के बीच इस तरह का समयभेद, प्रौद्योगिकी‑विकास की गति को राजनीतिक घोषणा के साथ मिश्रित करने का निरन्तर पैटर्न दर्शाता है।
हालांकि रक्षा मंत्रालय ने कोई आधिकारिक प्रोजेक्ट के नाम या तकनीकी विवरण जारी नहीं किए हैं, लेकिन कई सीमित स्रोतों ने बताया कि अग्नि‑6 का विकास कई वर्षों से चल रहा है और इस पर राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद की मान्यताओं के तहत संवेदनशील जानकारी की रक्षा के लिये क़ानूनी प्रतिबंध लागू हैं। इस प्रकार के प्रतिबंध अक्सर पारदर्शिता में अंतर पैदा करते हैं, जिससे संसद के सदस्य और सार्वजनिक निरीक्षण संस्थाएँ वास्तविक प्रगति का मूल्यांकन नहीं कर पातीं।
सरकार के इस संचार‑प्रक्रिया में दो प्रमुख आधा‑संरचनात्मक कमजोरी स्पष्ट होती हैं। प्रथम, नीति‑निर्माण में तकनीकी विशेषज्ञता और राजनैतिक उत्साह के बीच संतुलन स्थापित करना अत्यंत आवश्यक है, परन्तु इन दोनों के बीच असंगति के कारण समय‑समय पर बेतुकी अभिव्यक्तियाँ सामने आती हैं। द्वितीय, संस्थागत उत्तरदायित्व की कमी – जहाँ रक्षा बजट का बड़ा हिस्सा ईंधन, बुनियादी ढाँचा और मानव संसाधन में व्यय होता है, वहीं प्रोजेक्ट‑आधारित प्रगति रिपोर्ट को सार्वजनिक रूप से प्रस्तुत करने की कोई अनिवार्य व्यवस्था नहीं है।
वित्त मंत्रालय के अनुसार, पांचवर्षीय रक्षा योजना 2024‑2029 में “उच्च-परिश्रमी प्रक्षेप्य प्रणालियों” के लिए अतिरिक्त 12,000 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं। परन्तु इन आंकों को केवळ बजट‑पुस्तक में ही सीमित रखने से नीति‑निर्माताओं को दीर्घकालिक रणनीतिक योजना बनाने में बाधा उत्पन्न होती है। इस संदर्भ में, विशेषज्ञों ने कहा है कि "अग्नि‑6" जैसे शब्दों को केवल राजनैतिक उत्साहवर्धक बनाने के बजाय, स्पष्ट परीक्षण‑समीक्षा‑स्वीकृति प्रक्रिया के साथ जोड़ना चाहिए, जिससे राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विश्वास बनाए रखा जा सके।
राजनीतिक दलों के बीच इस तरह के बयानों की शीघ्रता, प्रशासनिक सुस्ती और जवाबदेही की कमी को उजागर करती है। जब तक पारदर्शी तंत्र, समय‑बद्ध प्रगति रिपोर्ट और तकनीकी स्वतंत्र मूल्यांकन नहीं लागू होते, तब तक "इतिहास लिखने" के भाव को केवल भाषाई प्रदर्शन माना ही जाएगा, न कि वास्तविक प्रौद्योगिकी‑उन्नयन का प्रमाण।
Published: May 6, 2026